अपने बयानों के कारण चर्चा में रहने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य ने आखिरकार समाजवादी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया. इससे पहले उन्होंने पार्टी महासचिव के पद से भी इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने विधान परिषद की सदस्यता भी छोड़ दी है. स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपना इस्तीफा सपा प्रमुख अखिलेश यादव को भेज दिया है.
मौर्य ने कहा,'आपके नेतृत्व में सौहार्दपूर्ण वातावरण में कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ. लेकिन 12 फरवरी 2024 को हुई बातचीत और 13 फरवरी को प्रेषित पत्र पर किसी भी प्रकार की वार्ता की पहल न करने के कारण में समाजवादी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी त्याग-पत्र दे रहा हूं.'
22 फरवरी को बताऊंगा, कहां जाना है: स्वामी प्रसाद
सपा से इस्तीफे के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा, अखिलेश यादव जी से मेरा वैचारिक मतभेद है. मनभेद नहीं है. अखिलेश यादव समाजवादी विचारधारा से विपरीत जा रहे हैं. 22 फरवरी को अगला फैसला लूंगा कि कहां जाना है.
सब फायदे के लिए भाग रहे: अखिलेश
एक दिन पहले ही अखिलेश ने मौर्य के महासचिव पद से इस्तीफा देने पर प्रतिक्रिया व्यक्त की थी. उन्होंने कहा था,'किस व्यक्ति के अंदर क्या चल रहा है, यह बात कोई नहीं जानता है. यहां हर कोई सिर्फ फायदे के लिए भाग रहा है.' अखिलेश के इस बयान पर स्वामी प्रसाद मौर्य ने भी प्रतिक्रिया दी थी. उन्होंने कहा था,'वे (अखिलेश) केंद्र या राज्य में पावर में नहीं हैं. वह कुछ देने की स्थिति में भी नहीं हैं. अब तक उन्होंने मुझे जो कुछ भी दिया है, मैं सबकुछ उन्हें वापस करूंगा. मेरे लिए विचारधारा ज्यादा मायने रखती है, पद नहीं. सभी वर्गों के अधिकार और उनका कल्याण मेरी प्राथमिकता है. अगर इन पर हमला किया जाएगा तो मैं आवाज जरूर उठाऊंगा.'
इस्तीफे को लेकर बात तक नहीं की: मौर्य
महासचिव पद से इस्तीफा देने के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा था कि उन्होंने 13 तारीख को अखिलेश यादव के नाम इस्तीफे का पत्र भेजा था. लेकिन अखिलेश ने बात करना तक मुनासिब नहीं समझा. इसलिए अब वह कदम आगे बढ़ा रहे हैं.
अब कार्यकर्ता ही करेंगे फैसला
स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा था,'22 फरवरी को दिल्ली में कार्यकर्ताओं का समागम होगा. उसी दिन फैसला सुनाया जाएगा. संगठन में ही भेदभाव है, एक राष्ट्रीय महासचिव का हर बयान निजी हो जाता है. पद में ही भेदभाव है. मैं भेदभाव के खिलाफ ही लड़ाई लड़ता हूं. ऐसे पद पर रहने का औचित्य क्या है? अब कार्यकर्ता तय करेंगे कि उन्हें क्या करना है.'
समर्थ श्रीवास्तव