जम्मू-कश्मीर के कठुआ में आतंकवादी मुठभेड़ में शहीद हुए कबीर दास उइके का पार्थिव शरीर गुरुवार सुबह 12 बजे पुलपुलडोह लाया गया. जैसे ही उनकी पत्नी ने पार्थिव शरीर देखा वह बिलखकर रो पड़ी. सभी परिजनों की आंखों से आंसू नहीं रुक रहे थे. बता दें कि शहीद होने की सूचना मिलने पर उनकी पत्नी को विश्वास नहीं हो रहा था. बस एक ही बात दोहरा रही थी- 'उनको कुछ नहीं हुआ, वो ठीक हैं...' इसके बाद उनका राजकीय सम्मान और सामाजिक परंपरा से उनको अंतिम विदाई दी गई. इस दौरान सीआरपीएफ के आईजी, डीआईजी और एसएएफ के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया.
बता दें कि मंगलवार को कठुआ में आतंकवादियों ने सीआरपीएफ की पोस्ट पर हमला किया था. इस पोस्ट में तैनात जवानों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ हुई. इस दौरान पोस्ट पर तैनात कबीर उइके सीने में गोली लगने से घायल हो गए. उन्हें गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया. इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया. वह अपने पीछे मां, भाई और पत्नी को छोड़ गए हैं. दो बहनों की शादी हो चुकी है.
भोपाल के लिए हो गया था तबादला
शहीद कबीर के सास -ससुर ने बताया, आठ दिन पहले घर आए थे. उनकी भोपाल पोस्टिंग होने वाली थी. लेकिन भगवान को शायद मंजूर नहीं था. दामाद उससे पहले शहीद हो गया.
वहीं, मां ने कहा, मेरा बेटा देश के लिए कुर्बान हुआ है. बहू को घायल होने की सूचना दी थी, शहीद होने की नहीं दी थी. कबीर ने भोपाल तबादला करवा लिया था. बताया कि शहीद की पत्नी ने 2020 में एसआई की परीक्षा पास की थी, लेकिन ज्वाइन नहीं की.
अंतिम विदाई में पहुंचे सांसद और मंत्री
मध्य प्रदेश की पीएचई मंत्री संपतिया उइके और जिले सांसद विवेक बंटी साहू जवान के अंतिम विदाई में पहुचे थे. मंत्री संपतिया उइके और सांसद बंटी साहू ने कहा कि राजकीय सम्मान के साथ यहां पर हम सब लोग उनको श्रद्धांजलि देने आए हैं.
मध्य प्रदेश सरकार की तरफ से प्रतिनिधि के रूप में यहां पर उपस्थित हुए हैं. हमारे साथ सांसद विवेक बंटी साहू और पूर्व विधायक हैं. शहीद के यहां उनके घर वाले उनके परिवार वालों से मिले. उनके ससुर भी हाई कोर्ट में हैं.
परिजनों ने कहा कि हमको बहुत गर्व हो रहा है कि हमारा बेटा देश के लिए शहीद हुआ है, लेकिन समय के पहले ही शहीद हुआ है. ऐसे वज्र जैसे दुख को सहने की ईश्वर उनको क्षमता दें और परमपिता परमेश्वर से प्रार्थना है कि जवान को मोक्ष प्रदान करें.
जवान कबीर दास के अंतिम संस्कार में सेना के वरिष्ठ अधिकारी, जिले के अधिकारी सहित जनप्रतिनिधियों ने भावभीनी श्रद्धाजंलि अर्पित की. वहीं, कबीर दास का का पार्थिव शरीर को आदिवासी रीति रिवाज के साथ दफनाया गया है.
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