कर्नाटक चुनाव: 15 मुस्लिम बहुल सीटों पर ओवैसी ने ठोकी ताल, उतार सकते उम्मीदवार

कर्नाटक चुनाव में असुदद्दीन ओवैसी की पार्टी 13 से 15 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार सकती है. उत्तर कर्नाटक की उन सीटों को फोकस में रखा जा रहा है जहां पर मुस्लिम मतदाता अच्छी संख्या में है. राज्य की करीब 60 सीटें ऐसी हैं जहां पर मुस्लिम वोटबैंक मायने रखता है.

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AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 दिसंबर 2022,
  • अपडेटेड 5:46 AM IST

अगले साल होने जा रहे कर्नाटक चुनाव को लेकर जमीन पर सियासी तापमान अभी से बढ़ने लगा है. कांग्रेस और बीजेपी तो सीधे मुकाबले में है ही, साथ में मुस्लिम सीटों पर AIMIM भी अपनी दावेदारी पेश करने की तैयारी में है. इस बार विधानसभा चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी 13 से 15 उन सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार सकती है जहां पर मुस्लिम मतदाता अच्छी संख्या में है. बड़ी बात ये है कि ओवैसी का सारा फोकस उत्तर कर्नाटक में है और वे इसी इलाके में अपनी पार्टी के लिए उम्मीद देख रहे हैं.

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कर्नाटक में ओवैसी कितने मजबूत?

बताया जा रहा है कि AIMIM बीजापुर शहर, हुबली-धारवाड़ (पश्चिम), हुबली-धारवाड़ (मध्य), हुबली-धारवाड़ (पूर्व), बेलगाम (उत्तर), शिगगांव में अपने उम्मीदवार उतार सकती है. यहां ये समझना जरूरी है कि पिछले साल हुए सिविक चुनाव में ओवैसी की पार्टी ने कुछ सफलता हासिल की थी. हुबली-धारवाड़ और विजयपुरा सीटों पर जीत दर्ज कर ली गई थी. ऐसे में उन्हीं नतीजों को देखते हुए ओवैसी मान रहे हैं कि उत्तर कर्नाटक में मुस्लिम मतदाता के दम पर उनका एक अलग वोटबैंक तैयार हो सकता है. खबर है कि ओवैसी खुद महीने के अंत में कर्नाटक आने वाले हैं. उस दौरे के दौरान उनकी तरफ से चुनावी रणनीति पर भी मंथन किया जाएगा और उम्मीदवारों के नामों पर भी चर्चा संभव है.

कितने मुसलमान, चुनाव में क्या भूमिका?

जानकारी के लिए बता दें कि साल 2018 में AIMIM ने कर्नाटक में चुनाव नहीं लड़ा था. उसकी तरफ से जेडीएस का समर्थन कर दिया गया था. लेकिन इस बार जमीन पर माहौल बदला है. ऐसे में AIMIM चीफ मानकर चल रहे हैं कि उन्हें इस बदले माहौल का फायदा मिल सकता है. वैसे गुजरात चुनाव में भी ओवैसी की पार्टी इसी उम्मीद के साथ उतरी थी. लेकिन पार्टी का एक भी उम्मीदवार जीत दर्ज नहीं कर पाया. अब कर्नाटक में AIMIM फिर अपनी किस्मत आजमाने जा रही है. उसकी नजर राज्य के 6.1 करोड़ मुसलमान यानी कि 12 फीसदी वोटों पर है. कर्नाटक में 60 ऐसी सीटें हैं जहां पर मुस्लिम वोटर निर्णायक भूमिका निभाता है.

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