'राजनीतिक दलों में POSH एक्ट...', याचिकाकर्ता की मांग पर SC ने दिया चुनाव आयोग के पास जाने का निर्देश

याचिका में कहा गया है, "राजनीतिक दलों को POSH अधिनियम के दायरे से बाहर रखा जाना एक गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि इससे राजनीति में शामिल महिलाओं को उत्पीड़न और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ सकता है."

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सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट

कनु सारदा

  • नई दिल्ली,
  • 09 दिसंबर 2024,
  • अपडेटेड 2:00 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को वर्कप्लेस पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 (POSH एक्ट) को राजनीतिक दलों पर लागू करने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता से कहा कि वह पहले भारत के चुनाव आयोग से संपर्क करें.

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने सुप्रीम कोर्ट की वकील योगमाया एमजी द्वारा दायर जनहित याचिका पर यह निर्देश जारी किया. याचिका में मांग की गई है कि राजनीतिक दलों को भी वर्कप्लेस पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 के तहत वर्कप्लेस पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए प्रक्रिया का पालन करना चाहिए.

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याचिका में क्या-क्या मांगे की गई हैं?

याचिका में यह भी कहा गया है कि विशाखा मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक, राजनीतिक दलों में एक आंतरिक शिकायत समिति का गठन किया जाना चाहिए. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से सीनियर एडवोकेट शोभा गुप्ता ने कहा कि एक्ट के परिभाषा खंड में सभी पीड़ित महिलाएं और वर्कप्लेस शामिल हैं.

इस पर, जस्टिस कांत ने असंगठित क्षेत्रों पर अधिनियम की एप्लिकेबिलिटी के बारे में सवाल किया, जहां लोग दैनिक आधार पर आते हैं और काम करते हैं. शोभा गुप्ता ने जवाब दिया कि अधिनियम स्थानीय समितियों के जरिए ऐसी संस्थाओं को भी कवर करता है और अधिनियम में प्रावधान हैं. इसके बाद जस्टिस कांत ने राजनीतिक दल की कानूनी स्थिति के बारे में पूछा.

एडवोकेट शोभा गुप्ता ने जवाब दिया कि वे जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 29ए के मुताबिक रजिस्टर्ड संस्थाएं हैं, जिन्हें भारत के चुनाव आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त है.

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इस पर बेंच ने जवाब दिया कि पहले भारत के चुनाव आयोग से संपर्क किया जाए, क्योंकि राजनीतिक दलों के संबंध में वही सक्षम प्राधिकारी है. इसके बाद बेंच ने आदेश देते हुए कहा, "याचिका का निपटारा इस आजादी के साथ किया जाता है कि याचिकाकर्ता सक्षम प्राधिकारी से संपर्क कर सकता है. अगर याचिकाकर्ता की शिकायत का प्रभावी ढंग से समाधान नहीं किया जाता है, तो वह कानून के मुताबिक न्यायिक मंच से संपर्क करने के लिए आजाद होगी."

यह भी पढ़ें: वर्कप्लेस स्ट्रेस को दूर करने के लिए इन टिप्स को ज़रूर करें फॉलो

याचिका में सभी प्रमुख सियासी दलों को मामले में प्रतिवादी बनाया गया था. याचिका में कहा गया है कि, "भारत में महिला राजनेताओं के खिलाफ शारीरिक और मौखिक दुर्व्यवहार की चिंताजनक दरें इन परिस्थितियों में कानूनी सुरक्षा की तत्काल जरूरत को उजागर करती हैं. ऐसी घटनाओं की संभावित कम रिपोर्टिंग से यह मुद्दा और भी गंभीर हो जाता है, जिससे सुरक्षा में कमी को दूर करना जरूरी हो जाता है."

याचिका में कहा गया है, "राजनीतिक दलों को POSH अधिनियम के दायरे से बाहर रखा जाना एक गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि इससे राजनीति में शामिल महिलाओं को उत्पीड़न और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ सकता है. इस मुद्दे को प्रभावी ढंग से हल करने के लिए, एक्ट के तहत सियासी दलों को शामिल करना अहम है. इससे महिला राजनेताओं को ज्यादा सुरक्षित और सहायक वातावरण मिलेगा, जिससे वे राजनीतिक प्रक्रिया में पूरी तरह से भाग ले सकेंगी."
 

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