Kanpur: डेढ़ साल तक घर में कैसे रखी रही लाश ? मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर करेंगे केस स्टडी

यूपी के कानपुर में एक परिवार डेढ़ साल से शव के साथ रह रहा था. इनकम टैक्स अधिकारी की मौत के बाद भी परिजन जीवित मान रहे थे. मृतक का डेथ सर्टिफिकेट भी जारी किया जा चुका था. मेडिकल साइंस के लिए यह केस हैरान करने वाला है. मेडिकल कॉलेज अब इस मामले की केस स्टडी करेगा.

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डेढ़ साल तक घर में रखी रही लाश. (Representational image) डेढ़ साल तक घर में रखी रही लाश. (Representational image)

रंजय सिंह

  • कानपुर,
  • 24 सितंबर 2022,
  • अपडेटेड 7:48 PM IST

उत्तर प्रदेश के कानपुर में डेढ़ साल तक इनकम टैक्स अधिकारी विमलेश की लाश को घर में छिपाने का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है. घटना की जानकारी के बाद पुलिस लाश को निकालकर कानपुर मेडिकल कॉलेज के हैलट हॉस्पिटल लेकर पहुंची थी, जहां डॉक्टरों ने जांच कर डेढ़ साल पहले मौत होने का दावा किया था. मेडिकल कॉलेज जीएसवीएम कानपुर अब इस मामले में पूरे केस की स्टडी करेगा.

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मेडिकल कॉलेज के साइकेट्रिस्ट विभाग के हेड डॉ. गणेश का कहना है कि यह एक तरह से दुनिया का सबसे अनोखा केस है. पूरा परिवार एक ही तरह की सोच रखता रहा कि मरने वाला अभी जिंदा है, यह एक तरह की बीमारी है.

जानकारी देते डॉ. गणेश.

डॉ. गणेश ने कहा कि यह मृतक के परिवार के लोग उसे जिंदा मानकर चल रहे थे, ऐसे में अब वह मानसिक रूप से व्यथित होंगे. उनकी निगरानी किए जाने जरूरत है, वह खुद को नुकसान पहुंचा सकते हैं.

जानकारी देते परिवार के लोग.

उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर, छात्र तो इस मामले को केस स्टडी के रूप में लेंगे ही, लेकिन यह केस सारी दुनिया के लिए स्टडी का केस बनेगा. उन्होंने यह भी कहा कि घर वाले लाश को गंगाजल से पोंछते थे, डिटॉल से पोंछते थे, ऐसे में बॉडी ममी की तरह हो जरूर गई थी, लेकिन वह ममी नहीं थी, क्योंकि ममी का प्रोसेस ही अलग है.

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क्या था पूरा मामला, जारी कर दिया गया था मृत्यु प्रमाण पत्र

रोशन नगर निवासी विमलेश कुमार इनकम टैक्स में कार्यरत थे. उन्हें अप्रैल 2021 में इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया था. अस्पताल की ओर से उनका डेथ सर्टिफिकेट भी दे दिया गया था.

शव को घर लाने के बाद अंतिम संस्कार की तैयारियां की जा रही थीं. इस दौरान अचानक परिजनों ने यह कहकर अंतिम संस्कार स्थगित कर दिया गया कि मृतक को होश आ गया है. इसके बाद करीब डेढ़ साल से मृतक का शव घर के अंदर एक पलंग पर रखा गया था. 

वह घर, जिसमें डेढ़ साल तक परिवार के लोग रखे रहे लाश.

परिजन लोगों से कहते रहे कि विमलेश कोमा में हैं. मगर, जब आयकर विभाग ने जांच के लिए कानपुर के सीएमओ कार्यालय को एक पत्र भेजा तो शुक्रवार को मामले का खुलासा हो गया. लोगों को जैसे ही जानकारी हुई तो वे हैरान रह गए. पुलिस को लेकर स्वास्थ्य टीम घर पहुंची. परिवार ने उसे शव मानने से इनकार कर दिया और इस बात पर अड़ा रहा कि वह अब भी जिंदा हैं.

इसके बाद शव को मेडिकल टीम ने हैलट अस्पताल में जांच के लिए भेज दिया. इसके बाद परिजन शव को अंतिम संस्कार के लिए ले गए. मृतक के पिता ने कहा कि अप्रैल 2021 में बेटा बीमार था, इसलिए हम उसे अस्पताल ले गए. वहां उसे मृत घोषित कर दिया गया. मगर, जब हम उसे घर ले आए, तो हमने देखा कि उसकी नब्ज चल रही थी. उसकी दिल की धड़कन भी थी, इसलिए हमने उसका अंतिम संस्कार नहीं किया.

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