अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए वीजा नियमों में सख्ती के बीच भारतीय छात्रों में चिंता बढ़ रही है. डिपोर्टेशन के डर और वीजा अस्वीकृति की बढ़ती दरों के बीच, करियर काउंसलर और हार्वर्ड के पूर्व छात्र डॉ. करण गुप्ता ने इस मुद्दे पर कुछ सामान्य सवालों के जवाब दिए हैं. वे सतर्कता, शैक्षणिक अनुशासन, साफ-सुथरे क्लियर डिजिटल प्रोफाइल और यूरोप व यूनाइटेड किंगडम जैसे वैकल्पिक विकल्पों के साथ एक मजबूत प्लान बी की भी सलाह देते हैं.
1. भारतीय छात्र वीजा साक्षात्कार और अमेरिका पहुंचने के बाद खतरे से कैसे बचें?
छात्रों को खुद भी पहले तो जागरूक होना बहुत जरूरी है और सबसे जरूरी है अनुशासन. वीजा इंटरव्यू में पूरी साफगोई और ईमानदारी बरतें, अपने शैक्षणिक लक्ष्यों को स्पष्ट तरीके से सामने रखें और रटे-रटाए जवाबों से बचें.
अमेरिका पहुंचने के बाद, सभी क्लास में अपनी उपस्थिति और मौजूदगी जरूर दर्ज कराएं. इसमें कोई कोताही न बरतें. अपने डेजिग्नेटेड स्कूल ऑफिशियल (डीएसओ) के संपर्क में रहें और बिना अनुमति के कभी काम न करें. ऐसी एक्टिविटी या पॉलिटिकल एक्टिवनेस से बचें, जो विवाद का कारण बन सकती हों.
डॉ. गुप्ता कहते हैं, “यह कभी न भूलें कि आप पढ़ाई के लिए अमेरिका जा रहे हैं.' हिंसक प्रदर्शन या विवादास्पद लेख लिखना आपको मुश्किल में डाल सकता है. ऐसे में इनसे बचें.
साथ ही, डिजिटल प्रोफाइल को भी क्लीन और क्लियर रखें. आपका सोशल मीडिया आज आपका दूसरा पासपोर्ट है, जिसकी जांच हो सकती है.
2. अगर अमेरिकी विश्वविद्यालय में प्रवेश मिला, लेकिन वीजा समय पर न मिले तो क्या करें?
यह अब एक रियल प्रॉब्लम है. कांसुलेट में देरी, सख्त जांच और वीजा जारी करने में देरी के कारण छात्रों को तुरंत कदम उठाने चाहिए. अपनी यूनिवर्सिटी को इसकी सूचना दें, प्रवेश को स्थगित करने का अनुरोध करें या ऑनलाइन पढ़ाई शुरू करने की संभावना तलाशें.
कई विश्वविद्यालय हाइब्रिड स्टार्ट या स्प्रिंग सेशन के ऑप्शन देते हैं. साथ ही, अन्य देशों में बैकअप एंट्री तैयार रखें. अमेरिकी एडमिट कार्ड अब गारंटीकृत प्रवेश की गारंटी नहीं है. इसके लिए फ्लेक्सिबिलिटी और प्लानिंग अब जरूरी हैं. डॉ. गुप्ता सुझाव देते हैं, “कुछ हफ्ते इंतजार करें, लेकिन अगर स्थिति नहीं सुधरती, तो प्लान बी पर काम करें.”
3. आगामी सत्र के लिए नामांकित भारतीय छात्रों की स्थिति क्या है? क्या नए प्रतिबंध उन पर प्रभाव डालेंगे?
वर्तमान में, वैध एफ-1 वीजा धारक और आगामी सत्र में पढ़ाई शुरू करने वाले छात्रों को घबराने की जरूरत नहीं है. जब तक उनकी यूनिवर्सिटी स्टूडेंट एंड एक्सचेंज विजिटर प्रोग्राम (एसईवीपी) सर्टिफिकेट खो नहीं देता या वे वीजा शर्तों का उल्लंघन नहीं करते, उनकी स्थिति सुरक्षित है.
हालांकि, छात्रों को फुलटाइम रजिस्ट्रेशन, एजुकेशनल प्रोग्रेस और रेग्युलर अटेंडेंस सुनिश्चित करनी होगी. कक्षाओं से गैरमौजूदगी या नामांकन में देरी जैसे छोटे उल्लंघन भी जांच का कारण बन सकते हैं. यूनिवर्सिटी भी इंटरनल सर्विलांस को सख्त कर रहे हैं, इसलिए इंटरनेशनल स्टूडेंट ऑफिसों के साथ लगातार संपर्क में रहना और उनसे संपर्क बनाए रखना जरूरी है.
4. अमेरिकी विश्वविद्यालयों में प्रवेश न मिलने वाले छात्रों के लिए यूरोप या अन्य जगहों पर क्या विकल्प हैं?
यूरोप हाल के वर्षों में मास्टर, एमबीए और स्नातक छात्रों के लिए एट्रेक्टिव डेस्टिनेशन बन गया है. स्पेन, जर्मनी, नीदरलैंड, फ्रांस और आयरलैंड जैसे देश व्यवसाय, इंजीनियरिंग, डिजाइन, मनोविज्ञान जैसे क्षेत्रों में हाई क्वालिटी वाले अंग्रेजी मीडियम प्रोग्राम प्रोवाइड कराते हैं.
जर्मनी में सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में फ्री एजुकेशन उपलब्ध है. नीदरलैंड अपने इंडस्ट्री ओरिएंटेड ग्रेजुएट प्रोग्राम के लिए प्रसिद्ध है. स्कैंडिनेवियाई देश प्रोग्रेसिव एजुकेशन मॉडल और जेनरस स्कॉलरशिप (उदार छात्रवृत्तियां) प्रदान करते हैं. स्पेन में आईई यूनिवर्सिटी, आईईएसई और ईएसएडीई जैसे इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी हैं.
यूरोप के अलावा, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर और यूएई भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए अच्छे विकल्प हैं. अमेरिकी वीजा प्रक्रिया की अनिश्चितता को देखते हुए, यूनाइटेड किंगडम एक मजबूत बैकअप है, जहां रोलिंग एडमिशन और देर से शुरू होने वाले सेशन उपलब्ध हैं.
5. क्या नए वीजा प्रतिबंध अमेरिका में पढ़ रहे छात्रों पर लागू होंगे?
हां, और यही सबसे बड़ी चिंता है. अमेरिकी अधिकारियों की नई नीतियां न केवल प्रवेश के समय, बल्कि पढ़ाई के दौरान भी सख्ती पर जोर देती हैं. अनधिकृत काम, लंबी छुट्टियां, या अपूर्ण कोर्स लोड जैसे छोटे उल्लंघन भी वीजा रद्द होने या डिपोर्टेशन का कारण बन सकते हैं.
यहां तक कि छोटे यातायात उल्लंघन भी वीजा रद्द करने का कारण बन सकते हैं. विश्वविद्यालयों को ऐसे उल्लंघनों की तुरंत रिपोर्ट करने के लिए कहा गया है, जिससे छात्रों और संस्थानों पर जिम्मेदारी बढ़ गई है.
डॉ. गुप्ता कहते हैं, “मैसेज क्लियर है: अमेरिका में वीजा एक विशेषाधिकार है, जिसे रद्द किया जा सकता है, न कि गारंटीकृत अधिकार.”
- डॉ. करण गुप्ता
(लेखक करियर काउंसलर, शिक्षाविद् और हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के पूर्व छात्र हैं. इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के हैं.)
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