संसद सत्र से पहले सर्वदलीय बैठकें सत्र शुरु होते ही बेनतीजा दिखने लगती हैं. फ्लोर मैनेजमेंट की शब्दावाली सदन चलाने में कारगर होती नहीं दिखती. जनता के लिए जरूरी सवालों का प्रश्नकाल खुद हंगामे में एक सवाल बन जाता है. चर्चा कम होती है बिल उससे भी तेज समय में पास हो जाते हैं. सदन स्थगित किया जाता है, संसद का सबसे प्रचलित शब्द बन जाता है. चार दिन पहले 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाते देश में लोकतंत्र के स्तंभों के लिए ही खूब बातें कही गईं. फिर चार दिन के भीतर ही लोकतंत्र की विधायिका के सदन की ऐसी हालत क्यों है? देखिए 10 तक का ये एपिसोड.
All party meetings held before the winter session of the parliament, are now proving to be worthless. As soon as the parliament proceedings start, leaders of the opposition make situations to adjourn the house. Watch this episode of 10 Tak.