देसी घी से बढ़ता है कोलेस्ट्रॉल...जेनेलिया डिसूजा के बयान पर छिड़ी बहस, जानें बच्चों को Ghee खिलाना चाहिए या नहीं

बॉलीवुड एक्ट्रेस जेनेलिया डिसूजा ने हाल ही में बच्चों की डाइट को लेकर बड़ा बयान दिया है, जिसमें उन्होंने अपने बेटों को घी न देने की वजह बताई. उनके इस फैसले पर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है. जानिए क्या सच में देसी घी बच्चों को नहीं देना चाहिए.

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देसी घी खाने से सेहत को कई लाभ मिलते हैं. (PHOTO:ITG) देसी घी खाने से सेहत को कई लाभ मिलते हैं. (PHOTO:ITG)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 06 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:48 PM IST

Genelia D'Souza Says No Ghee for Kids: बॉलीवुड के पावर कपल जेनेलिया डिसूजा और रितेश देशमुख अक्सर ही किसी ना किसी वजह से सुर्खियों में रहते हैं. कपल ही नहीं बल्कि उनके बच्चों की भी लोग काफी तारीफ करते हैं, क्योंकि वो बाकी स्टारकिड्स के बच्चों की तरह पैपराजी से बर्ताव नहीं करते हैं. शादी और बच्चों के बाद जेनेलिया ने लंबे समय तक एक्टिंग वर्ल्ड से ब्रेक ले लिया था, उन्होंने अपने बच्चों की परवरिश में काफी समय दिया है, जिसकी झलक उनके बच्चों में नजर भी आती है. हाल ही में एक्ट्रेस ने बच्चों की हेल्थ और डाइट को लेकर एक बयान दिया है, जो सोशल मीडिया पर बहस का मुद्दा बन गया है. 

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जेनेलिया ने हाल ही में सोहा अली खान के यूट्यूब पॉडकास्ट में बच्चों की डाइट और हेल्थ को लेकर अपने विचार खुलकर सामने रखे. इस दौरान उनसे बच्चों को घी न देने पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वो नहीं चाहती हैं कि कम उम्र में ही बच्चों की धमनियां ब्लॉक होने लगे, इसलिए उन्होंने अपने दोनों बेटों को घी से दूर रखा है. 

बच्चों को घी क्यों नहीं देतीं जेनिलिया

जेनिलिया का मानना है कि आज के समय में बच्चों की लाइफस्टाइल पहले से काफी बदल चुकी है. कम फिजिकल एक्टिविटी, ज्यादा स्क्रीन टाइम और जंक फूड की वजह से मोटापा, कोलेस्ट्रॉल और दिल से जुड़ी समस्याएं कम उम्र में ही देखने को मिल रही हैं. ऐसे में वह अपने बच्चों की डाइट को लेकर अधिक सतर्क रहती हैं, उन्होंने साफ कहा कि उनका मकसद किसी खास फूड को बुरा बताना नहीं है, बल्कि बैलेंस और जरूरत के हिसाब से खाना चुनना है. 

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जेनिलिया के मुताबिक,अगर फैट का सेवन जरूरत से ज्यादा हो जाए, तो वह आगे चलकर सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है. उनके परिवार में कोलेस्ट्रॉल की हिस्ट्री रही है, ऐसे में अपने पर्सनल एक्सपीरियंस की वजह से उन्होंने घी का सेवन सीमित करने का फैसला किया था.

बचपन से सिखाएं हेल्दी आदतें

जेनेलिया ने आगे कहा कि बचपन से ही  बच्चों को सेहत और सही खान-पान की आदतें सिखानी चाहिए, आप उनको लंबे समय तक एक चीज की अत्यधिक मात्रा नहीं खिला सकते हैं और न ही उनसे उम्मीद कर सकते हैं कि फिर वो अचानक से मोटापे से छुटकारा पा लें. 

इस बयान के सामने आते ही लोग इस पर तरह-तरह की टिप्पणी कर रहे हैं.आइए जानते हैं कि क्या सच में घी से बच्चों को दूर रखना सही फैसला है, इस पर रिसर्च क्या कहती है. 

घी से बच्चों की सेहत पर क्या असर होता है? 

भले ही जेनेलिया के विचार घी को लेकर अलग हैं, लेकिन भारतीय रसोई में घी हमेशा से अहम हिस्सा रहा है. कई चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉक्टर भी छोटे बच्चों को देसी घी देने की सलाह देते हैं. हालांकि घर का बना देसी घी अधिक फायदेमंद होता है, क्योंकि उसमें कोई केमिकल नहीं होता है और बच्चों की सेहत को कोई नुकसान भी नहीं पहुंचाता है. 

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घी एक नेचुरल मॉइस्चराइजर है, इसलिए इससे सॉफ्ट, शाइनी स्किन मिलती है और यह इम्यूनिटी को भी मजबूत करता है. बच्चों का डाइजेशन भी घी से सही से काम करता है. घी में ओमेगा-3 फैटी एसिड और DHA होता है, जो बच्चों की याददाश्त और दिमाग के विकास में मदद करता है.

बच्चों की ग्रोथ के लिए घी काफी मददगार होता है, इसमें विटामिन ए, डी. ई और के मौजूद होते हैं. घी बोन हेल्थ और ब्रेन के लिए काफी फायदेमंद माने जाते हैं, इसलिए बच्चों को घी देने के लिए डॉक्टर कहते हैं. 

बच्चा जैसे ही सॉलिड खाना शुरू करता है, तभी से उसे घी देना शुरू कर देना चाहिए. जब तक बच्चा 7 महीने का नहीं होता है तब तक आप सिर्फ 3 से 4 बूंद घी उसके खाने में डालें. 1 साल का होने के बाद 1 चम्मच घी खाने में देना शुरू कर सकती हैं. 

बच्चों को कुल कितना फैट देना चाहिए?

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, 2-3 साल की उम्र के बच्चों के लिए कुल फैट का सेवन कैलोरी का 30 से 35 प्रतिशत के बीच और 4 से 18 साल की उम्र के बच्चों और एडल्ट के लिए कैलोरी का 25 से 35 प्रतिशत के बीच रखें. अधिकांश फैट मछली, मेवे और वनस्पति तेल जैसे पॉलीअनसैचुरेटेड और मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड के सोर्स से आना चाहिए. 2 साल की उम्र से सैचुरेटेड फैट का सेवन प्रतिदिन कैलोरी के 7 प्रतिशत से कम रखें.

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कम वसा वाले और फैट रहित डेयरी प्रोडक्ट ही दें. 1 से 8 साल की उम्र के बच्चों को रोजाना 2 कप दूध या उसके बराबर मात्रा की जरूरत होती है. 9 से 18 साल की उम्र के बच्चों को 3 कप दूध की जरुरत होती है. अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स की सलाह है कि कम फैट वाला या घटा हुआ फैट वाला दूध 2 साल की उम्र से पहले शुरू न किया जाए.

WHO की गाइडलाइंस के मुताबिक, 2 साल या उससे अधिक उम्र के लोगों को रोज के खाने में तेल,घी, फैट लेना चाहिए. हालांकि ज्यादातर अनसैचुरेटेड फैट हो. कुल फैट रोजाना की कैलोरी का 10% से ज्यादा नहीं होना चाहिए. सैचुरेटेड फैट अधिकतर वसायुक्त मांस दूध से बने पदार्थ फुल क्रीम दूध, पनीर, चीज, मक्खन, घी और नारियल तेल जैसी चीजों में पाई जाती है. इस तरह का फैट अधिक खाने से दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है, इसलिए इन्हें सीमित मात्रा में ही खाना बेहतर होता है.
 

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