राज्यपाल ने मनाया बंगाल का स्थापना दिवस, ममता बोलीं- ये गवर्नर का एकतरफा फैसला

पश्चिम बंगाल में अब राज्य स्थापना दिवस मनाने को लेकर राजनीति शुरू हो गई है. दरअसल राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने 20 जून को राजभवन में राज्य स्थापना दिवस का कार्यक्रम आयोजित किया था. इस पर सीएम ममता बनर्जी ने आपत्ति दर्ज कराई थी, साथ ही उन्हें यह कार्यक्रम न करने की सलाह भी दी थी लेकिन राज्यपाल ने उनकी बातों को अनसुना कर दिया.

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ममता बनर्जी के विरोध के बाद भी राज्यपाल ने मनाया राज्य स्थापना दिवस (फाइल फोटो) ममता बनर्जी के विरोध के बाद भी राज्यपाल ने मनाया राज्य स्थापना दिवस (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 20 जून 2023,
  • अपडेटेड 12:59 PM IST

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने मंगलवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की आपत्ति के बावजूद राजभवन में राज्य का स्थापना दिवस मना लिया.  इस कार्यक्रम में राज्य सरकार का कोई भी प्रतिनिधि मौजूद नहीं था. न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक कार्यक्रम में बोस ने हिंसा के लिए 'जीरो टॉलरेंस' पर बात की और आम लोगों के स्वतंत्र रूप से मतदान करने के अधिकार पर जोर दिया. राज्यपाल ने कहा, 'मैं लोगों की भलाई और कल्याण के लिए समर्पित हूं. बंगाल अपार क्षमता और प्रतिभाओं से भरा हुआ है. 

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राज्यपाल ने स्वामी विवेकानंद का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य के युवाओं को राज्य के गौरव को फिर से स्थापित करने के लिए आगे आना होगा. इस अवसर पर राजभवन में सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया.

वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक दिन पहले सोमवार रात राज्यपाल को पत्र लिखकर स्थापना दिवस को मनाने के उनके फैसले को एकतरफा करार दिया है. ममता ने कहा कि यह कार्यक्रम बंगाल के करोड़ों लोगों की कड़वी यादों को ताजा कर देगा. यह अवांछित ताकतों को पुनर्जीवित कर देगा. 

20 जून को नहीं हुई थी बंगाल की स्थापना

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक सीएम ममता ने लिखा- विभाजन का दर्द और सदमा ऐसा था कि राज्य के लोगों ने भारत की आजादी के बाद से कभी भी किसी भी दिन को स्थापना दिवस के रूप में नहीं मनाया. मुख्यमंत्री ने लिखा,‘मैं यह जानकर स्तब्ध और हैरान हूं कि आपने 20 जून को कोलकाता के राजभवन में एक कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया है, जिसे आपने विशेष रूप से ‘पश्चिम बंगाल राज्य स्थापना दिवस’ के रूप में वर्णित करने के लिए चुना है.’

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मुख्यमंत्री ने लिखा कि राज्य की स्थापना किसी विशेष दिन पर नहीं हुई थी, कम से कम 20 जून को तो बिल्कुल नहीं. उन्होंने आगे कहा कि 20 जून 1947 को बंगाल विधानसभा में विधायकों के अलग-अलग सेटों की दो बैठकें हुई थीं. बंगाल को भारत का हिस्सा बनाने वालों में से एक ने बहुमत से प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया.दूसरा उन क्षेत्रों के विधायकों का था जो अंततः पूर्वी पाकिस्तान बन गए. इस विभाजन के बाद के दंगों में दोनों पक्षों से लगभग 25 लाख लोग विस्थापित हुए और करोड़ों रुपये की संपत्ति जल गई. 

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक बनर्जी ने कहा कि इससे पहले दिन में टेलीफोन पर चर्चा के दौरान बोस ने स्वीकार किया था कि राज्य के स्थापना दिवस के रूप में एक दिन घोषित करने का एकतरफा और बिना-परामर्श के निर्णय ठीक नहीं है.

राष्ट्रपति मुर्मू ने भेजा बधाई संदेश

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी पश्चिम बंगाल के लोगों को स्थापना दिवस की बधाई दी. उन्होंने अपने बधाई संदेश में कहा कि पश्चिम बंगाल के प्रतिभाशाली लोग हमारे राष्ट्र की प्रगति और समृद्धि में योगदान देने वाले नवाचार और आर्थिक जीवंतता की एक और लहर ला सकते हैं.

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