उत्तर प्रदेश में चुनाव आयोग की फाइनल ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में करीब दो करोड़ नवासी लाख वोटरों के नाम काटे गए हैं. इनमें ज्यादातर शहरी वोटर शामिल हैं जो बीजेपी के मजबूत इलाके हैं। 2012 से यह संख्या काफी कम हुई है. नाम कटने के बाद भी लोगों को आपत्ति दर्ज कराने और जोड़वाने का मौका दिया गया है, ताकि सही और पारदर्शी वोटर लिस्ट बनाई जा सके. यह प्रक्रिया चुनाव की शुचिता के लिए आवश्यक बताई जा रही है लेकिन इसका राजनीतिक फायदा नुकसान भी चर्चा का विषय है.