स्टील फेंसिंग से लैस होगा बॉर्डर, पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर सिलचर से हुई शुरुआत

अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से होने वाली घुसपैठ की समस्या से निपटने के लिए भारत अब अपनी सरहदों को स्टील फेन्स सिस्टम से लैस करेगा. पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इसकी शुरुआत असम के सिलचर में बांग्लादेश से लगती सीमा से हो गई है. सीमा पर लगाई जाने वाली स्टील फेन्स यानी बाड़ पर बाहरी मौसम का कोई असर नहीं होगा और इसे काटा भी नहीं जा सकेगा.

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सिल्चर में लगाई गई स्टील फेन्स सिल्चर में लगाई गई स्टील फेन्स

जितेंद्र बहादुर सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 11 जनवरी 2020,
  • अपडेटेड 8:34 AM IST

  • पाकिस्तान और बांग्लादेश की सरहद पर लगाई जानी है बाड़
  • 5 साल में सरहद को फेंसिंग सिस्टम से लैस करने का लक्ष्य

अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से होने वाली घुसपैठ की समस्या से निपटने के लिए भारत अब अपनी सरहदों को स्टील फेंस सिस्टम से लैस करेगा. पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इसकी शुरुआत असम के सिलचर में बांग्लादेश से लगती सीमा से हो गई है. सीमा पर लगाई जाने वाली स्टील फेंस यानी बाड़ पर बाहरी मौसम का कोई असर नहीं होगा और इसे काटा भी नहीं जा सकेगा.

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असम के सिलचर में आधुनिक फेंसिंग लगाई गई है. भारत की सीमाओं को सुरक्षित रखने के लिए यह स्मार्ट प्रोजेक्ट लांच किया गया हैृ. सरहद पर नए तरीके से फेंसिंग लगानेवाली एजेंसियों का दावा है कि इसे आसानी से काटा नहीं जा सकता. यह स्टील का बना है. अभी फेंसिंग के समय दो तरफ से फेंसिंग करनी होती है लेकिन नए फेंसिंग में सिंगल फेंसिंग की जा रही है.

मजबूत है स्ट्रक्चर

स्टील का बने होने की वजह से पूरा स्ट्रक्चर इतना मजबूत है कि उसे किसी भी धारदार हथियार से काटा ही नहीं जा सकता. इसके अलावा यह गरमी, बरसात और ठंड हर तरीके के मौसम को भी झेल सकेगा. पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इसे अभी असम के सिलचर में भारत और बंग्लादेश सीमा पर लगाया जा रहा है. इसके बाद इसे देश की सभी सीमाओं पर लगाने की केंद्र सरकार की योजना है.

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एक किलोमीटर फेंसिंग की इतनी है लागत

स्टील से निर्मित इस फेंसिंग सिस्टम को लगाने में एक किलोमीटर के लिए एक करोड़ 99 लाख रुपये की लागत आएगी. पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर फिलहाल असम के सिलचर में सात किलोमीटर तक इसे लगाया जा रहा है. केंद्र सरकार ने देश की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को 10 साल में इस फेंसिंग सिस्टम से लैस करने की योजना थी. इसे घटाकर अब पांच साल कर दिया गया है. इसके लिए रक्षा, गृह और दूरसंचार मंत्रालय की एक संयुक्त उच्चस्तरीय टीम बनाई गई है.

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