हैदराबाद का माहौल एकदम चुनावी हो चुका है. यहां ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन यानी GHMC के चुनाव हैं. इन चुनावों को आमतौर पर लोकल चुनाव कहा जाता है. इन लोकल चुनावों को बीजेपी वोकल होकर लड़ रही है. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि बीजेपी, GHMC जैसे चुनाव पर क्यों इतना जोर दे रही है. तेलंगाना में भारतीय जनता पार्टी के पास 119 में से केवल दो विधायक हैं. वहीं कुल 17 लोकसभा सीटों में से केवल 4 सांसद हैं. इसके बावजूद बीजेपी ने हैदराबाद के नगर निगम चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है.
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस कहते हैं कि नगर निगम के चुनावों को लोकल चुनाव इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये चुनाव अकसर स्थानीय मुद्दों पर लड़े जाते हैं. कायदे से तो GHMC के चुनाव में इन्हीं लोकल मुद्दों की बात होनी चाहिए थी लेकिन ये पहला मौका है जब इस बार मुसलमान, सर्जिकल स्ट्राइक, बांग्लादेश और पाकिस्तान के बारे में बात हो रही है.
वहीं बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा कहते हैं कि हर चुनाव, चुनाव होता है. इसे सीरियसली लेना चाहिए. हर चुनाव को महत्व देना, विकास के मुद्दे पर लड़ना, ये स्वयं नरेंद्र मोदी ने कहा है. पीएम मोदी ने बिहार में धन्यवाद रैली में कहा कि विकासवाद की जीत होगी. हैदराबाद में विकास नहीं चाहिए क्या?
ये बीजेपी के विकासवाद का मॉडल है, जिसमें वो लोकल चुनाव को भी नेशनल लेवल पर लड़ती है. इस बार GHMC के चुनाव हैदराबाद शहर के विकास के साथ-साथ, तेलंगाना में बीजेपी के विकास की दिशा भी तय करेंगे.
हैदराबाद के लोकल चुनाव की पूरे देश में चर्चा
यही वजह है कि हैदराबाद के इस लोकल चुनाव की देशभर में चर्चा हो रही है. इसकी चर्चा आगे भी जारी रहेगी, लेकिन पहले हैदराबाद नगर निगम और उसके चुनाव से जुड़ी कुछ जरूरी जानकारियां जान लेते हैं. GHMC का सालाना बजट लगभग साढ़े पांच हजार करोड़ रुपये का है.
GHMC के अंतर्गत लगभग 82 लाख की आबादी आती है. GHMC चुनाव में 150 पार्षद चुने जाते हैं. इस बार GHMC के चुनाव में 1122 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिसके लिए एक दिसंबर को मतदान होगा और चार दिसंबर को नतीजों की घोषणा होगी.
GHMC एक लोकल बॉडी है, जिसके चुनाव भी लोकल स्तर पर लड़े जाते हैं. लेकिन इस बार बीजेपी ने इन लोकल चुनावों का स्तर बढ़ा दिया है और अपनी राष्ट्रीय ताकत झोंक दी है. ऐसे में सबके मन में सवाल है कि आखिर तेलंगाना के एक लोकल से चुनाव को बीजेपी इतना वोकल होकर क्यों लड़ रही है.
हैदराबाद के लोकल चुनाव जीतने के मिशन पर बीजेपी निकली तो पूरे जोर-शोर के साथ है लेकिन उसकी कमजोरी ये है कि फिलहाल तेलंगाना में उनके दो विधायक और 4 सांसद ही हैं. जाहिर है चुनाव चाहे लोकल हों लेकिन अपने राष्ट्रीय नेताओं से ही प्रचार करवाना बीजेपी की मजबूरी भी है और शायद सबसे बड़ी मजबूती भी.
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