बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में हिंसा के बाद छात्राओं के साथ आए प्रोफेसर

बीएचयू के पूर्व छात्र विकास का मानना है कि बनारस बवंडर यूनिवर्सिटी नहीं है. सियासत तो यहां पर हो ही नहीं रही है. छात्रसंघ नहीं है, सियासत होने भी नहीं दे रहे. यदि सियासत हो भी रही है तो कोई बुरी बात नहीं है. अगर सकारात्मक सियासत हो तो अच्छी बात है, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा. वो छात्रों को डरा रहे हैं. एक दिन ऐसा आएगा जब लोग इनसे डरना छोड़ देंगे.

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बीएचयू यूनिवर्सिटी. बीएचयू यूनिवर्सिटी.

आदित्य बिड़वई / मौसमी सिंह

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  • 27 सितंबर 2017,
  • अपडेटेड 4:09 PM IST

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में छात्राओं पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में प्रोफेसर समेत कई छात्र नेता आगे आए. सभी ने लाठीचार्ज की कड़ी निंदा करते हुए छात्राओं के पक्ष में अपना मत रखा.

इस बारे में प्रोफेसर बलराज पांडे ने कहा कि हमारे यहां सारी प्रोफेसर कोड ऑफ कंडक्ट के तहत चुप्पी साधे हुए हैं. यहां पर क्राइटेरिया अपनी पगार अपनी तनखा अपनी सुख शांति है. विश्वविद्यालय में क्या हो रहा है इस पर कोई भी प्रोफेसर टिप्पणी नहीं करना चाहता, क्योंकि वह अपना ऑपरेशन देख रहा है. प्रोफेसरों पर आचार संहिता लगी हुई है.

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वहीं, पूर्व छात्र संघ नेता सतेंद्र का कहना है कि लंबे समय से प्रशासन ये स्वीकार करने में असमर्थ रहा है कि जब दुनिया बदली तो BHU को भी बदलना चाहिए था, लेकिन वो खुद ना बदलते हुए छात्र और छात्राओं को यूनिवर्सिटी की सोच थोप रहा है.  

बीएचयू के पूर्व छात्र विकास का मानना है कि बनारस बवंडर यूनिवर्सिटी नहीं है. सियासत तो यहां पर हो ही नहीं रही है. छात्रसंघ नहीं है, सियासत होने भी नहीं दे रहे. यदि सियासत हो भी रही है तो कोई बुरी बात नहीं है. अगर सकारात्मक सियासत हो तो अच्छी बात है, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा. वो छात्रों को डरा रहे हैं. एक दिन ऐसा आएगा जब लोग इनसे डरना छोड़ देंगे.

वरिष्ठ पत्रकार नितिन राय ने बताया कि ऐसी हिंसा बनारस के बिल्कुल विपरीत है. पहले पुलिस ने लाठियां चलाई जिस का रिएक्शन बच्चों ने दिया. पूर्वांचल की आत्मा व्यथित है उस दिन दुर्गा पूजा चल रही थी. नवरात्र के दौरान बच्चों पर लाठियां तब बंद हुई जब पत्रकार पहुंचे. लाठियां बंद हुई तो प्रशासन और जिलाधिकारी लगातार धक्का-मुक्की कर रहे थे.

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