राजस्थान के जयपुर में बेहद अनोखा नजारा देखने को मिला. दरअसल, यहां एक श्मशान घाट में नाटक का आयोजन किया गया. नाटक के दौरान यहां लोगों ने 'मुन्नी बदनाम हुई' और 'दिल दीवाना' जैसे फिल्मी गानों पर डांस भी किया. हैरानी की बात ये रही कि जहां मान्यताओं के अनुसार महिलाएं श्मशान घाट नहीं जातीं. तो वहीं, इस प्रोग्राम में शामिल होने के कई महिलाएं पहुंचीं. यहां तक कि एक महिला कलाकार ने तो मंच पर अभिनय भी किया.
हैरान कर देने वाला यह नजारा प्रताप नगर के हल्दीघाटी मार्ग स्थित श्मशान घाट में देखा गया. जानकारी के मुताबिक, मंगलवार रात को शुभ विचार संस्था द्वारा 'शमशान घाट' नामक नाटक का मंचन हुआ. जिसकी परिकल्पना और निर्देशन शास्त्रीय संगीत और नाट्य के शोधार्थी रंगकर्मी जीतेंद्र शर्मा ने किया.
जितेंद्र शर्मा ने बताया शमशान घाट रंगमंच के इतिहास का पहला नाटक है, जिसका मंचन शमशान घाट पर हुआ है. नाटक के द्वारा यह संदेश दिया गया है कि मनुष्य का छोटा सा जीवन कुविचारों से और छोटा हो जाता है, इसलिए इंसान को चाहिए वह अपने जीवन में शुभविचार अपनाकर शुभ कार्य करें. जिस से उसका छोटा सा जीवन भी बड़ा बन जाये और मनुष्य जीवन सार्थक हो जाये.
नाटक की परिकल्पना और कहानी जीतेन्द्र शर्मा की है जो सच्ची घटनाओं आधारित है. इसमें दो दोस्त शमशान घाट में रात को शराब पार्टी करने चले जाते हैं और नशे में सभी एक दूसरे के कुविचारों को बता कर एक दूसरे को अपमानित करते करते हैं. यही नहीं नाटक में दिखाया गया कि कैसे नेता, कलेक्टर और थानेदार तीनों मिलकर पैसा कमाने के लिये शमशान घाट और गोचर की जमीन को बेचकर खा जाना चाहते हैं.
वहीं, कहानी के एक भाग में दिखाया गया कि कैसे कुछ फिल्म निर्माता-निर्देशक पैसे कमाने के लालच में अश्लील फिल्में बनाकर हिन्दू धर्म की संस्कृति का अपमान करते हैं.
रोचक बात यह रही कि प्रोग्राम का समापन होने के बाद नाटक में अभिनय करने वाले कलाकारों ने हमेशा के लिए अपनी धूम्रपान की लत को छोड़ देने का प्रण सबके सामने लिया. ताकि आने वाला जीवन उनका और भी बेहतर हो सके. हालांकि, दूसरी तरफ कई लोग ऐसे भी हैं जो इस नाटक पर सवाल उठा रहे हैं. उनका कहना है कि इस तरह श्मशान घाट में नाटक का आयोजन करना सही नहीं था.
विशाल शर्मा