17 राज्यों में 7 करोड़ आदिवासी सिकल सेल एनीमिया के मरीज... अब PM मोदी ने बनाया खात्मे का प्लान

सिकल सेल एनीमिया ऐसी बीमारी है जो कि मरीज के लाल रक्त कोशिकाओं (Red Blood Cells) को प्रभावित करता है. इसके मरीजों को कई तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ता है. जैसे कि हाथ पैरों में दर्द होना, कमर के जोड़ों में दर्द होना, अस्थिरोग, बार- बार पीलिया होना, लीवर पर सूजन आना, मूत्राशय में रुकावट/दर्द होना, पित्ताशय में पथरी होना.

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जानें क्या है सिकल सेल एनीमिया? जानें क्या है सिकल सेल एनीमिया?

सत्यम बघेल

  • नई दिल्ली,
  • 01 जुलाई 2023,
  • अपडेटेड 12:04 AM IST

सिकल सेल एनीमिया. एक ऐसी बीमारी जिसका जिक्र कर आज पीएम मोदी ने अपने विरोधियों को निशाने पर लिया. पीएम मोदी शनिवार शाम मध्य प्रदेश के शहडोल में आदिवासी समाज के बीच एक कार्यक्रम में बोल रहे थे. इसी दौरान उन्होंने आदिवासी समाज के लोगों को सिकल सेल एनीमिया से बचाने का संकल्प भी लिया. 

पीएम ने कहा, हर साल सिकल सेल एनीमिया की गिरफ्त में आने वाले 2.5 लाख बच्चों और उनके परिवारजनों के जीवन बचाने का हम संकल्प लेते हैं. इसके बाद पीएम ने इस बीमारी के बारे में जोर देते हुए कहा कि यह एक ऐसी बीमारी है जो कि परिवारों को बिखेर देती है. यह बीमारी माता-पिता से ही आगे की पीढ़ी को मिलती है. पीएम ने कहा कि ऐसी बीमारी से पीड़ित बच्चे पूरी जिंदगी इस बीमारी से जूझते हैं. इस बीमारी से आधे मामले सिर्फ अपने देश में होते हैं. इतनी गंभीर बीमारी को लेकर देश में पिछले 70 सालों में कभी चिंता नहीं की गई. 

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पीएम ने इस दौरान कहा कि मैंने देश के अलग-अलग इलाकों में आदिवासी समाज के बीच एक लंबा समय गुजारा है. सिकल सेक एनीमिया जैसी बीमारी बहुत कष्टदायी होती है. ये बीमारी न पानी से होती है, न हवा से और न भोजन से फैलती है. ये बीमारी आनुवंशिक होती है यानी माता-पिता से ही बच्चे में ये बीमारी आती है. ऐसे में आइए आज चर्चा करते हैं इसी गंभीर बीमारी के बारे में. आसान शब्दों में समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर यह बीमारी है क्या? कैसे फैलती है? इससे ठीक होने का तरीका क्या है?

सिकल सेल एनीमिया है क्या?

आसान भाषा में समझें तो सिकल सेल एनीमिया ब्लड से जुड़ा डिसऑर्डर है. यह पीढ़ी दर पीढ़ी चलता है. यह बीमारी सीधेतौर पर ब्लड की उस रेड ब्लड सेल्स को प्रभावित करती है जो पूरे शरीर में ऑक्सीजन को ले जाने का काम करती है. आमतौर पर रेड ब्लड सेल्स गोल होती है, इसलिए ये आसानी से शरीर में मूव होती रहती है. लेकिन अगर किसी को यह बीमारी हो जाए तो उसकी ब्लड सेल्स का आकार बदल जाता है. 

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मरीजों के शरीर में दिखते हैं बदलाव

सिकल सेल एनीमिया की स्थिति में ब्लड सेल्स सख्त होने लगती हैं. इनकी स्थिति बदलने लगती है. शरीर में ब्लड फ्लो धीमा हो जाता है या रुक जाता है. मरीज में इसके लक्षण 6 महीने की उम्र में दिखने लग जाते हैं. मरीज में रेड ब्लड सेल्स प्रभावित होने के कारण ऑक्सीजन का फ्लो बिगड़ जाता है. पूरे शरीर में ऑक्सीजन का फ्लो घटने पर मरीज थकान से जूझने लगता है. शरीर में दर्द महसूस होता है.

इसके मरीजों को क्या दिक्कत होती है?

यह बीमारी धमनियों में रुकावट पैदा करती है, जिससे शरीर में हीमोग्लोबिन व खून की कमी होने लगती है. इसलिए इसे सिकल सेल एनीमिया कहा जाता है. लाल रक्त कोशिकाओं का यह डिसऑर्डर हमारे अंदर रहने वाले जीन की विकृति की वजह से होता है. जब लाल रक्त कोशिकाओं में इस प्रकार का विकार पैदा होता है, तब व्यक्ति के शरीर में अलग-अलग तरह की शारीरिक समस्याएं पैदा होती हैं. जैसे कि हाथ पैरों में दर्द होना, कमर के जोड़ों में दर्द होना, अस्थिरोग, बार- बार पीलिया होना, लीवर पर सूजन आना, मूत्राशय में रुकावट/दर्द होना, पित्ताशय में पथरी होना. जब किसी भी व्यक्ति को यह समस्याएं होने लगें तो उसे ब्लड की सिकल सेल एनीमिया के लिए जांच करवाना जरूरी होता है.

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कैसे होती है यह बीमारी?

सरकार द्वारा वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक यह रोग अनुवांशिक है. इसे आसान भाषा में समझते हैं. हर व्यक्ति को अपने माता-पिता से एक जीन मिलता है. यानी हर व्यक्ति में दो जीन होते हैं एक मां की तरप से जबकि दूसरा पिता की ओर से. इस जीन में सामान्य प्रकार का Hb-A हीमोग्लोबिन हो सकता है यानी एक में सामान्य और दूसरे में असामान्य Hb-S प्रकार का हीमोग्लोबिन हो सकता है, इसका मतलब कि दोनों जीन मे असामान्य Hb-S प्रकार के हीमोग्लोबिन हो सकते हैं. असामान्य प्रकार के हीमोग्लोबिन वाली लाल रक्त कोशिका को सिकल सेल कहा जाता है. इस प्रकार के जीन पाने वाले व्यक्ति भविष्य में अपने बच्चों को इसमें से किसी भी प्रकार के जीन दे सकते हैं, जो सामान्य Hb-A या असामान्य Hb-S हो सकते हैं. 

सिकल सेल एनीमिया दो प्रकार का होता है पहले प्रकार को अंग्रेजी में सिकल वाहक कहा जाता है. जिसमे असामान्य हीमोग्लोबिन Hb-S का प्रमाण 50% से कम होता है तथा सामान्य Hb-A का प्रमाण 50% से ज्यादा होता है. जबकि दूसरे प्रकार को सिकल रोगी वाला व्यक्ति वो होता है जिसमें असामान्य हीमोग्लोबिन Hb-S का प्रमाण 50% से अधिक लगभग 80% होता है, तथा सामान्य हीमोग्लोबिन उपस्थित ही नहीं होता है.

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पहला प्रकार यानी सिकल सेल वाहक: व्यक्ति रोग के वाहक के रूप में काम करते हैं अर्थात उनमे सिकल सेल के रोग के लक्षण स्थायी न होकर कभी - कभी दिखाई देते हैं. फिर भी ये व्यक्ति अपने बच्चों को वंशानुगत यह बीमारी दे सकते हैं.

दूसरे प्रकार के सिकल रोगी: यह वह व्यक्ति होते है जिनमें रोग के लक्ष्ण स्थायी रूप से रहते हैं. जिससे उनके शरीर का विकास रुक जाता है. ये लोग अपने बच्चों को निश्चित ही यह बीमारी देते हैं.

किसे हो सकती है यह बीमारी?

अगर मां और पिता में सिकल सेल के गुण या सिकल सेल का रोग नहीं है तो उनके बच्चों को यह रोग नहीं होता है. यानी सामान्य हीमोग्लोबिन रखने वाले माता-पिता के बच्चों को यह रोग नहीं होता है. इसके अलावा अगर मां और पिता दोनों में से कोई भी एक व्यक्ति सिकल वाहक होगा तो 50% बच्चों को सिकल वाहक होने का और 50% बच्चे में सामान्य गुण वाले होने की सम्भावना होती है. लेकिन इसमें से किसी भी बच्चे को सिकल रोग/बीमारी नहीं होती है.

अचानक हो जाती है मौत!

कई मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो सिकल सेल एनीमिया के मरीजों की मौत अचानक हो जाती है. इस बीमारी में मौत की वजह संक्रमण, दर्द का बार-बार उठना, एक्‍यूट चेस्‍ट सिंड्रोम और स्‍ट्रोक आदि रहते हैं. इस बीमारी से पीड़‍ित व्‍यक्ति की मौत अचानक हो सकती है. पारिवारिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार साल 2015 से 2016 के बीच 58.4% बच्चे और 53% महिलाएं इस बीमारी के शिकार हुए हैं. पिछले 6 दशकों से यह बीमारी भारत में पनप रही है. 

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देश की इतनी आबादी प्रभावित

आपको बताते चलें कि ये एक ऐसी बीमारी है जिसने देश के 17 राज्यों में रहने वाले लगभग 7 करोड़ से अधिक आदिवासी आबादी को अपना शिकार बना रखा है. मुख्य रूप से ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और केरल में यह बीमारी जड़े जमाए हुए है. एक बड़ी आबादी को इस बीमारी से बचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज से राष्ट्रीय स्तर पर सिकल सेल एनीमिया मिशन 2047 की शुरुआत की है. 

क्या इसका इलाज किया जा सकता है?

दरअसल, सिकल सेल एनीमिया का इलाज ब्लड टेस्ट से किया जा सकता है. हालांकि इस बीमारी का कोई पूर्ण इलाज संभव नहीं है. सिकल सेल रोग के लिए स्टेम सेल या बोन मैरो ट्रांसप्लांट ही इलाज है. कुछ दवाइयों से भी इस बीमारी के लक्षणों को कम किया जा सकता है.

केंद्र सरकार क्या करेगी?

ऐसे में सवाल है कि इस बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए केंद्र सरकार क्या करेगी. तो बता दें कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने 2023 के बजट में सिकल सेल एनीमिया बीमारी को लेकर एक ऐलान किया था. निर्मला सीतारमण ने बताया था कि हमारी सरकार का लक्ष्य है कि साल 2047 तक इस रोग को भारत से जड़ से खत्म कर दिया जाए. इसी कड़ी में शनिवार से पीएम मोदी ने सिकल सेल कार्ड बांटे और इस बीमारी की स्क्रीनिंग के लिए लोगों को जागरूक किया जाएगा. 

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चूंकि यह बीमारी मरीज से उसकी अगली पीढ़ी में ट्रांसफर होती है. इसलिए ऐसे मरीजों को सलाह दी जाती है कि बच्चा प्लान करते समय एक बार डॉक्टर से बात करें ताकि अगली पीढ़ी में इस बीमारी को पहुंचने से रोका जा सके.

इन राज्यों में लागू किया जाएगा मिशन

इस मिशन का उद्देश्य विशेष रूप से आदिवासी आबादी के बीच सिकल सेल बीमारी को लेकर लोगों के जागरूक करना है. यह मिशन देश के गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, असम, उत्तर प्रदेश, केरल, बिहार और उत्तराखंड के 278 जिलों में लागू किया जाएगा.

मिशन चलाएगी भाजपा सरकार

इसी बीमारी को लेकर भाजपा सरकार अब मिशन चलाएगी. पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा भी कि सिकल सेल एनीमिया से मुक्ति का ये अभियान अमृत काल का प्रमुख मिशन बनेगा. पीएम ने कहा कि जब देश आजादी के 100 साल मनाएगा यानी 2047 तक हम सब मिलकर एक मिशन मोड में अभियान चलाकर इस सिकल सेल एनीमिया से अपने आदिवासियों और देश को मुक्ति दिलाएंगे.

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