मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के नतीजे आ चुके हैं. बहोरीबंद विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी ) के प्रणय पांडे ने 89041 वोट से साथ जीत हासिल की है. उन्होंने कांग्रेस के सौरभ सिंह सिसोदिया को हराया. उन्हें 72606 वोट मिले हैं.
2013 में विधानसभा की क्या थी तस्वीर
मध्य प्रदेश विधानसभा की 230 सीटों में से 35 सीट अनुसूचित जाति जबकि 47 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं. 148 गैर-आरक्षित सीटें हैं. 2013 में हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने 165 सीटों पर जीत हासिल कर राज्य में लगातार तीसरी बार सरकार बनाई थी, जबकि कांग्रेस को 58 सीटों से ही संतोष करना पड़ा था. वहीं बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने 4 जबकि 3 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की थी.
उपचुनाव में पलट गई बाजी
बहोरीबंद विधानसभा पर 2008 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. निशित पटेल ने 25,822 मतों के साथ जीत हासिल की थी, जबकि बीजेपी उम्मीदवार शंकर लाल को 24,148 वोटों से संतोष करना पड़ा था. 2013 के चुनावों में इस सीट को बीजेपी ने कांग्रेस से छीन लिया और प्रभात पांडे ने 54,504 मतों के साथ जीत का परचम लहराया वहीं कांग्रेस उम्मीदवार निशित पटेल को 33,586 मतों से संतोष करना पड़ा था.
मगर 2014 में बीजेपी विधायक प्रभात पांडे के निधन के बाद इस सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज की. यहां कांग्रेस के सौरभ सिंह ने बीजेपी के प्रणय पांडे को लगभग आठ हजार वोटों से पराजित किया. बहोरीबंद के तत्कालीन विधायक प्रभात पांडे के निधन के बाद यह सीट खाली हो गई, जिसमें बीजेपी ने उनके बेटे प्रणय पांडे को अपना उम्मीदवार बनाया था. वहीं कांग्रेस ने बसपा से कांग्रेस में आए सौरभ सिंह को अपना उम्मीदवार घोषित किया था.
कितने लोगों ने किया मताधिकार का प्रयोग
चुनाव आयोग के मुताबिक 2018 में मध्य प्रदेश में कुल 5,03,94,086 मतदाता हैं जिनमें महिला मतदाताओं की संख्या 2,40,76,693 और पुरुष मतदाताओं की संख्या 2,62,56,157 रही. पुरुष मतदाताओं का वोटिंग प्रतिशत 75.98 रहा तो वहीं महिला मतदाताओं का वोटिंग प्रतिशत 74.03 रहा. इस बार मध्य प्रदेश में 75.05 फीसदी मतदान हुआ. 2013 में 72.07 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था.
वोटिंग में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी
चुनाव आयोग के मुताबिक इस बार मध्य प्रदेश में 75.05 फीसदी मतदान हुआ. जबकि 2013 में 72.07 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था. इस बार महिलाओं का मतदान प्रतिशत पिछले चुनाव के मुकाबले करीब 4 फीसदी बढ़कर 74.03 प्रतिशत रहा. 2013 में महिलाओं का मतदान प्रतिशत 70.11 रहा था.
इसके पहले कैसा रहा है वोटिंग का प्रतिशत
1990 में स्व. सुंदरलाल पटवा के नेतृत्व में बीजेपी मैदान में उतरी और 4.36 फीसदी वोट बढ़ गए. तत्कालीन कांग्रेस की सरकार को हार का सामना करना पड़ा था. इसके बाद 1993 में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस चुनाव में उतरी तो 6.03 प्रतिशत मतदान बढ़ा और बीजेपी की पटवा सरकार हार गई थी.
वहीं, 1998 में वोटिंग प्रतिशत 60.22 रहा था जो 1993 के बराबर ही था. उस वक्त दिग्विजय सिंह की सरकार बनी. लेकिन 2003 में उमा के नेतृत्व में बीजेपी सामने आई और दिग्विजय सिंह की 10 साल की सरकार सत्ता से बाहर हो गई. उस वक्त भी 7.03 प्रतिशत वोट बढ़े थे.
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देवांग दुबे गौतम