संसद में गतिरोध बरकरार... अमित शाह और स्पीकर ओम बिरला की बैठक बेनतीजा, इन 4 मुद्दों पर फंसा पेंच!

गृहमंत्री अमित शाह और लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ओम बिरला के बीच सोमवार को एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, लेकिन सूत्रों के मुताबिक यह मुलाकात भी सदन में मची रार को शांत करने में विफल रही.

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सरकार और विपक्ष के बीच चार प्रमुख बिंदुओं पर सहमति नहीं बन पाई है (File Photo- ITG) सरकार और विपक्ष के बीच चार प्रमुख बिंदुओं पर सहमति नहीं बन पाई है (File Photo- ITG)

हिमांशु मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 09 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:16 PM IST

संसद के भीतर सरकार और विपक्ष के बीच चल रहा गतिरोध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. सोमवार को गृहमंत्री अमित शाह और लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ओम बिरला के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, लेकिन सूत्रों के मुताबिक यह मुलाकात भी सदन में मची रार को शांत करने में विफल रही. सरकार और विपक्ष के बीच चार प्रमुख बिंदुओं पर सहमति नहीं बन पाई है, जिसके कारण कार्यवाही सुचारू रूप से चलने की संभावना कम नजर आ रही है.

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सरकारी सूत्रों के अनुसार, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जो चार मुख्य मांगें और मुद्दे उठाए हैं, उन पर सरकार का रुख बेहद सख्त है. दरअसल, विपक्ष ने आरोप लगाया है कि उनकी महिला सांसदों के साथ सदन में दुर्व्यवहार हुआ. पलटवार करते हुए सरकारी सूत्रों का कहना है कि वीडियो फुटेज से साफ है कि महिला सांसद ही प्रधानमंत्री के आसन की ओर आक्रामक रूप से बढ़ रही थीं.

दूसरा बड़ा विवाद विपक्ष के आठ सांसदों के निलंबन को लेकर है. विपक्ष चाहता है कि आठ सांसदों का निलंबन तुरंत रद्द किया जाए. हालांकि, सरकार का कहना है कि निलंबन वापसी पर विचार तभी होगा जब सदन का वर्तमान गतिरोध पूरी तरह समाप्त हो जाएगा. सरकार का मानना है कि लगातार हंगामे और व्यवधान के चलते सख्त कार्रवाई करनी पड़ी थी.

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तीसरा मुद्दा बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे को लोकसभा में बोलने का अवसर न मिलने से जुड़ा है. सरकार का कहना है कि दुबे ने सदन में मुद्दा उठाने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें चेयर से अनुमति नहीं मिल सकी. इसके बाद उनके भाषण के कुछ हिस्सों को कार्यवाही से हटा दिया गया. इस मामले को लेकर भी राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है.

चौथा और अहम मुद्दा राहुल गांधी को सदन में बोलने का मौका न मिलने का है. सरकार का कहना है कि सदन में बोलने के लिए चेयर की अनुमति जरूरी होती है और अनुमति मिलने पर राहुल गांधी अपनी बात रख सकते हैं. हालांकि सरकार के भीतर यह आशंका जताई जा रही है कि अगर उन्हें मौका दिया गया तो वे वही मुद्दे दोबारा उठा सकते हैं, जिससे सदन में फिर से टकराव की स्थिति बन सकती है.

विपक्ष की फूट और अविश्वास प्रस्ताव की चर्चा

इसी बीच, लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को लेकर भी विपक्ष में एकराय नहीं बन पाई है. सरकारी सूत्रों के अनुसार तृणमूल कांग्रेस (TMC) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) इस प्रस्ताव के समर्थन में नहीं हैं. वहीं विपक्ष की कई पार्टियां चाहती हैं कि संसद की कार्यवाही सुचारु रूप से चले, ताकि जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हो सके.

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फिलहाल, संसद का गतिरोध खत्म करने के लिए दोनों पक्षों के बीच बातचीत के प्रयास जारी हैं, लेकिन चारों मुद्दों पर सहमति न बनने से स्थिति जटिल बनी हुई है. 

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