बिना एडमिशन 40 हजार में यूनिवर्सिटी की डिग्री! जानिए पूरा मामला

राजस्थान पुलिस ने ऐसी गैंग को गिरफ्तार किया है जो देश की नामी यूनिवर्सिटी की फर्जी मार्कशीट और डिग्रियां उपलब्ध कराती थी. गैंग ने यूनिवर्सिटी में अपनी एजेंट भी सेट कर रखे थे. राजस्थान में बीते साल हुए सेकेंड ग्रेड टीचर भर्ती पेपर लीक मामले के मास्टरमाइंड के घर से फर्जी डिग्री मिली थीं.

Advertisement
फर्जी मार्कशीट बेचने वाला गैंग गिरफ्तार. फर्जी मार्कशीट बेचने वाला गैंग गिरफ्तार.

विशाल शर्मा

  • जयपुर,
  • 30 मार्च 2023,
  • अपडेटेड 1:36 PM IST

राजस्थान के जयपुर से ऐसे गैंग पुलिस के हत्थे चढ़ा है जो देश की बड़ी से बड़ी यूनिवर्सिटी की फर्जी डिग्रियां, मार्कशीट और सर्टिफिकेट उपलब्ध कराता था. इस गिरोह का संबंध राजस्थान सेकेंड ग्रेड टीचर भर्ती पेपर लीक मामले के मास्टरमाइंड भूपेंद्र सारण से भी है.

उसकी ही निशानदेही पर पुलिस ने इस गैंग के सदस्यों को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने 4000 से ज्यादा फर्जी डिग्रियां बरामद की हैं. साथ ही प्रोडक्शन वारंट पर भूपेंद्र सारण के आलावा आरोपी अजय, कैलाश, अशोक और प्रमोद को गिरफ्तार किया है. यह लोग 30-40 हजार रुपये में फर्जी डिग्रियां, मार्कशीट और सर्टिफिकेट बेचा करते थे.

Advertisement

जयपुर पश्चिम पुलिस उपायुक्त वंदिता राणा ने बताया, ''सेकेंड ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा में सक्रिय नकल गिरोह के आरोपियों के कब्जे से बीते साल दिसंबर में फर्जी डिग्रियां और सर्टिफिकेट मिले थे. इस पर मामला दर्ज करके जांच की गई थी. इसमें सामने आया है कि मुख्य सरगना भूपेन्द्र सारण है और वह उस समय मौके से फरार चल रहा था.''

उन्होंने आगे कहा कि आरोपी भूपेन्द्र सारण को हाई सिक्योरिटी कारागृह घूघरा घाटी अजमेर में न्यायिक हिरासत में रखा गया है. न्यायालय के आदेश पर भूपेन्द्र सारण को करणी विहार थाना पुलिस ने प्रोडक्शन वारंट प्राप्त कर इस मामले में गहनता से पूछताछ की. इसमें सामने आया कि वह आरोपी अशोक विजय से यह फर्जी डिग्रियां, मार्कशीट और सर्टिफिकेट लेता था.

फर्जी मार्कशीट बेचने वाला गैंग गिरफ्तार.

विजय, कैलाश किए गए गिरफ्तार

उपायुक्त वंदिता राणा के मुताबिक, विजय का नाम पता चलने के बाद उसकी तलाश में पुलिस जुटी हुई थी. फिर अशोक विजय और कैलाश को गिरफ्तार कर लिया. आरोपियों ने पुलिस को बताया कि नकल प्रकरण चर्चा में होने के कारण ऑफिस सांगानेर में शिफ्ट कर दिया है.

Advertisement

आरोपियों के बताए स्थान पर दबीश देकर पुलिस ने विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं के 4000 से अधिक फर्जी दस्तावेज बरामद किए साथ ही उनको तैयार करने की पेज शीट रिम, स्याही की शीशियां जब्त कीं.

यूं काम करती थी पूरी गैंग

आरोपी अशोक विजय ने पूछताछ के दौरान पुलिस को बताया कि विभिन्न संस्थानों में यह कार्य अजय भारद्वाज और प्रमोद सिंह की सहायता से होता था. सामने आया कि अशोक विजय लगभग 20 सालों से विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं मेंछात्रों का प्रवेश करवाने का कार्य करता आ रहा था.

शुरुआत में ओपन विश्वविद्यालयों में छात्रों का एक लिए करता था. उसे समझ आया कि कई सारी यूनिवर्सिटी बिना रूल फॉलो करे डिग्री, सर्टिफिकेट दे रही हैं. यहां से विजय को आइडिया मिला और उसने अपने स्तर पर उन यूनिवर्सिटी की फर्जी डिग्रियां और सर्टिफिकेट तैयार करना शुरू कर दिया. डिग्रियां तैयार करने के लिए यह एजेंटों की सहायता लेता था.

एजेंट कर रखे थे सेट

जब फर्जी डिग्रियां लेने वाले छात्र जब वेरिफाई करने के लिए यूनिर्वसिटी जाते तो विजय की गैंग के सदस्य (एजेंट) आरोपी प्रमोद सिंह उन्हें अटेंड करता था. सामने आया है कि यदि किसी की नौकरी लग जाती थी तो प्रमोद सिंह उनके डॉक्यूमेंट्स सत्यापन करवाने का आश्वासन भी देता था.

उसके पास विश्वविद्यालय के खाली लैटर पैड भी मिले हैं.  कुछ के चयन होने पर उसका वेरीफिकेशन लेटर यह विभाग से प्राप्त कर और स्वयं ही संबंधित विश्वविद्यालय के लेटर पैड पर सत्यापन कर दे देता था. पुलिस का कहना है कि इस प्रकरण में कई और शातिर भी हैं जिन्हें गिरफ्तार करने के लिए पुलिस छापेमारी कर रही है.

Advertisement
भूपेंद्र सारण.

24 दिसंबर 2022 को लीक हुआ था पेपर

गौरतलब है कि राजस्थान में ग्रेड 2 शिक्षक भर्ती 6 फेज में आयोजित की जा रही थी, जिसके लिए करीब 13 लाख उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन किया था. 24 दिसंबर को जनरल नॉलेज को पेपर होना था लेकिन पेपर शुरू होने से ठीक पहले पेपर सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था. मामले में मास्टर माइंड भूपेंद्र सारण को गिरफ्तार किया गया था.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement