कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश कलमाड़ी का मंगलवार को महाराष्ट्र के पुणे के दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल में 81 साल की आयु में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया. सुबह 3:30 बजे उन्होंने दुनिया को अलविदा कहा. सूत्रों के अनुसार, वैकुंठ श्मशान भूमि में उनका अंतिम संस्कार दोपहर दो बजे के क़रीब किया जाएगा.
सुरेश कलमाड़ी का जन्म 1 मई 1944 को पुणे में हुआ था. उन्होंने 1960 के दशक की शुरुआत में नेशनल डिफेंस अकादमी (NDA) में एंट्री ली और भारतीय वायु सेना में पायलट के रूप में सेवा दी.
1964 से 1972 तक उन्होंने भारत की सेवा की, जिसमें 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध भी उनकी भागीदारी रही. 1974 में वायु सेना से समय से पहले सेवानिवृत्त होकर उन्होंने राजनैतिक सफर शुरू किया. स्क्वाड्रन लीडर के रैंक के पद पर रहते हुए उन्होंने सेवानिवृत्त ली थी.
राजनीतिक और खेल प्रशासन में योगदान
संजय गांधी के संरक्षण में कलमाड़ी ने कांग्रेस में कदम रखा. वे पुणे में एक फास्ट फूड आउटलेट चलाते हुए राजनीति में सक्रिय हुए. उनके राजनीतिक जीवन में विवादों की भरमार रही, लेकिन उन्होंने खेल प्रशासन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. वे महाराष्ट्र क्रिकेट संघ और अन्य दलों के प्रमुख सदस्य थे, जिनके प्रयासों से खेल क्षेत्र को नई दिशा मिली.
विवाद और वार्ता
सुरेश कलमाड़ी विवादित विचारों और कठोर शैली के लिए जाने जाते थे. उन्होंने कई बार राजनीतिक और खेल संबंधित मामलों में आलोचना का सामना किया, लेकिन उनके समर्थक उन्हें एक सशक्त और ईमानदार नेता मानते थे.
सुरेश कलमाड़ी का राजनीतिक करियर
सुरेश कलमाड़ी ने 1977 में पुणे यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की थी. इसके बाद 1978 से 1980 तक वे महाराष्ट्र प्रदेश यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष रहे. उनके राजनीतिक करियर में राज्यसभा में चुना जाना बेहद अहम रहा. वह तीन बार राज्यसभा के सदस्य के तौर पर चुने गए, जो 1982 से 1996 तक उनका कार्यकाल रहा.
1996 में वे 11वीं लोकसभा के सदस्य बने और 2004 में 14वीं लोकसभा के लिए पुणे से सांसद चुने गए. उन्होंने 1995-96 में भारत सरकार में नरसिंह राव की कैबिनेट में रेल राज्य मंत्री के रूप में भी कार्य किया. खास बात यह है कि वे एकमात्र जूनियर मंत्री थे जिन्होंने रेलवे बजट पेश किया.
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खेल प्रशासन में भूमिका
सुरेश कलमाड़ी ने खेल प्रशासन में भी गहरा योगदान दिया. 1996 में वे भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के अध्यक्ष बने और कई कार्यकाल तक इस पद पर रहे. इसके अलावा वे एशियन एथलेटिक्स एसोसिएशन के अध्यक्ष, भारतीय एथलेटिक्स फेडरेशन के जीवन कालीन अध्यक्ष तथा राष्ट्रमंडल खेल आयोजन समिति के अध्यक्ष भी रहे. उन्होंने लगातार 23 सालों तक पुणे मैराथन का आयोजन किया और भारत में फॉर्मूला वन ग्रांड प्रिक्स लाने में अहम भूमिका निभाई.
2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स विवाद
सुरेश कलमाड़ी के करियर का सबसे विवादास्पद पक्ष 2010 के दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन रहा. खेलों में वित्तीय घोटाले के आरोप लगे जिसके बाद CBI ने उनके खिलाफ जांच शुरू की.
अप्रैल 2011 में उन्हें गिरफ्तार किया गया और करीब 9 महीने तक तिहाड़ जेल में रहना पड़ा. इस मामले के चलते कांग्रेस पार्टी ने उनकी सदस्यता निलंबित कर दी और खेल प्रशासन से उनका इस्तीफा ले लिया.
कानूनी मामलों का अंत
2014 में CBI ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की और 2025 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों से उन्हें मुक्त कर दिया. दिल्ली न्यायालय ने भी इस क्लीन चिट को स्वीकार किया, जिससे उनके खिलाफ लंबे समय से चल रहे कानूनी विवाद समाप्त हो गया. सुरेश कलमाड़ी को उनके राजनीतिक और खेल प्रशासन के योगदान के लिए आज भी याद किया जाता है.
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