ममता के खिलाफ कोलकाता में सड़कों पर उतरे मुस्लिम उलेमा, इमामों का भत्ता बढ़ाने की मांग

इमामों का मासिक भत्ता तत्काल बढ़ाने की मांग को लेकर कोलकाता में बुधवार को विरोध प्रदर्शन किया गया. सैकड़ों उलेमा और मुस्लिम युवाओं ने मध्य कोलकाता में एकत्र होकर ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ नारे लगाए.

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प्रतीकात्मक तस्वीर (इंडिया टुडे आर्काइव) प्रतीकात्मक तस्वीर (इंडिया टुडे आर्काइव)

सना जैदी / खुशदीप सहगल / इंद्रजीत कुंडू

  • कोलकाता,
  • 04 अक्टूबर 2018,
  • अपडेटेड 3:51 PM IST

पश्चिम बंगाल के मुस्लिम समूहों ने इमामों का मासिक भत्ता तत्काल बढ़ाने की मांग को लेकर कोलकाता में बुधवार को विरोध प्रदर्शन किया. दरअसल, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कुछ हफ्ते पहले दुर्गा पूजा आयोजकों के लिए 28 करोड़ रुपये के अनुदान की घोषणा की थी. इसी को देखते हुए मुस्लिम समूहों ने इमामों के वेतन बढ़ाने की भी मांग की.

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ऑल बंगाल माइनोरिटी यूथ फेडेरेशन (ABMYF) की अगुआई में सैकड़ों उलेमा और मुस्लिम युवाओं ने मध्य कोलकाता में एकत्र होकर ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ नारे लगाए. उन्होंने मुख्यमंत्री पर मुस्लिम समुदाय से किए वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया. साथ ही आगाह किया कि ये विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत है और इन्हें आगे भी जारी रखा जाएगा.  

ABMYF  के महासचिव मो. कमरूज्जमां ने इंडिया टुडे को बताया, इमामों का भत्ता पहले बढ़ाया जाना चाहिए, उसके बाद सरकार को दुर्गा पूजा आयोजकों को अनुदान देने का सोचना चाहिए. ममता बनर्जी ने अपनी राजनीति के लिए BJP की लाइन ले ली है.

ABMYF की मांग है कि इमामों का भत्ता दुगना किया जाना चाहिए. फिलहाल करीब 56,000 इमामों और मुअज्जिनों को क्रमश: 2500 रुपये और 1000 रुपये भत्ता मिलता है. ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री के तौर पर अपने पहले कार्यकाल में ये भत्ता देने की घोषणा की थी.

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कमरूज्जमां ने कहा, ‘हम किसी भी धार्मिक मकसद के लिए सरकारी पैसे दिए जाने का समर्थन नहीं करते. ममता बनर्जी वक्फ बोर्ड के फंड से इमामों को भुगतान कर रही हैं, ये सरकारी पैसा नहीं है. हालांकि तृणमूल कांग्रेस (TMC) इससे पूरा राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है.’

किसी वक्त TMC समर्थक रह चुके कमरूज्जमां ने कहा, ‘बंगाल की 29%  मुस्लिम आबादी पूरी तरह वंचित है. हमें ममता बनर्जी से बहुत उम्मीदें थीं लेकिन हम निराश है. उन्होंने हमें धोखा दिया. उन्होंने हमारा सिर्फ वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया.’

पश्चिम बंगाल की फुरफुरा शरीफ से जुड़े रसूखदार उलेमा तोहा सिद्दीकी ने 2011 चुनाव में ममता बनर्जी का पूरा समर्थन किया था. अब वो ममता बनर्जी को आगाह करते हुए कहते हैं कि मुस्लिम वोटों को अपनी जागीर की तरह ना समझें.

सिद्दीकी ने कहा, ‘हमने कभी भी ममता बनर्जी के हवाले से बात नहीं की है, ना ही कभी करेंगे. हम सिर्फ उन्हीं के समर्थन के लिए बोलेंगे जो सच के लिए खड़े हैं. बंगाल में 4 करोड़ मुस्लिम हैं. उन्हें ये नहीं भूलना चाहिए कि हम कभी भी धर्मनिरपेक्ष विकल्प के तौर पर राज्य में कांग्रेस या सीपीआईएम को उनकी कब्रों से निकाल कर उनमें दोबारा जान फूंक सकते हैं.’

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बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने इस घटनाक्रम पर कहा है कि ममता बनर्जी सिर्फ तुष्टीकरण की राजनीति पर फोकस रखती हैं. घोष ने इंडिया टुडे से कहा, उन्होंने मुस्लिमों को खुश करने के लिए भत्ता (इमामों को) देना शुरू किया. अब वो हिन्दुओं को खुश करने के लिए पूजा कमेटियों को अनुदान दे रही है जबकि इसके लिए किसी ने उनसे नहीं कहा था. वो लगातार धर्म के नाम पर लोगों को बांट रही हैं. देश की धर्मनिरपेक्षता का उल्लंघन कर वे हर किसी को खुश करने की कोशिश कर रही है. तुष्टिकरण की इस राजनीति का अंत होना चाहिए.’

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