संयुक्त किसान मोर्चा ने SC की बनाई कमेटी के साथ बैठक से किया इनकार, कहा- कोर्ट का दखल मंजूर नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने खनौरी और शंभू बॉर्डर पर चल रहे किसान विरोध प्रदर्शनों को ध्यान में रखते हुए हाई पावर्ड कमेटी का गठन किया था. एसकेएम इन विरोध प्रदर्शनों का हिस्सा नहीं है और इनका नेतृत्व किसान एसकेएम (गैर-राजनीतिक) और किसान मंसूर मोर्चा कर रहे हैं. 

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किसानों के प्रदर्शन की तस्वीर (फाइल फोटो) किसानों के प्रदर्शन की तस्वीर (फाइल फोटो)

असीम बस्सी

  • चंडीगढ़,
  • 01 जनवरी 2025,
  • अपडेटेड 9:10 PM IST

संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने शंभू और खनौरी बॉर्डर पर चल रहे प्रदर्शनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति से मिलने में असमर्थता व्यक्त की है. एसकेएम का कहना है कि पहली बात तो यह कि वह इन प्रदर्शनों का हिस्सा नहीं है और दूसरी बात यह कि एसकेएम कोर्ट के हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करता है, क्योंकि किसान केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए नीतिगत मुद्दों से लड़ रहे हैं.

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बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की हाई पावर्ड कमेटी ने किसानों के मुद्दों पर 3 जनवरी को बैठक के लिए निमंत्रण दिया था. अब कुछ दिन शेष रह गए हैं, ऐसे में एसकेएम ने अपनी असमर्थता जाहिर कर दी है. 

विरोध प्रदर्शनों में शामिल नहीं एसकेएम

सुप्रीम कोर्ट ने खनौरी और शंभू बॉर्डर पर चल रहे किसान विरोध प्रदर्शनों को ध्यान में रखते हुए हाई पावर्ड कमेटी का गठन किया था. एसकेएम इन विरोध प्रदर्शनों का हिस्सा नहीं है और इनका नेतृत्व किसान एसकेएम (गैर-राजनीतिक) और किसान मंसूर मोर्चा कर रहे हैं. 

37 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हैं जगजीत सिंह डल्लेवाल

शंभू बॉर्डर पर किसान नेता सरवण सिंह पंधेर डटे हुए हैं. वहीं खनौरी बॉर्डर पर किसान आंदोलन का नेतृत्व जगजीत सिंह डल्लेवाल कर रहे हैं, जो 37 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हैं. हरियाणा सरकार द्वारा किसानों को दिल्ली जाने से रोके जाने के बाद वे दोनों सीमाओं पर बैठे हैं.

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पिछले महीने जब किसानों ने तीन बार दिल्ली की ओर मार्च करने की कोशिश की तो हरियाणा पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए पानी की बौछारें और आंसू गैस के गोले दागे, जिससे कई किसान घायल हो गए. इसके बाद से केंद्र सरकार और किसानों के बीच गतिरोध की स्थिति बनी हुई है.

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