बीजेपी में शामिल होंगे सचिन पायलट? जानें क्या बोले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष

राजस्थान की कांग्रेस सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार और पेपर लीक मामलों में सचिन पायलट ने मोर्चा खोला हुआ है. 15 मई को अजमेर से जन संघर्ष यात्रा की शुरुआत करने के बाद सचिन पायलट ने प्रदेश सरकार को भ्रष्टाचार और पेपर लीक मामले में कार्रवाई करने के लिए 31 मई तक का अल्टीमेटम दिया है.

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राजस्थान के पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट राजस्थान के पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट

चंद्रशेखर शर्मा

  • जयपुर,
  • 24 मई 2023,
  • अपडेटेड 10:47 PM IST

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच की टकरार किसी से छिपी नहीं है. सचिन पायलट खुलकर गहलोत सरकार पर हमलावर हैं. इस सबके बीच पायलट के भाजपा में शामिल होने की चर्चाएं जोरों पर हैं. हालांकि इन दावों को पहले भी कई बार पायलट खारिज कर चुके हैं. इस सबके बीच इस पर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी का भी बयान सामने आया है. 

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दरअसल, प्रदेश की कांग्रेस सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार और पेपर लीक मामलों में सचिन पायलट ने मोर्चा खोला हुआ है. 15 मई को अजमेर से जन संघर्ष यात्रा की शुरुआत करने के बाद सचिन पायलट ने प्रदेश सरकार को भ्रष्टाचार और पेपर लीक मामले में कार्रवाई करने के लिए 31 मई तक का अल्टीमेटम दिया है.

वहीं अब 31 मई को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अजमेर में एक जनसभा को संबोधित करने आ रहे हैं. इसको लेकर सियासी गलियारों में चर्चाएं हैं कि जनसभा में पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट भाजपा का दामन थाम सकते हैं. वहीं इसको बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी ने भी अपने बयान से हवा दी है. हालांकि उन्होंने खुलकर अभी कोई टिप्पणी नहीं की है. 

सीपी जोशी ने आजतक से खास बातचीत में कहा कि इस बारे में कहना जल्दबाजी होगा, लेकिन यह तय है कि पूरे देश में लोग जानते हैं कि भविष्य की पार्टी कौन है. कौन ऐसी पार्टी है, जिसके पास मजबूत नेतृत्व है, जो विचारों के आधार पर चलती है.

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उन्होंने कहा कि 600 से अधिक मामले एसीबी ने दर्ज किए हैं, लेकिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत उन फाइलों को दबाकर बैठे हैं. खुद को  गांधीवादी कहने वाले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के विधायक और मुख्यमंत्री के सलाहकार ही अब कहने लगे हैं कि बिना पैसे के फाइल इस सरकार में नहीं चलती है. सरकारी कार्यालय में भ्रष्टाचार का पैसा कौन लाया, किसके पास जाना था, इसकी जांच सीबीआई और ईडी से होनी चाहिए. साढ़े 4 सालों में कांग्रेस में किस्सा कुर्सी का हुआ है. कोई कुर्सी बचाना चाहता है तो कोई कुर्सी पाना चाहता है.

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