चीनी सैनिकों की गलवान नदी घाटी में बड़ी तैनाती नदी में पानी के तेज बहाव की वजह से कई हिस्सों में बंटी हुई दिखाई देती है. इंडिया टुडे की ओर से रिव्यू की गई सैटेलाइट तस्वीरों से ये सामने आया है. प्लेनेट लैब्स सैटेलाइट की ओर से 25 जून को ली गई तस्वीरों से संकेत मिलता है कि चीन की ओर से बनाई गई नई सड़कें नदी के पानी में बह गई हैं. ये तस्वीरें गलवान एरिया में 15 जून की रात को हुए हिंसक टकराव के 10 दिन बाद खींची गई हैं.
तस्वीरें ये भी दिखाती हैं कि चीनी सैनिकों ने नदी की चौड़ाई को कृत्रिम ढंग से घटाकर जो जमीन हासिल की थी, वो भी पानी में डूब गई है. इसने पिछले हिस्से में चीनी सैनिकों की तैनाती को मध्य और फॉरवर्ड पोजीशन्स से काट दिया है. गलवान घाटी में अभी तक चीनी सेना यानि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के पीछे हटने के कोई संकेत नहीं हैं.
नदी के दक्षिणी किनारे पर PLA के बड़े टेंट उत्तरी किनारे पर खड़े वाहनों से कटे दिखते हैं क्योंकि दोनों किनारों को मिलाने वाला पुल पानी के तेज बहाव में बह गया है.
इंडिया टुडे की ओर से तस्वीरों का विश्लेषण संकेत देता है कि PLA सैनिकों की ओर से नदी की चौड़ाई को घटा कर तैयार की गई जमीन के कुछ हिस्से भी पानी के साथ बह गए हैं.
वादे के मुताबिक पीछे नहीं हटे चीनी
माल्दो में सीनियर कमांडर्स की दस घंटे तक चली बैठक में पीछे हटने पर आम सहमति बनने के बावजूद चीनियों ने गलवान घाटी में बड़ा बिल्ड अप बनाना जारी रखा. तस्वीरों से चीनी सैनिकों की संख्या या तैनाती में कटौती का संकेत नहीं मिलता. यहां वातावरण के रंग में छुपाए टेंट्स, वाहनों, सड़क बनाने वाली जेसीबी जैसी मशीनें की बड़ी मौजूदगी देखी जा सकती है.
पेट्रोल प्वाइंट 14 के पास का क्षेत्र ताजा तस्वीरों में 12 जून को ली गई तस्वीरों की तुलना में अधिक साफ नजर आता है. इन तस्वीरों में भी चीनी तिरपाल और पास के टेंट नजर आते हैं.
भारतीय पक्ष की तरफ भी बैक अप पोजीशन्स (यहां नहीं दिखाई गईं) को सैनिकों की अधिक तैनाती के साथ मजबूत किया गया है.
भारत ने शुक्रवार को चीन को LAC पर यथास्थिति को बदलने की किसी भी कोशिश के खिलाफ आगाह किया था. चीन में भारत के राजदूत विक्रम मिस्री ने कहा है कि गलवान घाटी पर सम्प्रभुता को लेकर चीन का हालिया दावा पूरी तरह ‘असमर्थनीय’ है.
अंकित कुमार