सरकारी छूट का सीमित लाभ, लॉकडाउन में बर्बाद हो रहे सब्जी किसान

किसानों पर खराब मौसम के बाद कोरोना वायरस की मार पड़ी है. एक तरफ निर्यात बंद है तो दूसरी तरफ मंडियां भी ठप हैं. ऐसे में सब्जी की खेती करने वाले किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है. हालत ये है कि टमाटर, हरी मिर्च, गोभी, शिमला मिर्च, धनिया, लौकी, खीरा जैसी सब्जियों को किसान मंडियों में ले जाने के बजाय खेतो में ही छोड़ रहे हैं.

Advertisement
सब्जी किसान (PTI-फोटो) सब्जी किसान (PTI-फोटो)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 29 अप्रैल 2020,
  • अपडेटेड 4:02 PM IST

  • किसान अपनी सब्जियों को मंडी तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं
  • दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर सील, हरियाणा के किसान परेशान
  • कोरोना संक्रमण से सब्जी की खपत भी बहुत कम हो रही है

कोरोना महामारी और लॉकडाउन के चलते सब्जी कारोबार पूरी तरह से चौपट हो गया है. किसानों पर खराब मौसम के बाद कोरोना वायरस की मार पड़ी है. एक तरफ निर्यात बंद है तो दूसरी तरफ मंडियां भी ठप हैं. ऐसे में सब्जी की खेती करने वाले किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है. हालत ये है कि टमाटर, हरी मिर्च, गोभी, शिमला मिर्च, धनिया, लौकी, खीरा जैसी सब्जियों को किसान मंडियों में ले जाने के बजाय खेतो में ही छोड़ रहे हैं.

Advertisement

भारत में उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, दिल्ली, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल और बिहार में बड़े पैमाने पर सब्जियों की खेती होती है. दिल्ली की आजादपुर मंडी में प्याज नासिक से आता है तो हरी सब्जियां हरियाणा और पश्चिमी यूपी से पहुंचती हैं. ऐसे में लॉकडाउन के बीच उत्तर प्रदेश और हरियाणा सरकार ने जिस तरह से दिल्ली की सीमा पूरी तरह से सील किया है, इसकी वजह से सबसे बड़ा नुकसान दोनों राज्यों के सब्जी किसानों उठाना पड़ा रहा है.

कोरोना पर फुल कवरेज के लि‍ए यहां क्ल‍िक करें

हरियाणा बॉर्डर सील होने के बाद हरियाणा के सब्जी किसानों को लाखों का नुकसान उठाना पड़ रहा है. करनाल के किसान गुलजारी लाल का खीरा, करेला और तरबूज की खेती करते हैं और पिछले 20 से 25 दिनों में आठ लाख से ज्यादा का नुकसान हो चुका है. दिल्ली और चंडीगढ़ की सीमा सील होने के चलते उन्हें अपनी सब्जियों को लोकल मार्केट में बेचना पड़ रहा है. आम दिनों में 20 रुपये किलो बिकने वाले खीरे को 5 रुपये किलो बेचना पड़ रहा है तो करेला तीन से पांच रुपये किलो बिक रहा है. वो कहते हैं कि हर रोज खीरा दो से तीन टन और करेला 1 से दो टन निकल रहा है, लेकिन इतना बिक नहीं पा रहा है.

Advertisement

हरियाणा के किसान गांव में ही बेच रहे सब्जी

कुरक्षेत्र के पबनावा गांव के रहने वाले सब्जी किसान सुनील कुमार शिमला मिर्च, तोरई, खीरा और करेला की खेती करते हैं, पिछले एक महीने में 4 से 5 लाख का नुकसान उठा चुके हैं. दिल्ली की मंडियों में इनकी सब्जियां जाती थी, लेकिन फिलहाल सीमा सील होने के चलते नहीं जा पा रही है. इसकी वजह से उन्हें वहीं पर अपनी सब्जियों को बेचना पड़ रहा है. वो कहते हैं कि लोकल मंडिया भी नहीं लग रही है, जिसके वजह से औने-पौने दामों में सब्जियों को बेचना पड़ रहा है. वो कहते हैं कि शिमला मिर्चा 4 से 5 रुपये किलो जा रहा है. ऐसे ही तोरई को 10 से 15 रुपये किलो बेचना पड़ रहा है.

कोरोना कमांडोज़ का हौसला बढ़ाएं और उन्हें शुक्रिया कहें...

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के संयोजक वीएम सिंह कहते हैं कि भारत में हरी सब्जियों की खेती की हिसाब से सर्दियों के बाद मार्च, अप्रैल व मई का माह बहुत अच्छा समय माना जाता है. किसानों की आमदनी सब्जी की उपज पर ही निर्भर है. ये सब्जियां ऐसी हैं, जिन्हें किसान अपने घरों में रख नहीं सकता है और हरियाणा के शहरों और कस्बों में ऐसे बड़े व्यापारी नहीं हैं जो एक ट्रक या दो ट्रक माल खरीद सकें. ऐसे में किसानों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है.

Advertisement

वो कहते हैं कि ऐसी स्थिति में सरकार को चाहिए कि खुद किसानों के पास जाए उनकी सब्जियों और फसल को खरीदकर मंडियों तक पहुंचाए, लेकिन सरकार की इच्छा शक्ति होगी तब ही ऐसा कदम उठाएगी.

मुजफ्फरनगर के किसान गुलजार अहमद कहते हैं कि आम दिनों में हम दोनों मंडियों में ही अपने उत्पाद बेचते थे. लेकिन इनके अब बंद होने से हम सड़क किनारे खड़े होकर बेचना पड़ा रहा है. लॉकडाउन की वजह से हम मंडियों तक नहीं जा रहे है. पुलिस भी आकर मुआयना करती है और हमें अपनी फसल को बाहर नहीं ले जाने देते हैं. ऐसे में खरीदार स्थिति का फायदा उठा रहे हैं और हमें बहुत कम कीमत दे रहे हैं.

सब्जियों की लागत भी नहीं निकल रही

भारतीय किसान संगठन ठाकुर पूरण सिंह कहते हैं कि सब्जियों की फसल किसानों के लिए भी आमदनी का बहुत बढ़िया जरिया है लेकिन कोरोना और लॉकडाउन के चलते किसानों की कमर टूट गई है. शहरों में सब्जियां कई गुना महंगी बिक रही हैं, लेकिन गांवों में किसानों की लागत भी डूब गई. कई सब्जी उत्पादक किसानों ने खेत जुतवा दिए हैं, बाग कटवा दिए हैं.

पूरण सिंह कहते हैं कि आलू को छोड़कर कोई भी दूसरी ऐसी फसल नहीं है जिसे ज्यादा दिन तक खेतों में रोका जा सके या फिर किसी तरह से स्टोर किया जा सके. देश में फल, फूल व सब्जियों के लिए कोल्ड स्टोरेज की संख्या भी नाममात्र है. एक निश्चित समय के बाद किसान अगर सब्जियों को पौधे से नहीं तोड़ता है, तो वो पौधों को भारी नुकसान पहुंचाती है. ऐसी स्थिति में किसान या तो मजदूरी देखकर फसल की तुड़ाई करवाये या फिर खेतों में भगवान भरोसे फसल को छोड़ दे. करोना की वजह से सब्जियों की बेहद कम मांग होने के चलते अधिकांश फसल खेतों में सड़ रही है, इसलिए किसान सब्जियों की खड़ी फसलों की जुताई करवाना ज्यादा ठीक समझ रहे हैं.

Advertisement

मंडी में सब्जियां नहीं आ रही हैं

सब्जियों के थोक व्यापारी रफीक अहमद का कहना है कि हरियाणा और राजस्थान से आजादपुर सब्जी मंडी में रोजाना हजारों टन बैगन, गाजर, शिमला मिर्च, भिंडी, करेला, हरी मिर्च, ककड़ी, घिया और कद्दू आदि पहुंचता है.हरियाणा में इस समय आलू की पैदावार मंडियों में पहुंच रही थी, लेकिन दिल्ली सीमा सील होने से आलू खराब हो जाएगा. यही हालत प्याज की है, जो महाराष्ट्र से नहीं आ पा रही है. इसके अलावा मंडी में जिस तरह से कोरोना के मामले हैं उससे हम सभी में डर बैठ गया है.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement