पंजाब का मलेरकोटला सामाजिक सोहार्द का केंद्र माना जाता है. उसी मलेरकोटला के कुछ मुस्लिम नागरिक पिछले 25-26 दिनों से सिंघु बॉर्डर पर किसानों के खाने-पीने का इंतजाम कर रहे हैं. मलेरकोटला के किसानों के द्वारा आन्दोलनरत किसानों को नमकीन और मीठा पुलाव बनाकर खिलाया जा रहा है. यह नमकीन और मीठा पुलाव "जर्दा" कहलाता है, मलेरकोटला के इन लोगों के द्वारा ये व्यवस्था सिंघु बॉर्डर पर, संयुक्त किसान मोर्चा के मुख्य मंच के पास ही की जा रही है.
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पंजाब मलेर कोटला, के हाज़ी मोहम्मद जमील, पंजाब में दुकान चलाते हैं. हाजी मोहम्मद जमील ने आजतक से बातचीत में कहा कि ''ये मलेर कोटला की धरती है जब गुरु गोविंद सिंह के छोटे बच्चों को सरान्ध के सूबेदार ने अत्याचार करने की कोशिश की तो मलेरकोटला के नवाब ने मदद की थी. हम भी उसी धरती से हैं. हम अपने सिख भाइयों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर के चल रहे हैं. यहां पर किसानों को नमकीन जर्दा और मीठा जरदा बना करके खिलाया जा रहा है. हाजी मोहम्मद जमील ने किसान कानून को लेकर कहा कि सरकार को पीछे हटना पड़ेगा, सरकार जब तक अपना कानून वापस नहीं लेगी तब तक हम लोग ऐसे ही यहां पर डटे रहेंगे.''
हाजी मोहम्मद ने आगे कहा कि ये किसान हैं ये अन्नदाता है और ये सबका पेट भरते हैं. इसलिए हम भी इनकी सेवा करने के लिए यहाँ पर मौजूद हैं. मुख्य मंच के पास बने इस लंगर में एक सिख किसान ने मलेरकोटला के किसानों के बारे में बताया.
''पिछले 25- 26 दिनों से ये लोग ऐसे ही यहां पर खाना खिला रहे हैं. मैं किसान हूं और सरकार की जिद की वजह से इस तरीके से यहां पर किसान रुके हुए हैं. सर्द मौसम होने के साथ-साथ यहां परेशानियां भी हो रही है लेकिन मलेरकोटला के जो मुस्लिम भाई हैं वह हम लोगों की यहां पर सेवा कर रहे हैं. पंजाब के मलेरकोटला से आए मुस्लिम भाइयों का जो लंगर यहां पर चल रहा है, उस लंगर में दिल्ली के भी कुछ मुस्लिम काम कर रहे हैं.''
मलेरकोटला से आए हुए एक व्यक्ति ने आजतक को ''जर्दा'' के बारे में बताया ''ये मीठा चावल होता है यह पूरी तरीके से वेजिटेरियन होता है. इसमें नॉनवेज का इस्तेमाल नहीं किया जाता. और ये मीठा और नमकीन चावल यहां पर जो किसान धरने पर बैठे हुए हैं. उनको खिलाया जा रहा है. 26-27 तारीख से लगातार मैं इन किसानों को यह जर्दा पुलाव बना करके खिला रहा हूं.
जितेंद्र बहादुर सिंह