गाजियाबाद: आयुष के जॉइंट डायरेक्टर ने रिसर्च अफसर को पीटा, शिकायत पर किया टर्मिनेट, 6 माह बाद दर्ज हुई FIR

आयुष विभाग के जाइंट डायरेक्टर पर रिसर्च अफसर की पिटाई का आरोप लगा है. छह महीने पुरानी इस घटना को लेकर पुलिस ने अब एफआईआर दर्ज की है. पीड़ित ने आरोप लगाया है कि जब उसकी ओर से घटना की शिकायत आयुष मंत्रालय में की गई तो आरोपियों पर कार्रवाई करने की बजाय उल्टा उसे ही टर्मिनेट कर दिया गया.

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(फाइल फोटो) (फाइल फोटो)

मयंक गौड़

  • गाजियाबाद,
  • 19 जून 2022,
  • अपडेटेड 12:19 PM IST
  • गाजियाबाद के मधुबन बापूधाम थाना क्षेत्र का मामला
  • आरोप के मुताबिक 6 दिसंबर 2021 की है घटना

उत्तर प्रदेश में एक अधिकारी से उसके ही वरिष्ठ अधिकारी और अन्य कर्मचारियों के मारपीट करने का मामला सामने आया है. घटना छह महीने पुरानी बताई जा रही है. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटे यूपी के गाजियाबाद में तैनात रहे आयुष विभाग के रिसर्च अफसर की शिकायत पर तब पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की. आयुष मंत्रालय में शिकायत की तो उसे ही नौकरी से टर्मिनेट कर दिया गया.

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घटना के छह महीने बाद अब वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की ओर से दखल दिए जाने के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. रिसर्च अफसर से मारपीट का आरोप आयुष विभाग के जॉइंट डायरेक्टर पर है. जानकारी के मुताबिक गोपी बी गाजियाबाद के मधुबन बापूधाम थाना क्षेत्र में पीसीआई एम एंड एच के माइक्रोबायोलॉजी संकाय में रिसर्च अफसर के पद पर तैनात थे.

गोपी का आरोप है कि 6 दिसंबर 2021 को पीसीआईएम एंड एच के जॉइंट डायरेक्टर जीबीआर जोसफ उनके कमरे में आए. उन्होंने आरोप लगाया कि जोसफ ने अभद्र व्यवहार करते हुए उनके साथ मारपीट भी की. गोपी बी की ओर से की गई शिकायत के अनुसार जीबीआर जोसेफ के साथ ही रमेश, ललित तिवारी, उदय, रविंद्र,  मुकेश समेत कई कर्मचारी भी उनके कक्ष में आ घुसे और गाली-गलौज की.

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रिसर्च रिपोर्ट से खफा था अधिकारी

उन्होंने कहा है कि घटना से एक दिन पहले रविवार का दिन था और रविवार के दिन उन्होंने एक रिसर्च रिपोर्ट ऑनलाइन दाखिल की थी. इसी को लेकर जॉइंट डायरेक्टर उनसे खफा थे. पीड़िता दावा है कि मारपीट की घटना के इसकी शिकायत पुलिस से भी की लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं की गई.

शासन ने पीड़ित को ही कर दिया था टर्मिनेट

उन्होंने ये भी कहा है कि मेरी पत्नी ने भी आयुष मंत्रालय को पत्र लिखकर पूरे मामले की जानकारी दी थी लेकिन आरोपियों की जगह उल्टा उनके खिलाफ ही एक्शन ले लिया गया. घटना के करीब तीन महीने बाद 31 मार्च को आयुष मंत्रालय ने गोपी बी को टर्मिनेट कर दिया था.

एसएसपी की दखल के बाद दर्ज हुआ केस

गोपी बी ने इस मामले में कोर्ट जाने की भी जानकारी दी है. अब गाजियाबाद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) मुनिराज की दखल के बाद मधुबन बापूधाम थाने की पुलिस ने गोपी बी की तहरीर पर आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 147, 323, 504 और 506 के तहत मामला दर्ज किया है.मधुबन बापूधाम पुलिस ने इस मामले की जांच की जिम्मेदारी रतन सिंह को सौंपी है. रतन सिंह ने कहा है कि जांच की जा रही है.

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