अटल बिहारी वाजपेयी देश के करोड़ों लोगों के चहेते रहे हैं. वे देश के महानतम प्रधानमंत्रियों में से रहे और महान राजनेता माने जाते थे. लेकिन अपनी तमाम लोकप्रियता और आसपास जमा भीड़ के बावजूद वह अकेलापन महसूस करते थे. साल 2001 में आजतक को दिए एक खास इंटरव्यू में उन्होंने खुद यह बात कही थी.
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साल 2001 में हिमाचल प्रदेश के मनाली में खूबसूरत वादियों के बीच अटल बिहारी ने आजतक को यह इंटरव्यू दिया था. मनाली वाजपेयी की पसंदीदा जगह थी. वे सक्रियता के दौर में हर साल वहां गर्मी की छुट्टियों में जाया करते थे.
आजतक ने पहाड़ों पर समय बिताने और तनहाई और जीवन में ऊंचाई के बारे में जब सवाल किया तो अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) ने कहा, 'पहाड़ मन में दो तरह की भावना पैदा करते हैं, एक तो ऊंचाई की और दूसरे अकेलेपन की. जितना अकेलापन पहाड़ की चोटी पर होता है, उसे मनुष्य सहन नहीं कर सकता. इसलिए एवरेस्ट तक पहुंचने के बाद लोग जल्दी से जल्दी उतरना चाहते हैं.'
पूर्व पीएम ने कहा, 'पहाड़ दृढ़ता का भी संकेत देते हैं. चट्टानी मजबूती शब्द का इस्तेमाल होता है. चट्टान की तरह अडिग खड़े रहें. पहाड़ चट्टान का ही बड़ा रूप हैं.'
अगर पहाड़ से तुलना की जाए तो आप भी सबसे ऊंचे पद पर है. वहां पहुंच कर आपको कैसा लगता है? इस सवाल पर वाजपेयी ने कहा, 'जो बात पहाड़ पर लागू है, वह इंसान पर भी लागू होती है. पहाड़ जितना ऊंचा होता जाता है, उतना ही अकेला होता जाता है. मनुष्य के जीवन में भी ऐसा ही होता है. '
क्या आप इस ऊंचाई पर अकेलापन महसूस करते हैं, आजतक के इस सवाल पर वाजपेयी ने कहा, 'हम तो भीड़ से घिरे हैं, लेकिन कभी-कभी भीड़ में भी अकेलापन हो जाता है.'
यहां देखें पूरा इंटरव्यू
एक स्कूल टीचर के घर में पैदा हुए वाजपेयी के लिए जीवन का शुरुआती सफर आसान नहीं था. 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर के एक निम्न मध्यमवर्ग परिवार में जन्मे वाजपेयी की प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा ग्वालियर के ही विक्टोरिया ( अब लक्ष्मीबाई ) कॉलेज और कानपुर के डीएवी कॉलेज में हुई थी. उन्होंने राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर किया और पत्रकारिता में अपना करियर शुरू किया था.
दिनेश अग्रहरि