उत्तराखंड में दरक रहे पहाड़, बदरीनाथ हाईवे आज फिर बंद, मौसम विभाग ने सभी 13 जिलों में जारी किया भारी बारिश का येलो अलर्ट

मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि पहाड़ पर जाने से पहले यात्री मौसम की जानकारी लें. पहाड़ों पर सावधानीपूर्वक चलें और नदी किनारे जाने से बचें. संवेदनशील भूस्खलन क्षेत्र व नदी किनारे रह रहे लोगों को सुरक्षित पर जाने की ज़रूरत है. मौसम विभाग ने किसानों को भी एतियातन फसलों को सुरक्षित रखने के लिए आगाह किया है.

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अंकित शर्मा

  • देहरादून,
  • 09 जुलाई 2024,
  • अपडेटेड 3:23 PM IST

उत्तराखंड में बारिश, बाढ़ और लैंडस्लाइड से भारी तबाही हुई है. कहीं पहाड़ दरक रहे हैं तो जगह-जगह रास्ते बंद हैं. लैंडस्लाइड के चलते बदरीनाथ नेशनल हाईवे भी बंद कर दिया गया है. मौसम विभाग ने जानकारी दी है कि आज, 9 जुलाई को कहीं-कहीं गर्जन के साथ आकाशीय बिजली चमकने के साथ कुछ जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है. मौसम विभाग ने 13 जुलाई तक उत्तराखंड के सभी 13 जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है.

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सभी 13 जिलों के लिए येलो अलर्ट

मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि पहाड़ पर जाने से पहले यात्री मौसम की जानकारी लें. पहाड़ों पर सावधानीपूर्वक चलें और नदी किनारे जाने से बचें. संवेदनशील भूस्खलन क्षेत्र व नदी के किनारे रह रहे लोगों को सुरक्षित पर जाने की ज़रूरत है. मौसम विभाग ने किसानों को भी एतियातन फसलों को सुरक्षित रखने के लिए आगाह किया है. स्थिति का जायजा लेने के लिए आज मुख्यमंत्री धामी ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया.

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कई इलाकों में बाढ़, बनबसा, टनकपुर में सबसे ज्यादा असर

बता दें कि बीते दिनों उत्तराखंड के कुमाऊं में जबरदस्त बारिश से चंपावत, उधमसिंह नगर के क्षेत्रों में बारिश ने काफी कहर बरपाया है. अभी किसी की मौत की खबर सामने नहीं आई लेकिन नदियों के उफान पर आने से बनबसा, टनकपुर में सबसे ज्यादा असर देखने को मिला है. वहीं, उधम सिंह नगर के खटीमा में बारिश ने पूरे शहर को जलमग्न कर दिया. अब तक चंपावत पुलिस ने 500 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुचाया है.

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संवेदनशील स्थानों पर जेसीबी तैनात

इन इलाकों में जलभराव होने से कई मकान पूरी तरह से पानी से भर गए. लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है. ऐसे इलाकों में एसडीआरएफ की कंपनियों को तैनात किया गया है. वहीं, मुख्यमंत्री के आदेश के बाद पिछले साल आपदा से सबक लेते हुए संवेदनशील स्थानों पर जेसीबी और टीमों को तैनात किया गया है. पीडब्ल्यूडी सचिव डॉ पंकज पांडेय ने बताया कि रामनगर में मोहान में अत्यधिक पानी और मलबे के आने से पुल टूट गया है. पुल को पहले भी रिपेयर कराया गया था, हालांकि संवेदनशील स्थिति में नहीं था, अब रास्ते का वैकल्पिक मार्ग बनाया जा रहा है.

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उत्तराखंड में 97 संवेदनशील पुल

कोटद्वार में पिछले साल क्षतिग्रस्त हुए मालन नदी के पुल को रिपेयर किया जा रहा है. अन्यपुलों को बनाने में 1 साल का समय लग सकता है. डॉ पांडेय ने जानकारी दी कि उत्तराखंड में 97 संवेदनशील पुल हैं, जिनमें 84 की मरम्मत करने के लिए प्रस्ताव भेजा है. बाकी पुलों की जांच की जा रही और ज़रूरत के अनुसार बंद भी किया गया है. पांडेय ने जानकारी दी कि उत्तराखंड में 200 से ज्यादा लैंडस्लाइड जोन घोषित किये गए हैं. इसके इलावा क्लाउड बर्स्ट और लैंडस्लाइड की वजह से सड़कें बह जाती हैं उनको रिपेयर किया जा रहा है या नई सड़क बनाई जाती है. ब्लॉक्ड सड़कों को खोलने के लिए 450 जेसीबी लगाई गईं हैं.

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