फानी तूफान को इसलिए भीषण माना जा रहा है क्योंकि हाई टाइड के वक्त समंदर का स्तर पूर्वी तट के लिए आमतौर पर 7 मीटर तक ऊपर चढ़ जाता है. ऐसे में अति भीषण चक्रवाती तूफान की वजह से समंदर की लहरों में डेढ़ मीटर का और ज्यादा उछाल आने का अंदेशा है. कहा जा सकता है कि ओडिशा और पश्चिम बंगाल के कोस्टल इलाकों में समंदर का पानी ढाई से तीन मंजिल तक ऊपर चला जाएगा. इसका सीधा मतलब यह है कि जो निचले इलाके हैं उनमें समंदर का पानी भर जाएगा. इसको देखते हुए मौसम विभाग ने ओडिशा के खुरदा, पुरी और जगतसिंहपुर जिलों में निचले इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है और समंदर के आस-पास पानी को रोकने के इंतजाम भी किए हैं.
बंगाल की खाड़ी में उठा भीषण चक्रवाती तूफान फानी ओडिशा के पुरी, गोपालपुर और चंदबली के तट से टकराएगा. मौसम विभाग सूत्रों की मानें को फानी तूफान का असर करीब 15 जिलों पर पड़ सकता है.
फानी तूफान सुपर साइक्लोन के बाद सबसे भीषण तूफान है. संयुक्त तूफान चेतावनी केंद्र (Joint Typhoon Warning Center) के मुताबिक 1999 के सुपर साइक्लोन के बाद फानी सबसे खतरनाक चक्रवात माना जा रहा है. 1999 के सुपर साइक्लोन में ओडिशा में करीब 10 हजार लोगों की जान गई थी और भारी तबाही मची थी.
लाउडस्पीकर के जरिए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है. साथ ही बसों, विशेष रेल सेवा का भी इंतजाम किया गया है. फानी तूफान की वजह से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ ही 541 गर्भवती महिलाओं को अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
ओडिशा के आस-पास के राज्यों में भी अलर्ट जारी किया गया है. उत्तरी तटीय आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले में रेड अलर्ट जारी है, क्योंकि तूफान फानी के दौरान तेज हवाओं के साथ भारी बारिश होने की आशंका है. वहीं बंगाल की खाड़ी के साथ-साथ विजयनगरम जिले से सटे विशाखापत्तनम और पूर्वी गोदावरी जिलों में भी फानी तूफान का असर पड़ने के आसार हैं.