पंजाबः अंधविश्वास में फंसी बच्ची को शिक्षक ने दी नई जिंदगी

अस्पताल में बिस्तर पर पड़ी यह मासूम बच्ची शायद आज ज़िंदा न होती अगर दो दिन पूर्व इसे किसी तांत्रिक के चंगुल से छुड़ा कर अस्पताल न पहुंचाया जाता.

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प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर

सतेंदर चौहान / वरुण शैलेश

  • अमृतसर,
  • 19 मार्च 2018,
  • अपडेटेड 6:24 PM IST

पंजाब में अमृतसर के एक परिवार ने तंत्र-मंत्र के चक्‍कर में अपनी बच्ची की जिंदगी खतरे में डाल दी. नौ साल की इस बच्‍ची का इलाज कराने की बजाय परिजन तांत्रिक से झाड़-फूंक कराते रहे. इससे उसकी जान खतरे में पड़ गई और उसके शरीर का खून सूख गया. बच्‍ची के स्‍कूल के उप-प्रधानाचार्य को इस बारे में पता चला तो वह उसे अस्‍पताल लेकर गए. डॉक्‍टर उसकी हालत देख कर सन्‍न रह गए.

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इसके बाद उप प्रधानाचार्य ने बच्‍ची को तत्काल अमृतसर के सिविल अस्पताल में दाखिल कराया. यहां चिकित्सकीय जांच के दौरान मालूम हुआ कि उसके शरीर में खून में महज दो ग्राम हीमोग्लोबिन बचा है और प्लेट्लेट्स भी निचले स्तर पर पहुंच गए हैं. डॉक्‍टरों ने बताया कि उसकी जान जोखिम में है.

अस्पताल में बिस्तर पर पड़ी यह मासूम बच्ची शायद आज ज़िंदा न होती अगर दो दिन पूर्व इसे किसी तांत्रिक के चंगुल से छुड़ा कर अस्पताल न पहुंचाया जाता. 9 साल की इस बच्ची का नाम अनमोल है. जिसकी अनमोल ज़िंदगी कंजक पूजन अर्थात नवरात्रि से पहले ही ख़त्म हो सकती थी, लेकिन इस बच्ची के स्कूल के प्रिंसिपल और अस्पताल के डॉक्टरों ने इसे बचाकर सच्चा कंजक पूजन किया है.

 

अंधविश्वास में फंसे परिजन

दरअसल आधुनिक समाज में भी लोग तंत्र-मंत्र और अंधविश्‍वास के चक्‍कर में फंस हुए हैं. ऐस में वे अपनों के जीवन को संकट में डाल देते हैं. अनमोल के अनपढ़ और गरीब मां बाप भी झाड़ फूंक के और बुरी आत्मा के साये के चक्कर में पड़ कर अपनी बच्ची की जान गंवाने वाले थे. तभी जब दो तीन महीने अनमोल स्कूल नहीं आई तो स्कूल के उप प्रधानाचार्य अमन खन्ना अनमोल के घर गए तो उन्हें इस अमानवीय कृत्य का पता चला और उन्होंने तुरंत उसे अस्पताल में दाखिल कराया.

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अनमोल नाम की इस बच्‍ची को बुखार रहता था. अज्ञानता व अशिक्षा की वजह से अनमोल के मां-बाप उसको डॉक्‍टरों को दिखाने के बदले एक तांत्रिक से झाड़ फूंक कराने लगे. बच्ची के साथ एक महीना तक तांत्रिक ने अपनी तथाकथित साधना का इस्तेमाल किया. धीरे-धीरे बच्ची कमजोर होने लगी और सूख कर कांटा हो गई.

अमृतसर सिविल अस्पताल के डॉ. संदीप अग्रवाल ने बताया कि अनमोल के शरीर में खून में महज दो ग्राम हीमोग्लोबिन बचा था और प्लेट्लेट्स भी निचले स्तर पर पहुंच गए थे. तुरंत o +tiv खून चाहिए था और सौभाग्य वश उप प्रधानाचार्य अमन खन्ना का भी यही ब्लड ग्रुप था. उन्होंने अच्छे शिक्षक का भी फ़र्ज़ निभाया और तुरंत अपना खून देकर बच्ची की जान बचाई.

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