रात में कितने बजे के बाद भोजन नहीं करना चाहिए? प्रेमानंद महाराज ने बताया

वृंदावन के संत श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण महाराज जो प्रेमानंद महाराज के नाम से फेमस हैं, उन्होंने अपने प्रवचनों में बताया है कि रात में कितने बजे के बाद भोजन नहीं करना चाहिए.

Advertisement
देर रात खाना खाने को प्रेमानंद महाराज ने गलत बताया है. (Photo: ITG) देर रात खाना खाने को प्रेमानंद महाराज ने गलत बताया है. (Photo: ITG)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 15 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:00 PM IST

वृंदावन के संत श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण महाराज को लोग प्रेमानंद महाराज नाम से जानते हैं. वह अपने सत्संग और प्रवचनों के लिए काफी फेमस हैं. उनका जन्म 1963 में उत्तर प्रदेश के कानपुर में हुआ था और आध्यात्मिक जीवन से पहले उनका असली नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे था. मात्र 13 साल की उम्र में अपना घर छोड़ने वाले प्रेमानंद महाराज को सुनने के लिए दूर-दूर से लोग वृंदावन पहुंचते हैं. राधा रानी के भक्त प्रेमानंद महाराज ने अपने प्रवचनों में बताया था कि रात में कितने बजे के बाद भोजन नहीं करना चाहिए. यदि आप भी देर रात भोजन करते हैं तो प्रेमानंद महाराज की बात और कारण जानें.

Advertisement

कितने बजे तक कर लेना चाहिए रात का भोजन?

प्रेमानंद महाराज ने अपने एक वीडियो में बताया था. 'रात में 11 बजे के बाद का भोजन निशाचरी आहार कहा जाता है. निशा यानी रात और चर यानी विचरने (घूमने) वाला. 8-10 बजे तक भोजन करने का नियम बनाएं.'

'अपवित्र भोजन, दुर्गंध युक्त भोजन, अभक्ष भोजन, रात 11 से 3 बजे तक भोजन करने वालों को पशु योनी मिलती है. और जो दूसरे का भोजन करने के लिए उत्सुक होता है कि काश मुझे निमंत्रण आ जाए कोई खाना खिला दे, उसे अगले जन्म में बंदर की योनि मिलती है.'

'रात 11 से सुबह 3 बजे तक का समय भोजन के लिए निषेध है क्योंकि ये शयन का समय है.'

निशाचर का क्या मतलब है?

प्रेमानंद महाराज का 'निशाचर' से मतलब सिर्फ जानवरों या राक्षसों तक सीमित नहीं है. वो इसे आधुनिक जीवनशैली और मानवीय प्रवृत्तियों से जोड़कर समझाते हैं.

Advertisement

उन्होंने वीडियो में बताया, 'माता-पिता, संत-महात्मा आदि का जो अपमान कर रहे हैं, मांस-मदिरा का सेवन कर रहे हैं, माता-पिता को मारते-पीटते हैं, भगवान की निंदा करते हैं, वो इंसान के रूप में राक्षस ही तो हैं. ये जो मनुष्य के रूप में राक्षसी भाव आ गया है, इसका त्याग आध्यात्म से ही हो सकता है.'

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement