राजस्थान में बेरोजगारी की मार अब इंसान ही नहीं, भगवान भी भुगत रहे हैं. राजस्थान में बेरोजगारों की लंबी लिस्ट है लेकिन अब भगवान को भी सरकार भूलती नजर आ रही है. पिछले 7 साल से सरकारी मंदिर पुजारी की बाट जोह रहे हैं, लेकिन 2014 में परीक्षा लेकर सरकार रिजल्ट निकालना भूल गई. नतीजा यह हुआ कि रिजल्ट के इंतजार में बेरोजगार पुजारी ओवर एज हो गए और सरकारी मंदिरों में भगवान को भोग-आरती लगाने वाले लोग नहीं मिल रहे हैं. यही वजह है कि कई मंदिर बंद पड़े हैं.
पिछली बार 2013 में मुख्यमंत्री रहते हुए अशोक गहलोत ने विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राजस्थान के सरकारी मंदिरों के पुजारियों के लिए 65 पदों पर भर्ती निकाली थी, जिसमें 8 हजार 792 परिक्षार्थी शामिल हुए थे. राजस्थान सरकार के देवस्थान विभाग ने 25 साल बाद यह भर्ती निकाली थी. इस बीच वसुंधरा सरकार आ गई और 2014 में परीक्षा भी हो गई. लेकिन 2018 में फिर से मुख्यमंत्री बने अशोक गहलोत के ढाई साल से उपर हो गए पर उसके परिणाम नहीं निकले.
जयपुर के महेन्द्र मिश्र 2013 में जब 33 साल के थे, तब राजस्थान में पुजारी और मंदिर प्रबंधक बनने की परीक्षा दिए थे. अब 41 साल के हो गए हैं मगर आज भी आठ साल पहले की हुई तैयारियों की डायरी लेकर बैठे हैं. आठ साल से परीक्षा का परिणाम निकालने के इंतजार में लोगों के भाग्य बताने का काम शुरू कर दिया है लेकिन ज्योतिष में पीएचडी महेन्द्र मिश्र यह पता नहीं लगा पाए कि परिणाम कब निकलेगा.
पंजाब के बाद राजस्थान की बारी! जयपुर पहुंचे अजय माकन और केसी वेणुगोपाल
एडमिट कार्ड लेकर घूम रहे अभ्यर्थी
अजमेर के विजय नगर के महावीर शर्मा तो आठ वर्षों से परीक्षा का एडमिट कार्ड लेकर साथ ही घूमते हैं. मंदिर में पूजा पाठ का काम करते हैं लेकिन सरकारी पुजारी का काम करने का सपना अभी खत्म नहीं हुआ है.
राजस्थान सरकार के पास 2500 से ज्यादा मंदिर
आजादी के बाद राजस्थान सरकार के पास ढाई हजार से ज्यादा मंदिर आए हैं, जो राजस्थान के देवस्थान विभाग के पास हैं. इनमें से 20 से ज्यादा मंदिरों में पूजा पाठ करने वाले पुजारी नहीं है. दो-दो, तीन-तीन पुजारी मिलकर एक मंदिर संभालते हैं. जयपुर में ऐसे कई सरकारी मंदिरों को हमने जाकर देखा जहां पुजारी के अभाव में ताले लटके हैं.
पुजारी न होने से बंद हैं कई मंदिर
जयपुर के मशहूर इकलौते मंदिर कल्कि मंदिर, चांद बिहारी जी मंदिर, राधिका मंदिर जैसे बड़े मंदिरों में भी एक पुजारी दो-दो मंदिरों को संभाला है. मंदिरों में नियम के अनुसार भोग से लेकर सभी आरती का वक्त तय होता है. लेकिन पुजारी नहीं होने की वजह से भगवान का भोग भी समय पर नहीं लग पाता है. आलम यह है कि कई मंदिरों में पुजारी नहीं हैं, इसलिए लोग भगवान के दर्शन तक नहीं कर पा रहे हैं.
शरत कुमार