Indian Railways: इस रूट की वंदे भारत ट्रेन में NO नॉनवेज, TMC ने पूछा- अब क्या BJP से हर चीज की परमिशन लेनी होगी!

Vande Bharat Sleeper Food Menu: पश्चिम बंगाल और असम के बीच चलने वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के मेन्यू से मछली और मांस हटाने का फैसला राजनीतिक विवाद बन गया है. तृणमूल कांग्रेस ने इसे बंगाली संस्कृति पर हमला बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी व भाजपा पर निशाना साधा है. हालांकि, रेलवे ने मां कामाख्या और मां काली मंदिर का हवाला दिया है.

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Vande Bharat Sleeper Train No Nonveg Food Option Vande Bharat Sleeper Train No Nonveg Food Option

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:40 PM IST

पश्चिम बंगाल-असम के बीच चलने वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के मेन्यू से मछली और मांस यानी नॉनवेज का ऑप्शन हटाने का फैसला अब सियासी रूप ले चुका है. तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने इस कदम को बंगाली पहचान पर हमला बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा पर निशाना साधा है.

तृणमूल कांग्रेस (TMC) का कहना है कि यह ट्रेन दो ऐसे इलाकों को जोड़ती है जहां नॉनवेज खाना लोगों की संस्कृति का हिस्सा है, लेकिन हावड़ा (कोलकाता) से कामाख्या (गुवाहाटी) के बीच चलने वाली वंदे भारत ट्रेन में अब सिर्फ शाकाहारी विकल्प ही उपलब्ध हैं. बता दें कि यह भारत की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन है, जिसे हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरी झंडी दिखाकर शुरू किया था.

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शाकाहारी मेन्यू पर रेलवे ने क्या कहा?
ट्रेन में रात भर का सफर होता है और यात्रियों को आरामदायक सुविधाएं मिलती हैं, लेकिन मेन्यू में सिर्फ शाकाहारी व्यंजन ही शामिल हैं. भारतीय रेलवे के अनुसार, यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि ट्रेन दो पवित्र स्थानों –मां कामाख्या मंदिर (असम) और मां काली मंदिर (पश्चिम बंगाल) को जोड़ती है. रेलवे ने कहा है कि मेन्यू में स्वस्थ, स्वच्छ और शुद्ध शाकाहारी भोजन उपलब्ध है, जो बंगाल और असम की पारंपरिक डिशेज पर आधारित है. वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के मेन्यू में बंगाली व्यंजन जैसे बासंती पुलाव, छोले की दाल, मूंग दाल, चना और धोकर की सब्जी शामिल हैं. असम की तरफ से जोहा चावल, मसूर दाल और मौसमी सब्जियों की भाजी जैसी चीजें शामिल हैं. साथ ही पारंपरिक मिठाइयां जैसे संदेश और रसगुल्ला भी है. लेकिन नॉनवेज ऑप्शन न होने से कई यात्री नाराज हैं, खासकर बंगाल और असम के लोग जहां मछली और मांस खाना बहुत आम है.

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तृणमूल कांग्रेस ने की आलोचना 
टीएमसी ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की है. पार्टी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा, "पहले वे हमारे वोटों पर नजर रखते थे, अब हमारी प्लेट पर." टीएमसी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने बंगाली मछली-खाने वालों को 'मुगल' कहकर मजाक उड़ाया था. साथ ही दिल्ली में मछली बेचने पर पाबंदी और एक गरीब स्ट्रीट वेंडर पर चिकन पैटी बेचने के लिए हमले का जिक्र किया. टीएमसी ने इसे 'बंगला-विरोधी' मानसिकता बताया और कहा कि यह बंगालियों को एकरूप बनाने की कोशिश है. पार्टी ने कहा, आज खाने पर पाबंदी, कल कपड़ों पर, प्यार पर और जीवनशैली पर. बंगाल अपनी पहचान के लिए किसी से परमिशन नहीं लेगा.

टीएमसी की यह पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है. कई यूजर्स ने समर्थन किया, जबकि कुछ ने रेलवे के फैसले को धार्मिक भावनाओं का सम्मान बताया. एक एक्स पोस्ट में कहा गया, "ट्रेन पश्चिम बंगाल और असम से गुजरती है जहां ज्यादातर लोग नॉनवेज खाते हैं, फिर भी यात्रियों को ऑप्शन नहीं दिया जा रहा है.

रेलवे अधिकारियों ने सफाई दी है कि यह फैसला सिर्फ इस रूट के लिए है क्योंकि ट्रेन पवित्र स्थलों से जुड़ी है. अन्य वंदे भारत ट्रेनों में नॉनवेज विकल्प उपलब्ध रहेंगे. हालांकि, चेन्नई से चलने वाली कुछ वंदे भारत ट्रेनों में भी नॉनवेज ब्रेकफास्ट हटाने की शिकायतें आई थीं, लेकिन रेलवे ने इसे तकनीकी गड़बड़ी बताया था.

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बता दें कि यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब रेलवे स्थानीय व्यंजनों को बढ़ावा देने की योजना बना रहा है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में घोषणा की थी कि वंदे भारत ट्रेनों में क्षेत्रीय खाने परखे जाएंगे. लेकिन इस ट्रेन में नॉनवेज न होने से बहस छिड़ गई है. 

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