'इंस्टाग्राम पर वेलनेस थेरेपिस्ट बने बैठे हैं लोग, लगे लगाम', कर्नाटक हाईकोर्ट की टिप्पणी

कर्नाटक हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पर थेरेपिस्ट्स बने बैठे लोगों पर लगाम कसने के लिए कहा है. कोर्ट का कहना है कि ये लोग लोगों को बिना डिग्री या ज्ञान के कुछ भी सलाह देते हैं. देखा गया है कि सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर लोगों को हेल्थ सलाह देते हैं. लोग उन्हें डॉक्टर मानकर सलाह फॉलो करते हैं. पर वे असल में कोई डॉक्टर नहीं हैं.

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aajtak.in

  • बेंगलुरु,
  • 09 अक्टूबर 2022,
  • अपडेटेड 8:26 PM IST

कर्नाटक हाईकोर्ट ने सरकार को सलाह दी है कि वह छद्म चिकित्सकों (Pseudo Therapists) और इंस्टाग्राम इंफ्ल्यूएंसर्स के लिए कोई रेगुलेटरी बनाएं. अदालत ने आगाह किया कि देश में कई लोग ऐसे ऑनलाइन फर्जी थेरेपिस्ट का शिकार हो रहे हैं. इसी तरह के एक मामले में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने ये टिप्पणी की. दरअसल एक इंफ्लूएंसर ने कोर्ट से उसके खिलाफ दर्ज एक आपराधिक मामला रद्द करने की मांग की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी थी.

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इंस्टाग्राम पर डॉक्टर बन बैठे लोग!

कोर्ट ने कहा कि ऐसे इंफ्ल्यूएंसर किसी नैतिकता से बंधे नहीं होते और ना ही कोई पैरामीटर उन्हें रेग्यूलेट नहीं करते हैं. ऐसे में बड़े पैमाने पर इस तरह के मामले सामने आने लगे हैं, जहां इलाज के इच्छुक लोग छद्म चिकित्सक के शिकार हो जाते हैं. कोर्ट ने कहा, 'पब्लिक डोमेन में, ऐसे डॉक्टरों की एक बड़ी संख्या है. सोशल मीडिया पर लोग खुद को ऐसे पेश करते हैं जैसे वो वाकई में डॉक्टर हों. असल में ये लोग इंस्टा इंफ्ल्यूएंसर होते हैं. 

इस मामले में सुनवाई कर रही थी अदालत

जस्टिस एम. नागप्रसन्ना बेंगलुरू की रहने वाली 28 साल की संजना फर्नांडिस उर्फ ​​रवीरा की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे. शंकर गणेश पीजे ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी. जिसे रद्द कराने के लिए रवीरा ने हाईकोर्ट का रुख किया था. कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी है और मामला अब मजिस्ट्रेट कोर्ट में लंबित है. रवीरा पर भारतीय दंड संहिता (IPC) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Rules) की विभिन्न धाराओं के तहत धोखाधड़ी के अपराधों के लिए मामला दर्ज किया गया है. 

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क्या है पूरा मामला?

अभियोजन पक्ष के अनुसार, एक आईटी पेशेवर, रवीरा, एक डेटिंग ऐप पर आरोपी के संपर्क में आईं. जब यह महसूस करने के बाद कि शंकर गणेश तनाव में था, महिला ने उसे अपने इंस्टाग्राम पेज 'पॉजिटिव फॉर ए 360 लाइफ' के बारे में बताया. इंस्टाग्राम पर उस महिला ने एक वेलनेस थेरेपिस्ट होने का दावा किया. कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान शख्स ने महिला के ऑनलाइन सेशन में भाग लिया. इसके लिए उसने करीब 3.15 लाख रुपये भी ट्रांसफर किए. 

गणेश व्यक्तिगत रूप से उस डॉक्टर से मिलना चाहता था और उसे मैसेज भेजना शुरू कर दिया. ऐसे में उसे इंस्टा पर ब्लॉक कर दिया गया. बाद में उसे पता चला कि उसके इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 15 प्रोफाइल हैं. इसलिए उसने उसके खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज की. 

थेरेपिस्ट ने कोर्ट में दिया ये तर्क

अपने बचाव में बोलते हुए रवीरा ने हाईकोर्ट के सामने अपनी याचिका में तर्क दिया कि गणेश उसे भद्दे मैसेज और गंदे रिक्वेस्ट भेज रहा था और जब उसने विरोध किया, तो उसके खिलाफ झूठी शिकायत दर्ज की गई.

अदालत ने कहा कि उपचार के बारे में आरोपी द्वारा किए गए दावे निराधार थे. यह बिना किसी योग्यता के उसका अपना बनाया हुआ वेब पेज है. इसलिए, यह एक ऐसा मामला है जिसमें याचिकाकर्ता ने बिना किसी पदार्थ या योग्यता के ग्राहकों को वेब पेज के माध्यम से वेलनेस थेरेपी के जाल में फंसाया. उसके दावों के बारे में अदालत ने कहा कि चैट से पता चलेगा कि याचिकाकर्ता ने शुरू में खुद को एक वेलनेस थेरेपिस्ट के रूप में प्रस्तुत किया था और उसकी टीम शिकायतकर्ता की देखभाल करेगी.

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अदालत ने कहा कि उसने गणेश के खिलाफ अश्लील मैसेज के लिए मामला दायर किया था जो पेंडिंग भी था. उसकी याचिका को खारिज करते हुए, हाई कोर्ट ने 2 सितंबर को अपने फैसले में कहा, 'मुझे इस मामले में हस्तक्षेप करने के लिए कोई वारंट नहीं मिला है. जैसा कि याचिकाकर्ता ने इस अदालत के लिए कार्यवाही में हस्तक्षेप या हस्तक्षेप करने के लिए स्टर्लिंग चरित्र के इस तरह के निर्विवाद सबूत पेश करके प्रदर्शित नहीं किया है.'

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