क्रिकेट विश्वकप की हार को पीएम से जोड़ने वाले इन तीन बातों को जरूर जान लें

क्रिकेट विश्वकप की हार को पीएम नरेंद्र मोदी से जोड़ने वाले लोग लगातार 10 मैच जीतने वाली टीम का मनोबल ही नहीं तोड़ रहे बल्कि देश की खेल भावना को भी खत्म कर रहे हैं. देश खेल हस्ती बन रहा है और कुछ लोग राजनीतिक दलों से ऊपर उठकर खेलों को देखने को भी नहीं तैयार हैं.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वर्ल्ड कप फाइनल मैच में हार के बाद टीम इंडिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वर्ल्ड कप फाइनल मैच में हार के बाद टीम इंडिया

संयम श्रीवास्तव

  • नई दिल्ली,
  • 20 नवंबर 2023,
  • अपडेटेड 2:45 PM IST

क्रिकेट विश्वकप में भारत की हार के पहले ही कुछ लोग भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी के लिए पनौती शब्द का इस्तेमाल करते हुए सोशल मीडिया साइट एक्स पर ट्रेंड कराने लगे. जैसे लगता था कि इन लोगों ने पहले ही मान लिया था कि भारत हार रहा है. किसी एक पार्टी से नफरत की ऐसी इंतेहा थी कि देश की हार की पहले ही भविष्यवाणी कर दी गई. देश के पीएम की स्टेडियम में विजिट को पनौती साबित करने के लिए तर्क पर तर्क दिए जाने लगे. क्या यही खेल भावना का प्रदर्शन है? खेल भावना नफरत की दीवार को तोड़ती रही है पर यहां तो उल्टा ही हो गया है.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में आप कुछ भी कह सकते हैं पर कम से कम खेलों और खिलाड़ियों को लेकर जो प्रेम और उत्साह दिखाते हैं उससे इनकार नहीं कर सकते हैं. देश के पीएम को पनौती कहने वालों को इन नौ सालों में खेल की उपलब्धियों का भी एक बार ब्योरा जरूर जान लेना चाहिए ताकि सनद रहे कि देश 9 सालों में अब खेल हस्ती बन चुका है. 

बैर कराते राजनीतिक दल, मेल कराती खेल भावना

कभी सुप्रसिद्ध कवि हरिवंश राय बच्चन ने अपने प्रसिद्ध काव्य ग्रंथ मधुशाला में लिखा था कि बैर कराते मंदिर-मस्जिद मेल कराती मधुशाला. जिसे आज के परिवेश में लिख सकते हैं बैर कराते राजनीतिक दल मेल कराती खेल भावना. हिंदू-मुसलमान, उत्तर-दक्षिण, फॉरवर्ड-बैकवर्ड, अमीर-गरीब सभी भेद जहां भूल जाते हैं वह जगह होती खेल ग्राउंड. देश की जीत की कामना करने वालों में कोई भेद नहीं होता. जीत का उल्लास और हार का गम सभी भेदभाव को खत्म कर देता है. पर भारत में अब इसका उल्टा हो रहा है. विश्वकप की हार को लेकर जिस तरह पनौती शब्द को ट्रेंड कराया गया,जिस तरह विपक्ष ने खुलकर इस हार के लिए पीएम मोदी को टार्गेट किया वह बेहद हैरान करने वाला और शर्मनाक भी है. इस बार के विश्वकप में खिलाड़ियों की जाति और धर्म को लेकर भी जिस तरह का विश्वेषण हुआ है वह भी शोचनीय है. सूर्या कुमार को लेकर अगड़े-पिछड़े की बात की गई. कुछ लोग लगातार यह साबित करने में लगे रहे कि सूर्या की जाति की वजह से उसे शुरू में खेलने नहीं भेजा जाता.

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हद तो तब हो गई कि जब भारत के हारने के बाद पीएम मोदी के खिलाफ नेताओं ने बयानबाजी शुरू कर दी. बिहार के श्रम संसाधन मंत्री आरजेडी नेता सुरेंद्र राम ने हार के लिए नरेंद्र मोदी को जिम्मेदार बता दिया, फिर उसमें शिवसेना (उद्धव गुट) के नेता संजय राउत भी जहर बोलने से नहीं चूके. उनका तो यहां तक कहना था कि अगर मुंबई का वानखेड़े स्टेडियम होता तो देश को हार का सामना नहीं करना पड़ता. राजस्थान के आरएलपी नेता हनुमान बेनीवाल भी नरेंद्र मोदी को हार का जनरेटर तक बोल दिया.

पिछले 9 सालों में देश की खेल उपलब्धियां

पीएम के अहमदाबाद स्टेडियम में पहुंचने का मजाक उड़ाने वाले एक बात जरूर जान लें कि देश ने पिछले 9 सालों में क्रिकेट हो या अन्य खेल. सभी में बहुत प्रगति की है. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत की आज जो धमक है कभी इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया की हुआ करती थी. इस बार के वर्ल्ड कप में लगातार 10 मैच जीतने की कूवत वैसे ही नहीं आई टीम में. इसके लिए एक खुशहाल, संपन्न, और शांतिप्रिय देश और समाज का होना भी जरूरी होता है. किसी गरीब आर्थिक रूप से कमजोर, आंतरिक कलह से जूझते देश खेलों में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकता. 

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पाकिस्तान और श्रीलंका के टीमों की दुर्दशा के पीछे उनके देश की परिस्थितियां भी हैं. जब तक भारत में गरीबी थी, देश आतंकी हमलों को झेल रहा था न बीसीसीआई की वह धाक ही थी और न ही क्रिकेट टीम इतनी मजबूत थी. स्टार प्लेयरों गावस्कर, कपिलदेव या सचिन जैसे महान खिलाड़ियों के भरोसे होती थी टीम पर, आज ऐसा नहीं है. आज बीसीसीआई बेहद सक्षम है. तब जाकर एक मजबूत टीम का निर्माण हो सका है.

यही हाल दूसरे खेलों का भी है. एक महीने पहले संपन्न हुए एशियन गेम्स में भारत ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए पहली बार मेडल की सेंचुरी लगाई है. देश ने 72 साल के एशियाड इतिहास में पहली बार कुल 107 मेडल जीते हैं.37 साल बाद मेडल टैली में टॉप-5 में जगह बनाया है.

केंद्र सरकार ने देश में खेलों के विकास के लिए ‘खेलो इंडिया’ जैसा अभियान शुरू किया ताकि खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के लिहाज से सुविधाएं मुहैया कराई जा सकें. इसके सुखद परिणाम भी मिलें जब टोक्यो ओलंपिक में भारत ने 7 मेडल अपने नाम किए, जिसमें 1 गोल्ड, 2 सिल्वर और 4 ब्रॉन्ज मेडल थे. जबकि इससे पहले रियो ओलंपिक में देश को केवल 2 ही मेडल मिले थे. 

नरेंद्र मोदी का खेल और खिलाड़ियों से नजदीकी नाता

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देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पदभार ग्रहण करने के साथ ही खेलों को लेकर व्यक्तिगत तौर पर रुचि दिखाई है. टोक्यो ओलंपिक में महिला हॉकी टीम  की हार के बाद का समय याद करिए किस प्रकार पीएम ने टीम का हौसला बढाया था.प्रधानमंत्री मोदी ने इस मैच के तुरंत बाद खिलाड़ियों के साथ फोन पर बात की. पीएम मोदी ने उत्साह बढ़ाते हुए कहा, ‘सबसे पहले आप रोना बंद कीजिए. पिछले 5-6 सालों से जो पसीना आपने बहाया है, वो सभी में जोश भर रहा था. आप जो साधना कर रहे थे, आपका पसीना पदक नहीं ला सका लेकिन आपके पसीने ने करोड़ों बेटियों और खिलाड़ियों को प्रेरणा दी है.’ यही नहीं मोदी अक्सर देश के खिलाड़ियों और टीमों को उनकी खास जीत और उपलब्धियों पर ट्वीट कर उन्हें प्रोत्साहित करते हैं. 

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