उत्तर प्रदेश के बीजेपी विधायक नंद किशोर गुर्जर मंगलवार को अपने ही सरकार के खिलाफ विधानसभा के सदन में धरने पर बैठ गए थे, जिन्हें बीजेपी और विपक्ष के तमाम विधायकों का साथ मिला. डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा से लेकर बीजेपी के तमाम बड़े नेताओं ने विधायकों को मनाने की कोशिश करते रहे, लेकिन कामयाब नहीं हुए. इसी के चलते विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने सदन को भी स्थागित करना पड़ा था. ऐसे में सवाल है कि आखिर क्या वजह थी जिसके चलते बीजेपी विधायक को अपनी ही सरकार के खिलाफ विधानसभा में धरने पर बैठना पड़ा?
क्या है पूरा मामला
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद की लोनी से बीजेपी विधायक नंदकिशोर गुर्जर सहित उनके 10 लोगों के खिलाफ वहां के खाद्य सुरक्षा अधिकारी आशुतोष सिंह ने मारपीट का मामला दर्ज कराया था. इसके बाद गाजियाबाद पुलिस ने नंद किशोर गुर्जर के दो करीबी लोगों को गिरफ्तार किया था. पुलिस की कार्रवाई से विधायक नाराज थे.
इलाके में विधायक को अपनी छवि खराब होने की आशंका सताने लगी थी, जिसके चलते पुलिसिया कार्रवाई के खिलाफ उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को खत भी लिखा था. इसके बाद भी पुलिस के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया गया, जिसकी वजह से नंद किशोर गुर्जर ने मंगलवार को विधानसभा में अपनी नाराजगी का इजहार करना चाहते थे. जब विधायक को सदन में बोलने नहीं दिया तो वो धरने पर बैठ गए.
विधायक और फूड इंस्पेक्टर के बीच अदावत
दरअसल नंद किशोर गुज्जर ने खाद्य सुरक्षा अधिकारी को गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस के आसपास मांस-मछली की दुकानों को लाइसेंस न देने का आग्रह किया था, क्योंकि कई मिग पहले भी पक्षियों से टकरा चुके थे. विधायक का आरोप है कि इस पर खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने कई कार्रवाई नहीं की, जिसके चलते विवाद हुआ था. इस मुद्दे पर विधायक का विवाद पहले खाद्य सुरक्षा अधिकारी से हुआ फिर जिले के पुलिस अधिकारी भी खाद्य सुरक्षा अधिकारी के समर्थन में आ गए जिससे बात बिगड़ गई.
पुलिस ने विधायक के खिलाफ की कार्रवाई
विधायक का आरोप है की खाद्य सुरक्षा अधिकारी और एसपी आपस में रिश्तेदार हैं. इसीलिए खाद्य सुरक्षा अधिकारी के कहने पर उनतके खिलाफ पुलिस कार्रवाई की गई है. इसके उलटा गाजियाबाद पुलिस ने नंदकिशोर गुर्जर के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड को देखते हुए विधायक और उनके समर्थकों के खिलाफ ही कार्रवाई कर दी. यह बात विधायक को नागवार गुजरी.
ऐसे में लोनी के विधायक लगातार शासन और मुख्यमंत्री से गुहार लगाते रहे लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई. जिससे वह पिछले कुछ महीनों से सरकार के खिलाफ बगावती सुर अपनाए हुए थे. इसके चलते पार्टी ने भी विधायक को पिछले दिनों नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा था.
विधानसभा के शीतकालीन सत्र के पहले दिन मंगलवार को जैसे ही मौका मिला विधायक ने अपनी बात रखनी चाही. इसके बाद वह धरने पर बैठ गए और मौका देखते ही बीजेपी के मौजूदा विधायक और साथ-साथ विपक्ष के लगभग सभी विधायक उनके साथ हो लिए जिनके भीतर प्रशासन के खिलाफ आक्रोश था.
कुमार अभिषेक