कैसे कांग्रेस के खिलाफ प्रणब मुखर्जी बन गए हैं मोदी के मजबूत हथियार

राष्ट्रपति बनने से पहले प्रणब मुखर्जी ने 5 दशक तक कांग्रेस में रहकर राजनीति की और सरकार से लेकर संगठन में बड़े पदों पर रहे. लेकिन 2014 में जब केंद्र में नरेंद्र मोदी की अगुवाई में एनडीए की सरकार बनी तो राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी थे. तब से पीएम मोदी ने प्रणब दा के साथ अपना रिश्ता जोड़ा और मजबूती से निभाया भी.

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पीएम मोदी के साथ प्रणब मुखर्जी पीएम मोदी के साथ प्रणब मुखर्जी

अनुग्रह मिश्र

  • नई दिल्ली,
  • 27 जून 2019,
  • अपडेटेड 4:29 PM IST

संसद के दोनों सदनों में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा हो चुकी है. पहले लोकसभा और फिर राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस चर्चा का जवाब दिया. पीएम मोदी ने अपने जवाब में कांग्रेस के हर हमले पर पलटवार किया लेकिन दोनों ही दिन उनके भाषण में एक बात समान रही, वह ये कि उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के बहाने कांग्रेस को कटघरे में खड़ा किया.

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राष्ट्रपति बनने से पहले प्रणब मुखर्जी ने 5 दशक तक कांग्रेस में रहकर राजनीति की और सरकार से लेकर संगठन में बड़े पदों पर रहे. लेकिन 2014 में जब केंद्र में नरेंद्र मोदी की अगुवाई में एनडीए की सरकार बनी तो राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी थे. तब से पीएम मोदी ने प्रणब दा के साथ अपना रिश्ता जोड़ा और मजबूती से निभाया भी. पीएम मोदी ने कांग्रेस के सबसे कद्दावर नेता को ही कांग्रेस के खिलाफ हथियार बनाकर खड़ा कर दिया है.

हमारी सरकार ने दिया भारत रत्न

लोकसभा में दिए अपने भाषण में पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस ने नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह को भी महत्व नहीं दिया और कांग्रेस शासन में परिवार से बाहर के लोगों को कुछ नहीं मिला. पीएम मोदी ने कहा कि प्रणब दा किसी भी पार्टी के हैं लेकिन हमने उन्हें भारत रत्न दिया. हम किसी के भी योगदान को नहीं नकारते. पूर्व राष्ट्रपति को मोदी सरकार ने 2019 में देश के सबसे बड़े नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा था.

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इसके बाद जब प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यसभा में अपना संबोधन दिया तो फिर से पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का जिक्र किया. पीएम मोदी ने कहा कि एक बार प्रणब मुखर्जी ने कहा था कि बहुमत को देश चलाने का जनादेश मिलता है, अल्पमत को विरोध का जनादेश मिलता है लेकिन किसी को भी बाधा पहुंचाने के लिए जनादेश नहीं मिलता. आज हमारे पास राज्यसभा में बहुमत नहीं है लेकिन इस वजह से जनता के फैसले को कुचला नहीं जाना चाहिए. यह पहला मौका नहीं है जब पीएम मोदी ने प्रणब मुखर्जी के प्रति अपना नजरिया देश के सामने रखा है. इससे पहले बीजेपी को मिली प्रचंड जीत के बाद पीएम मोदी ने शपथ ग्रहण से पहले प्रणब दा का आशीर्वाद लिया था.

पीएम मोदी और बीजेपी लगातार कांग्रेस पर सरदार पटेल और बाबा साहब अंबेडकर को उचित सम्मान न देने के आरोप तो लगाती रहती है लेकिन हाल के दिनों में बीजेपी ने कांग्रेस पर निशाना साधने के लिए प्रणब मुखर्जी को हथियार बना लिया है. मुखर्जी कांग्रेस के बड़े नेता रहे हैं ऐसे में पार्टी उनके खिलाफ कुछ कह भी नहीं सकती और पीएम मोदी के सियासी तीरों को झेलना उसकी मजबूरी है.

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