कितने चेहरे लगे हैं चेहरों पर
क्या हकीकत है और सियासत क्या
सागर ख़य्यामी साहब का ये शेर INDIA (Indian National Developmental Inclusive Alliance) गठबंधन की रैली पर मुफीद बैठता है. हमें सियासत में ये समझ ही नहीं आता कि एक चेहरे पर कितने चेहरे लगे हैं. कब कौन क्या कर जाए, किधर का हो जाए, ये कहा नहीं जा सकता. मशहूर शायर वसीम बरेलवी साहब लिखते हैं,
उसी को जीने का हक़ है जो इस ज़माने में
इधर का लगता रहे और उधर का हो जाए
रविवार 31 मार्च को दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन ने रैली आयोजित की. रैली में विपक्ष के 27 दलों ने हिस्सा लिया. रैली का मुख्य मकसद अरविंद केजरीवाल और हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी का विरोध करना और लोकसभा चुनाव 2024 के प्रचार का आगाज करना था. रैली के जरिए INDIA गठबंधन ने शक्ति प्रदर्शन कर अपनी एकजुटता का भी संदेश दिया. लेकिन, असल में इस रैली से किसको फायदा होगा? क्या कांग्रेस का वोट बैंक बढ़ेगा? क्या अरविंद केजरीवाल INDIA गठबंधन के पोस्टर बॉय बनते जा रहे हैं? केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद क्या सहानुभूति के तौर दिल्ली का वोटर आम आदमी पार्टी से जुड़ेगा? जाने-अनजाने में कहीं INDIA गठबंधन के नेता केजरीवाल को बड़ा तो नहीं बना रहे? या सही में अरविंद केजरीवाल को बचाना ही असली मकसद है. ऐसे कई सवाल हैं, जिनका जवाब ढूंढने की कोशिश करते हैं.
कितने चेहरे लगे हैं चेहरों पर...
सागर ख़य्यामी लिखते हैं, कितने चेहरे लगे हैं चेहरों पर...रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की रैली में अरविंद केजरीवाल के समर्थन में ऐसे नेता नजर आए जिनको देखकर कहा जा सकता है कि एक चेहरे पर कितने चेहरे लगे हैं. ये वही नेता हैं जिनको केजरीवाल ने कभी पानी पी पीकर कोसा था. भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहीम छेड़कर राजनीति में आए नेता पर जब भ्रष्टाचार का आरोप लगा तो लगभग सभी विपक्षी दल साथ आ गए. इसकी सबसे बड़ी मिसाल कांग्रेस पार्टी और सोनिया गांधी हैं. सोनिया गांधी मंच पर सबसे आगे की कतार में बैठी थीं.
आपको याद होगा इसी रामलीला मैदान पर अन्ना हजारे का वो 13 दिन चला आंदोलन, जिसके केंद्र में तब की UPA की सरकार थी. अन्ना के आंदोलन में UPA सरकार को लेकर कई हमले किए गए. मंच से 2G घोटाला, दिल्ली कॉमन वेल्थ घोटाला, कोयला घोटाला, आदर्श हाउसिंग घोटाले सहित कई आरोप लगाए गए. इसके बाद UPA सरकार के प्रति जनता में ऐसी नाराजगी शुरू हुई कि 2014 के लोकसभा चुनाव में मनमोहन सरकार चुनाव हार गई और NDA की सरकार बन गई. अन्ना आंदोलन ने UPA सरकार को बहुत डेंट पहुंचाया. उस आंदोलन में केजरीवाल, मनीष सिसोदिया सहित कई बड़े नाम शामिल थे. ये दो बड़े नाम आज भी आम आदमी पार्टी के साथ जुड़े हैं, लेकिन कई और नाम बाद में अलग हो गए.
सोनिया गांधी को गिरफ्तार करने की मांग कर चुके हैं केजरीवाल
INDIA गठबंधन की रैली में केजरीवाल के लिए मंच साझा करने वाली ये वही सोनिया गांधी हैं, जिनको दिल्ली के सीएम ने 2015 में गिरफ्तार करने की मांग की थी. 2015 के नवंबर महीने में केजरीवाल ने कहा था कि अगर सरकार जांच नहीं करवा पा रही है तो ED, CBI सहित सभी जांच एजेंसियों को बंद कर दे. केजरीवाल ने कहा था कि सोनिया गांधी को गिरफ्तार करना चाहिए. एक वक़्त था जब अरविंद केजरीवाल ने पूरी ताक़त लगा दी था सोनिया गांधी को जेल में डालने के लिए, अब अरविंद केजरीवाल जेल में हैं और सोनिया गांधी रामलीला मैदान में अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के विरोध में उनकी पत्नी के साथ खड़ी हैं.
केजरीवाल वक्त के साथ कैसे बदल गए या सोनिया गांधी का मन कैसे बदल गया इसमें राजनीतिक मजबूरी ज्यादा है. वो साल दूसरा था, ये साल दूसरा है. सोचिए, केजरीवाल तिहाड़ जेल में हैं और उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल सोनिया गांधी के बगल में बैठकर गुफ्तगू करते देखी गईं. ये क्षण सुनीता केजरीवाल को बहुत संबल दे रहा होगा. क्योंकि जब आप मुसीबत में होते हैं तो अपनों को याद करते हैं, लेकिन सोनिया कभी पराई होकर भी आज सुनीता केजरीवाल के लिए अपनी सी लग रही हैं. यूं तो सियासत में कोई अपना होता नहीं है. यहां हाथी के दांत खाने के और दिखाने के और वाली बात होती है. सभी की अपनी अपनी मजबूरियां हैं, जिसकी वजह से INDIA गठबंधन को एक मंच पर आना पड़ा. फिर भी केजरीवाल, उनके परिवार और आम आदमी पार्टी के लिए 31 मार्च का दिन बड़ा था.
सुनीता केजरीवाल के लिए मजबूत कंधा साबित हुईं सोनिया गांधी
सोनिया गांधी, उनके परिवार और कांग्रेस के खिलाफ आम आदमी पार्टी ने सोशल मीडिया पर कई कैंपेन चलाए थे, लेकिन आज जब केजरीवाल की पत्नी को एक सहारे की तलाश है, एक मजबूत कंधे की जरूरत है, सोनिया उनके साथ बैठी नजर आईं. वैसे भी सोनिया गांधी की सहनशीलता इतनी ज्यादा है कि कई बार ऐसा देखा गया है कि विपक्ष के नेता उनके लिए बहुत कुछ कहते हैं, लेकिन वह पलट कर जवाब नहीं देती. निजी हमलों को भूल जाती हैं. कह सकते हैं माफ कर देती हैं.
इस तस्वीर की खूब चर्चा
INDIA गठबंधन की रैली में सोनिया गांधी और सुनीता केजरीवाल की एक तस्वीर की खूब चर्चा है, जिसमें दोनों एक दूसरे से बात करते नजर आ रहे हैं. उस तस्वीर को पिक्चर ऑफ़ द डे कहा गया. सभी दलों के साथ आने से केजरीवाल की पत्नी में आत्मविश्वास भरा दिखा. मंच से केजरीवाल का संदेश पढ़ते वक्त सुनीता केजरीवाल में साहस साफ नजर आ रहा था. उनकी बॉडी लैंग्वेज और बोली में आत्मविश्वास झलक रहा था. सुनीता केजरीवाल को सुनते वक्त एक बार भी यह नहीं लगा कि राजनीती में वो नई हैं. बल्कि एक मंजी हुई खिलाड़ी के तौर पर नजर आईं. सुनीता केजरीवाल ने इंडिया रैली के मंच से अरविंद केजरीवाल का संदेश पढ़ा...
पूरे देश में 24 घंटे बिजली, कोई पावर कट नहीं होगा
पूरे देश में गरीबों की बिजली फ्री की जाएगी
हर गांव और मोहल्ले में शानदार सरकारी स्कूल बनाए जाएंगे. हर गांव-मोहल्ले में मोहल्ला क्लिनिक खोला जाएगा.
किसानों को स्वामीनाथन आयोग के मुताबिक एमएसपी दी जाएगी.
दिल्लीवासियों को पूर्ण सरकार दी जाएगी. दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाएगा.
हर जिले में मल्टि स्पेशलिटी सरकारी अस्पताल बनाए जाएंगे.
जाने-अनजाने में केजरीवाल को पोस्टर बॉय बना रहा विपक्ष
INDIA गठबंधन की रैली में 27 दल के नेता जुटे. जाहिर है सबकी लड़ाई है, सब अपनी लड़ाई लड़ने के लिए साथ आए हैं. लेकिन कहीं ऐसा तो नहीं कि विपक्ष जाने-अनजाने में केजरीवाल को ब्रांड केजरीवाल बना रहा है. क्योंकि रैली में मंच के पीछे केजरीवाल की एक बड़ी तस्वीर नजर आई, जिसमें उन्हें जेल के भीतर दिखाया गया. राजनीति में हर चीज के मायने होते हैं. केजरीवाल की तस्वीर के भी मायने हैं.
अखिलेश यादव ने X पर रैली से जुड़ी तस्वीर साझा की, जिसमें केजरीवाल की एक बहुत बड़ी तस्वीर दिखाई दे रही है. जानकारों का कहना है कि रामलीला मैदान में हुई रैली का सीधा फायदा केजरीवाल को होता दिख रहा है. क्योंकि एक तो उनके साथ जनता की सहानुभूति जुड़ी है. दूसरी ओर INDIA गठबंधन के पोस्टर बॉय बनने से ब्रांड केजरीवाल को और ज्यादा मजबूती मिल सकती है. पूरी रैली में मीडिया कवरेज से लेकर वहां मौजूद कार्यकर्ताओं में केजरीवाल सबसे ज्यादा हाईलाइट रहे. हमें याद रखना चाहिए कि केजरीवाल एक आंदोलन से उपजे नेता हैं. राजनीति में न तो उनकी कोई पुरानी विरासत रही है, न ही उन्हें किसी दूसरे ने लॉन्च किया है. जबकि अन्य पार्टी के नेताओं का सियासत में पुराना बैकग्राउंड रहा है. मंच पर मौजूद ज्यादातर नेताओं की पार्टी बहुत पुरानी है. कई को राजनीति विरासत में मिली है. ऐसे में तुलनात्मक रूप से एक नया नेता, नई पार्टी, जो पहले से ही देशभर में चर्चा का विषय रही है, जिसके मॉडल को जनता ने पसंद किया है, जिसने धीरे-धीरे देशभर में अपनी पार्टी का विस्तार किया है, उसे और उसके नेता पर ज्यादा फोकस करके अन्य दल के नेता अपना कद तो नहीं घटा रहे, ये विचारणीय है. रैली में उपस्थित बाकी दल के नेता शायद इस पर मंथन जरूर करें.
राजनीति में कोई भी दूसरे को आगे निकलते देखना नहीं चाहता. यहां दोस्त भी दुश्मन होते हैं. मंच से पत्नी सुनीता केजरीवाल ने सीएम केजरीवाल का संदेश पढ़ा. ये भी कहीं न कहीं सहानुभूति बटोरने की एक कोशिश रही, जिसका फायदा आम आदमी पार्टी और केजरीवाल को मिल सकता है. ED की हिरासत के बाद और अब तिहाड़ जेल में जाने के बाद केजरीवाल की भाषा बिलकुल बदली है. केजरीवाल के कई संदेश उनकी पत्नी पढ़ रही हैं. केजरीवाल का संदेश पढ़ते वक्त सुनीता केजरीवाल अपने चेहरे के हाव-भाव से ये बताना चाहती हैं कि आम आदमी पार्टी के प्रमुख गहरे संकट में हैं, लेकिन वह हार नहीं मानेंगे. अगर जनता का साथ मिलता रहा तो ये लड़ाई आम आदमी पार्टी जीतेगी. दिल्ली शराब नीति मामले में जांच के बाद केजरीवाल दोषी सिद्ध होते हैं कि नहीं ये तो भविष्य के गर्भ में हैं, लेकिन फिलहाल केजरीवाल और उनकी पत्नी का हर कदम खुद को जनता से कनेक्ट करने के लिए उठाया जा रहा है. एक सिंपैथी गेन करने की कोशिश है. इसके बाद रैली के जरिए आम आदमी पार्टी ने ये भी यह संदेश दिया कि अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी को लेकर सभी विपक्षी दल एक हैं.
केजरीवाल को लेकर मजबूती से एक मंच पर आया विपक्ष
अंग्रेजी में एक कहावत है जो हमें बचपन में पढ़ाया गया था. United We Stand Divided We Fall. इसका सीधा सा मतलब है, एकता में बल है. रामलीला मैदान में रैली से पहले विपक्ष में बिखराव दिख रहा था, लेकिन हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी और केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद ही सही विपक्ष में एकता दिख रही है. विपक्ष पहले से ज्यादा एकजुट दिख रहा है. क्योंकि विपक्ष को भी पता है कि ये लड़ाई अकेले नहीं लड़ी जा सकती, इसमें साथ आना ही होगा. NDA और नरेंद्र मोदी का सामना करने के लिए विपक्ष को एक साथ आना निहायत ही जरूरी लग रहा है.
विपक्ष को मालूम है, जितना ज्यादा एकजुट रहेंगे, मोदी सरकार को उतना ज्यादा सियासी नुकसान पहुंचाया जा सकता है. वैसे अंदरूनी तौर पर देखा जाए तो सभी पार्टियों और नेताओं के अपने फायदे हैं, कोई भी नेता या दल INDIA गठबंधन को मजबूत करने से पहले खुद की मजबूती के लिए साथ आ रहा है. सबको अपने सियासी लाभ की चिंता है. लेकिन हां इतना तो कहा जा सकता है कि NDA और भाजपा सरकार की मजबूती ने विपक्ष को एक मंच पर आने के लिए मजबूर कर दिया है. इसके अलावा जांच एजेंसियों की लगातार कार्रवाई से भी विपक्ष को एक साथ आना पड़ा है. क्योंकि हाल के समय में देखा गया है कि ED के रडार पर कई नेता आए हैं, जिन्हें जांच का सामना करना पड़ रहा है. देशभर में विपक्ष के कई नेताओं पर ED के छापे पड़ रहे हैं. विपक्ष को लगने लगा है कि साथ आकर इस कार्रवाई का विरोध करने का यही सही समय है. वरना, आगे देर हो जाएगी.
क्या कांग्रेस को अपनी खोई जमीन तलाशने का मौका मिला
INDIA गठबंधन की रैली के बदौलत दिल्ली कांग्रेस ने भी शक्ति-प्रदर्शन किया. रामलीला मैदान में दिल्ली से लेकर पंजाब, हरियाणा से कांग्रेस समर्थक पहुंचे. इसके अलावा पूर्वी दिल्ली, उत्तर पूर्वी और बाहरी दिल्ली से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पहुंचे. केजरीवाल के बहाने ही सही कांग्रेस अपनी खोई हुई वोट बैंक को वापस लाने की कोशिश में लगी है. रैली में भीड़ जुटाने के लिए कांग्रेस ने पूरी ताकत झोंक दी. रामलीला मैदान में भीड़ को देखकर कांग्रेस गदगद है. कांग्रेस को लग रहा है कि जो वोटर आम आदमी पार्टी के पास चला गया था वो उनके पास वापस आ सकता है.
फिलहाल दिल्ली की बात करें तो आम आदमी पार्टी और कांग्रेस का पूरा फोकस लोकसभा चुनाव पर है. लेकिन जब 2025 में दिल्ली का विधानसभा चुनाव आएगा तो तस्वीर अलग हो सकती है और कांग्रेस और आप खुद के सियासी फायदे के लिए अपनी राह अलग कर सकते हैं.
नितेश कुमार तिवारी