पुणे से कानून की पढ़ाई करने वाली 22 वर्षीय छात्रा और इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर शर्मिष्ठा पनौली इन दिनों एक वायरल वीडियो को लेकर विवादों में हैं. सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट करने के बाद शर्मिष्ठा के खिलाफ बंगाल में केस दर्ज हुआ. इसके बाद उन्हें कोलकाता पुलिस ने गुरुग्राम से गिरफ्तार कर लिया. वीडियो में कथित तौर पर एक धार्मिक समुदाय के प्रति अपमानजनक और आपत्तिजनक टिप्पणियां शामिल थीं, जिसने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई.
दरअसल, शर्मिष्ठा ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर किसी धर्म विशेष पर आपत्तिजनक कमेंट किया था. वीडियो तेजी से वायरल हो गया. इससे लोगों की भावनाएं आहत हुईं. इसके बाद कोलकाता के गार्डनरीच पुलिस स्टेशन में इस वीडियो के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई. शर्मिष्ठा पनौली 22 साल की सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं, जो पुणे की एक लॉ यूनिवर्सिटी की छात्रा हैं और मूल रूप से कोलकाता के आनंदपुर की रहने वाली हैं.
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई शुरू की. पुलिस ने कहा कि मामला आईपीसी की धारा 196(1)(ए), 299, 352, 353(1)(सी) बीएनएस, 2023 के तहत दर्ज किया गया, जो धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने से संबंधित है. विवाद के बीच शर्मिष्ठा ने वीडियो को सोशल मीडिया से हटा दिया. उन्होंने अपने किए पर खेद जताते हुए वीडियो हटाने और माफी मांगने की बात कही थी.
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बंगाल पुलिस ने शर्मिष्ठा की गिरफ्तारी के बाद कहा कि नोटिस भेजा गया, लेकिन शर्मिष्ठा और उनका परिवार गायब था. इसके बाद कोलकाता की अदालत ने शर्मिष्ठा के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया. उनकी लोकेशन हरियाणा के गुरुग्राम में ट्रैक की गई और उन्हें वहां से गिरफ्तार कर लिया गया.
इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक पटल पर भी गरमागरमी छिड़ गई. बीते दिनों भारतीय जनता पार्टी के नेता डॉ. सुकांत मजूमदार ने इस गिरफ्तारी को ‘न्याय नहीं, वोट बैंक की खातिर बदले की कार्रवाई’ कहा. उन्होंने कहा कि कोई दंगे या सांप्रदायिक हिंसा नहीं हुई, फिर भी ममता बनर्जी की पुलिस ने रातों-रात कार्रवाई की.
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वहीं, भाजपा के अन्य नेता अमित मालवीय ने भी अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर कहा था कि शर्मिष्ठा पनौली का वीडियो पहले ही हटाया जा चुका था और सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी गई थी, लेकिन फिर भी उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ सवाल उठाते हुए पूछा कि जब उन्होंने भी ऐसे विवादित बयान दिए हैं, जिनसे कई बार हिंसा और नुकसान हुआ है, तो क्या उनके खिलाफ भी ऐसी कड़ी कार्रवाई की जाएगी?
इस मामले में कोलकाता पुलिस का कहना था कि कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है. पुलिस के अनुसार, यह मामला केवल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का है और उन्होंने उचित जांच के बाद गिरफ्तारी की. पुलिस ने कहा कि शिकायत मिलने के बाद ही कार्रवाई शुरू की गई और उन्होंने किसी भी तरह की राजनीतिक दबाव में काम नहीं किया.
'जेल में नहीं मिल रहीं बुनियादी सुविधाएं...' वकील ने कोर्ट में दी है अर्जी
शर्मिष्ठा इस समय कोलकाता की अलीपुर जेल में बंद हैं. 22 वर्षीय महिला इन्फ्लुएंसर शर्मिष्ठा को जेल में बुनियादी सुविधाएं न मिलने और अन्य बंदियों से धमकियां मिलने का मामला भी सामने आया. उनके वकील मोहम्मद शमीमुद्दीन ने कोर्ट में अर्जी देकर बताया कि शर्मिष्ठा को साफ-सफाई, इलाज और अलग टॉयलेट जैसी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं, जबकि वह किडनी की बीमारी से जूझ रही हैं. वकील के मुताबिक, जेल में अन्य बंदियों से मिल रही लगातार धमकियों से उनकी मानसिक और शारीरिक स्थिति खतरे में है. कोर्ट ने मामले का संज्ञान लेते हुए जेल प्रशासन से 4 जून तक रिपोर्ट तलब की है. शर्मिष्ठा को 13 जून तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया है.
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