उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. इसमें देखा जा रहा है कि एक बुजुर्ग स्टील के घड़े के साथ नदी किनारे दलदल में फंसा हुआ है और मौजूद पुलिस बल और ग्रामीण एक डंडा के सहारे उसको निकालने का प्रयास कर रहे हैं. यह वायरल वीडियो जिले में मौदहा विकासखंड के छानी गऊ घट का है.
दरअसल, बारिश के समय पेयजल की समस्या और बढ़ जाती है, क्योंकि बरसात के दौरान नदी में बाढ़ के साथ दूर-दूर तक दलदल जमा हो जाता है, फिर भी प्यास बुझाने के लिए लोग अपनी जान पर खेलकर नदी से पेयजल लाने का प्रयास करते हैं. इसी जोखिम भरे काम को करते हुए छानी गऊघाट के रहने वाले बुजुर्ग छोटेलाल और चेहनू केन नदी के दलदल में इस कदर फंस गए कि उनको जान बचाने के लाले पड़ गए.
गनीमत यह रही कि नवरात्र विसर्जन को देखते हुए मौके पर प्रशासनिक अधिकारीगण और कई ग्रामीण मौजूद थे. दो ग्रामीणों को दलदल में लगातार धंसते देख अधिकारियों और ग्रामीणों के हाथ पांव फूलने लगे और वहां मौजूद क्षेत्र पंचायत सदस्य अमित सिंह ,सुधीर सिंह, संतोष तिवारी एवम रंगबहादुर सहित की मदद से किसी तरह दोनों ग्रामीणों को बाहर निकाला गया.
क्षेत्रीय लेखपाल का कहना है कि नदी किनारे देवी विसर्जन की तैयारियों के लिए अधिकारी और पुलिस बल मौजूद था. सभी लोगों ने बुजुर्गों को रोका कि इधर से न जाएं, लेकिन दोनों नहीं माने. हालांकि, जब दोनों फंस गए तो सभी लोगों ने उन्हें सहारा देकर बाहर निकाल लिया.
बुंदेलखंड में आदिकाल से ही पीने के पानी की भारी किल्लत रही है. कहा जाता है कि इस इलाके में खून सस्ता और पानी महंगा है, तभी तो ग्रामीण जान की बाजी लगाकर केन नदी का पानी लाने को मजबूर हैं. पानी की इसी किल्लत को Aajtak ने कई बार प्रमुखता से प्रसारित किया था. जिसका असर यह हुआ कि प्रदेश सरकार ने बुंदेलखंड के सभी सातों जिलों में घर-घर पानी पहुंचने के लिए हर घर नल योजना शुरू की है, लेकिन अभी तक यह योजना पूरी नहीं हुई है. जबकि सूबे के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने हमीरपुर में बयान देकर दावा किया था कि 15 अगस्त तक हर घर में नल से पानी पहुंच जाएगा.
आपको बता दें कि जिले में मौदहा ब्लॉक के गऊघाट छानी, बक्क्षा, खैर और गढ़ा बैजे मऊ, परेहटा आदि गांवों में आज भी शुद्ध पेयजल की किल्लत बनी रहती है. इन गांवों का पानी इतना खारा है कि पीने में बड़ी मुश्किल होती है, इसलिए लोग केन नदी से पीने का पानी लाते हैं. ग्रामीण कई किलोमीटर साइकिल, बैलगाड़ी, ट्रैक्टर और पैदल चलकर पीने का पानी लेने जाते हैं.
नाहिद अंसारी