इंडिया गेट से जयहिंद: 8 पूर्व अफसरों ने कहा- PAK पर कर दो चढ़ाई

पुलवामा के शहीदों को श्रद्धांजलि देने और आतंक के खिलाफ एकजुटता का संदेश लेकर इंडिया गेट पर लोग पहुंचे हैं. आजतक के खास कार्यक्रम 'ये देश है वीर जवानों का' में देश 8 पूर्व फौजी अफसर शामिल हुए. सेना के सभी पूर्व अफसरों ने एक सुर में कहा कि अब बातचीत नहीं, सीधे पाकिस्तान को सबक सिखाने की जरूरत है.

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पुलवामा शहीदों को श्रद्धांजलि के लिए 'आजतक' का खास कार्यक्रम पुलवामा शहीदों को श्रद्धांजलि के लिए 'आजतक' का खास कार्यक्रम

अमित कुमार दुबे

  • नई दिल्ली,
  • 19 फरवरी 2019,
  • अपडेटेड 6:36 PM IST

पुलवामा के शहीदों को श्रद्धांजलि देने और आतंक के खिलाफ एकजुटता का संदेश लेकर इंडिया गेट पर लोग पहुंचे हैं. आजतक के खास कार्यक्रम 'ये देश है वीर जवानों का' में देश 8 पूर्व फौजी अफसर शामिल हुए. सेना के सभी पूर्व अफसरों ने एक सुर में कहा कि अब बातचीत नहीं, सीधे पाकिस्तान को सबक सिखाने की जरूरत है. अपने अनुभव शेयर करते हुए पूर्व अधिकारियों को कहा कि आज की तारीख में पाकिस्तान भारत से मुकाबल नहीं कर सकता है, और अगर भारत आतंकवाद से मुक्ति चाहता है तो सबसे पहले पाकिस्तान में बैठे आतंक के आकाओं को खत्म करे.

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आजतक के कार्यक्रम जवानों के शहादत पर सेना के पूर्व अधिकारियों का गुस्सा फूट पड़ा. सेना के पूर्व अधिकारियों से दीपक जलाकर वीर जवानों को श्रद्धांजलि दी.  

बिशंभर दयाल (रक्षा विशेषज्ञ)- भारत सरकार को इमरान खान पर कतई विश्वास नहीं करना चाहिए. अब पाकिस्तान को सबूत देने के बजाय जैश-ए-मोहम्मद को खींचकर लाने की जरूरत है. 30 साल से हम बातचीत की कोशिश में लगे हैं और हमारे जवान मारे जा रहे हैं. अब इमरान खान भी लड़ना चाहता है. इमरान को आज जवाब देने की जरूरत है. पाकिस्तान एक कमजोर और छोटा-सा मुल्क है, पाकिस्तान को सीधा जवाब देना चाहिए. 1971 में पाकिस्तान पर हमले से पहले संसद में नेता जमा हुए थे. आज फिर दोहराने का वक्त आ गया है.

मेजर जनरल (रिटायर्ड) के के सिन्हा- कश्मीर के अंदर 20 साल से युद्ध चल रहा है. अभी तक भारत ने संयम रखा है. 65 और 71 और करगिल के युद्ध से पहले भी इमरान खान की तरह ही पाकिस्तानी नेताओं की भाषा थी. करगिल युद्ध में भारत जब घर में घुस गया तो पाकिस्तान दुम दबाकर भागने लगा. प्रधानमंत्री ने साफ कर दिया है कि अब संयम का बांध टूट चुका है.

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ले. ज. (रिटायर्ड) राज कादयान- पाकिस्तान डरा हुआ है, इमरान खान के आज का बयान से साफ हो गया है कि वो कितने सहमे हुए हैं. उन्हें पता है कि पाकिस्तान तीन बार भारत से भिड़ चुका है और तीनों पर हार हुई. पाकिस्तान के साथ-साथ कश्मीरी लोगों की सोच बदलने की जरूरत है. आज अगर कश्मीर के लोग फैसला कर लें कि हम आतंकवादियों को साथ नहीं देंगे तो आज से ही आतंक पर लगाम लग जाएगा.

पी के मिश्रा (पूर्व BSP अधिकारी)- भारत एक बड़ा देश है और पाकिस्तान को आसानी से काबू में कर सकता है. आज फिर पाकिस्तान हमसे सबूत मांग रहा है. जवानों की पार्थिव शरीर सबूत नहीं है. करगिल जैसा युद्ध होना चाहिए. अब बात से कुछ नहीं होने वाला है. पाकिस्तान को सबक सिखाने की जरूरत है. सेना के जवान कश्मीर में मर सकते हैं. लेकिन जमीन का एक टुकड़ा नहीं खरीद सकते हैं. इसलिए सबसे पहले आर्टिकल 370 को हटाना जरूरी है.

मेजर जनरल (रिटायर्ड) राजेश सहाय- देश को एकजुट होने का वक्त है. इस वक्त सीमा पर तैनात जवानों को हौसला अफजाई करना चाहिए. इमरान खान की बात में कोई दम नहीं है. जो पाकिस्तानी आर्मी कहती है वही इमरान खान बोलते हैं. पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब मिलेगा और दिखेगा भी. देश को इस समय जोश के साथ होश भी रखना चाहिए.  

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प्रफुल्ल बख्शी (रक्षा विशेषज्ञ)- एयर स्ट्राइक की ऑर्डर के लिए हिम्मत चाहिए. करगिल में भी एयर स्ट्राइक लेट से हुआ था. हमें कभी ये सिखाया नहीं गया कि कब क्या करना है. पाकिस्तान की आर्मी ही सबकुछ है, वहां के राजनेता आर्मी के हाथ कठपुतली हैं. पीओके पर कार्रवाई जरूरी है. सेना के कुछ लोग भी देश को गुमराह करते हैं.

मेजर जनरल (रिटायर्ड) एजेबी जैनी- आज तिरंगा देशवासियों से सवाल पूछ रहा है, सरकार को जवाब देना चाहिए, क्योंकि पाकिस्तान हमारे सामने कुछ भी नहीं है. आज हम पाकिस्तान से 7 गुना ज्यादा ताकतवर हैं, फिर भी हमले से क्यों हिचक रहे हैं. पाकिस्तान आज गधे बेचकर काम चला रहा है, आर्थिक बदहाली की कगार है. पाकिस्तानी में केवल आर्मी की ताकत है. आर्टिकल 370 हटाने की जरूरत है, 370 की आड़ में हुर्रियत वाले अपना एजेंडा चला रहे हैं.

कर्नल (रिटायर्ड) बी एन थापर- आतंकी मसूद अजहर, हाफिज सईद को जब पकड़कर भारत लाया जाएगा तभी शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी. 1971 में इंदिरा गांधी ने कहा था कि अप्रैल में हमले करो, फिर आर्मी चीफ ने उन्हें समझाया था कि अभी वक्त ठीक नहीं है. और रणनीति के मुताबिक साल के अंत में हमला किया गया और पाकिस्तान का दो टुकड़ा कर दिया. इमरान खान को करगिल युद्ध के बारे में सही से जानकारी नहीं है. सेना हिम्मत से लड़ती है और हिम्मत देशवासियों से मिलती है. सरकार को अंदरूनी ताकत से भी निपटने की जरूरत है.

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