भारत के अंतरिक्ष मिशन में इस चर्च ने निभाई थी अहम भूमिका, चंद्रयान-3 की सफलता पर दिया ये बयान

1960 के दशक के दौरान मैग्डलीन चर्च थुम्बा में सैकड़ों मछुआरों के परिवारों के लिए एक आवास स्थल था. पृथ्वी की मैगनेटिक इक्वेटर रेखा के करीब होने के कारण वैज्ञानिकों ने इस जगह को रॉकेट लॉन्च स्टेशन स्थापित करने के लिए सबसे सही पाया था. तब भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के संस्थापक विक्रम साराभाई ने तत्कालीन लैटिन चर्च बिशप रेवरेंड पीटर बर्नार्ड परेरा से मुलाकात की थी.

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विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर, जो चर्च और आसपास की जमीन पर बनाया गया है विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर, जो चर्च और आसपास की जमीन पर बनाया गया है

aajtak.in

  • तिरुवनंतपुरम,
  • 24 अगस्त 2023,
  • अपडेटेड 4:26 PM IST

चंद्रयान-3 ने कल इतिहास रच दिया. पूरी दुनिया भारत की कामयाबी पर बधाई दे रही है. हिंदुस्तान ने जो ख्वाब देखा, उसे वैज्ञानिकों ने पूरा कर दिखाया है. आज हम चांद पर हैं. हमारा तिरंगा चांद पर लहरा रहा है. लैंडर से उतरकर रोवर प्रज्ञान अपनी उस मुहिम में जुट चुका है, जो दुनिया को चांद के बारे में रिसर्च की राह दिखाने वाला साबित होगा. जहां पूरा देश चंद्रमा मिशन चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सफलता पर खुशी मना रहा है, वहीं केरल में कैथोलिक संप्रदाय का एक प्रमुख लैटिन चर्च थोड़ा अधिक उत्साहित है. कारण, इस चर्च ने भारत की अंतरिक्ष गाथा में अहम भूमिका निभाई है. 

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दरअसल, भारत ने चंद्रमा मिशन या मंगल अभियान के बारे में जब सपना देखना शुरू किया था और देश का अंतरिक्ष कार्यक्रम प्रारंभिक अवस्था में था, यह लैटिन चर्च ही था जिसने थुम्बा की पहली इकाई की स्थापना के लिए अपने पैरिश चर्च और उसके पास बने बिशप हाउस को दिया था. यहां इक्वेटोरियल रॉकेट लॉन्च स्टेशन (TERLS) बनाया गया है. बाद में TERLS का नाम बदलकर विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC) कर दिया गया.

चंद्रमा मिशन की शानदार सफलता पर लैटिन आर्चडियोज विकर जनरल फादर यूजीन एच परेरा ने न्यूज एजेंसी से कहा कि चर्च और उससे जुड़े लोगों ने हमेशा देश के विकास को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता दी है. हम, चर्च और यहां के तटीय इलाकों में रहने वाले मछुआरे समुदाय, ISRO की उपलब्धि से बहुत खुश और गौरवान्वित हैं.

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परेरा ने कहा कि उन्हें यह कहते हुए गर्व हो रहा है कि तिरुवनंतपुरम के महाधर्मप्रांत और यहां के बाहरी इलाके में स्थित मछली पकड़ने वाली बस्ती थुम्बा में सेंट मैरी मैग्डलीन चर्च ने देश के अंतरिक्ष मिशन के सपनों को पंख देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. 

इस वजह से चर्च की जगह को चुना गया

बता दें कि 1960 के दशक के दौरान मैग्डलीन चर्च थुम्बा में सैकड़ों मछुआरों के परिवारों के लिए एक आवास स्थल था. पृथ्वी की मैगनेटिक इक्वेटर रेखा के करीब होने के कारण वैज्ञानिकों ने इस जगह को रॉकेट लॉन्च स्टेशन स्थापित करने के लिए सबसे सही पाया था. तब भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के संस्थापक विक्रम साराभाई ने तत्कालीन लैटिन चर्च बिशप रेवरेंड पीटर बर्नार्ड परेरा से मुलाकात की थी और देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए चर्च भवन और आस-पास के इलाके को सौंपने का अनुरोध किया था.

इस पर बिशप न केवल चर्च को सौंपने के लिए सहमत हुए बल्कि थुम्बा में मछली पकड़ने वाले समुदाय से संबंधित अपने सदस्यों से बात करने और उन्हें अंतरिक्ष विज्ञान के महत्व के बारे में समझाने के लिए भी सहमत हुए.

साराभाई और कलाम ने बिशप से किया था अनुरोध

विकार जनरल ने बताया, "बिशप ने साराभाई और हमारे प्रिय वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की उपस्थिति में चर्च से जुड़े लोगों से बात की और उन्हें चर्च की जमीन को खाली करने की आवश्यकता के बारे में बताया. चर्च में एकत्र हुए सभी लोगों ने उनके सुझाव पर सहमति व्यक्त की. यह घटना देश के इतिहास में विश्वास और विज्ञान को एक साथ लाने की एक दुर्लभ घटना बन गई है. कलाम ने बाद में अपनी आत्मकथा में लिखा कि कैसे मैग्डलीन चर्च में थुम्बा अंतरिक्ष केंद्र का पहला ऑफिस बनाया गया. चर्चा का प्रार्थना कक्ष उनकी पहली प्रयोगशाला बना और बिशप के घर में एक छोटा कमरा उनका डिज़ाइन और ड्राइंग ऑफिस बना."

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पहला रॉकेट लॉन्च थुंबा में ही हुआ

गौरतलब है कि देश का पहला रॉकेट लॉन्च (चर्च परिसर में इकट्ठा किया गया एक साउंडिंग रॉकेट) 21 नवंबर, 1963 को थुंबा में ही हुआ था. इस तरह से सेंट मैरी मैग्डलीन चर्च और इसके तत्कालीन बिशप रेवरेंड पीटर बर्नार्ड परेरा का नाम भारत के अंतरिक्ष इतिहास में अहम भूमिका निभाता है. वहीं 1985 में, राजसी चर्च को वीएसएससी स्पेस म्यूजियम में बदल दिया गया, जिसे अब हर महीने हजारों लोग देखने आते हैं. स्पेस म्यूजियम भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के इतिहास और उपलब्धियों को प्रदर्शित करता है.

VSSC में स्पेस म्यूजियम को बिशप के नाम पर रखने के गुहार 

अब चर्च को उम्मीद है कि इसरो की तरफ से वीएसएससी में स्पेस म्यूजियम को बिशप परेरा का नाम देने के लिए कदम उठाए जाएंगे. यूजीन एच परेरा ने कहा, "अंतरिक्ष केंद्र का नाम साराभाई के नाम पर रखा गया है. इसलिए, हम चाहते हैं कि अंतरिक्ष संग्रहालय का नाम बिशप रेवरेंड पीटर बर्नार्ड परेरा के नाम पर रखा जाए, जिन्होंने चर्च को वैज्ञानिकों को सौंपकर देश के अंतरिक्ष मिशन के सपनों को पंख दिए थे." 

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