मकर संक्रांति का त्योहार 14 जनवरी को पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है. इस मौके पर घरों में खिचड़ी, तिल-गुड़, दही-चूड़ा, और गजक जैसे तरह-तरह के पकवान बनाए जाते हैं जिनका अपना खास महत्व होता है. बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के कुछ इलाके में मकर संक्रांति के दिन लोग बड़े चाव से दही-चूड़ा खाते हैं. दही-चूड़ा टेस्टी होने के साथ-साथ काफी हेल्दी भी होता है. आज हम आपको बताएंगे कि दही-चूड़ा खाने के क्या फायदे हैं और इसे घर पर कैसे बना सकते हैं.
दही-चूड़ा खाने के फायदे
चूड़ा को कई लोग पोहा या चिवड़ा के नाम से भी जानते हैं. यह चावल को कूटकर बनाया जाता है. इसे लोग मकर संक्रांति पर दही और गुड़ या चीनी के साथ खाते हैं.
फाइबर से भरपूर
बिना ज्यादा प्रोसेस किया गया चूड़ा फाइबर से भरपूर होता है. इससे इसे डाइजेस्ट करना आसान होता है और गट हेल्थ भी बेहतर रहती है.
कम कैलोरी वाला हेल्दी ऑप्शन
जो लोग नाश्ते में ऐसा फूड्स चाहते हैं जिसे खाने के बाद शरीर को एनर्जी भी मिले और खाने में कैलोरी कम हो तो उनके लिए दही-चूड़ा से बेहतर शायद ही कोई ऑप्शन होगा.
आयरन से भरपूर
दही-चूड़ा आयरन और कैल्शियम जैसे पोषक तत्वों से भी भरपूर होता है. यही वजह है कि प्रेग्नेंट महिलाओं को भी दही-चूड़ा खाने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इससे प्रेग्नेंसी के दौरान एनीमिया का खतरा कम होता है.
कैसे बनाएं दही और चूड़ा
दही चूड़ा बनाना बेहद आसान है. इसके लिए सबसे पहले चूड़ा लें और उसे साफ पानी में डालकर अच्छी तरह धो लें, जैसे चावल धोते हैं. अगर चूड़ा ज्यादा मोटा है तो उसे लगभग 2 मिनट के लिए पानी में भिगो दें. इसके बाद पानी से छानकर चूड़े को निकाल लें.
अब एक कटोरी में ताजा और गाढ़ी दही लें और उसे अच्छी तरह मिला लें. इसमें अपने पसंद के अनुसार गुड़ या चीनी डालें. जब गुड़ या चीनी दही में अच्छी तरह मिल जाए तो उसमें चूड़ा डालकर हल्के हाथों से मिक्स करें.
आपका दही-चूड़ा तैयार है. इसे आप तिल के लड्डू और आलू-गोभी की सब्जी के साथ आराम से खा सकते हैं.
नोट: ये खबर सिर्फ जानकारी के लिए है अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने से पहले डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह लेना न भूलें.
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