भारत-पाकिस्तान के बीच बने अटारी बॉर्डर पर पुलिस की गाड़ियां आने पर महिलाओं के चेहरे पर आंसू, भ्रम और बेबसी साफ देखी जा सकती थी. घर वापस जाने के लिए नहीं, बल्कि उस देश में वापस लौटने के लिए जिसे कई लोग दशकों पहले छोड़ आए थे. जम्मू और कश्मीर पुलिस ने पाकिस्तानी नागरिकों को वापस भेजना शुरू कर दिया है, जिनमें से कई तीन दशकों से भारत में रह रहे हैं.
24 अप्रैल को पाकिस्तानी नागरिकों को देश से बाहर जाने के बारे में कहा गया था. छह दिनों के भीतर अटारी-वाघा सीमा बिंदु के माध्यम से 786 पाकिस्तानी नागरिक भारत छोड़ चुके हैं. इसी दौरान मंगलवार शाम तक कुल 1616 भारतीय अटारी-वाघा सीमा के माध्यम से पाकिस्तान से वापस आ चुके हैं.
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मंगलवार को कई महिलाओं को वापस लाने के लिए अटारी बॉर्डर पर लाया. पहलगाम हमले के बाद, देश भर के पाकिस्तानी नागरिकों को 27 अप्रैल तक भारत छोड़ने के लिए कहा गया था. इमिग्रेशन और विदेशी अधिनियम 2025 के मुताबिक, जो लोग नहीं छोड़ते हैं उन्हें तीन साल तक की जेल या अधिकतम 3 लाख रुपये का जुर्माना या दोनों का सामना करना पड़ सकता है.
‘मैं पाकिस्तान में कहां रहूंगी?’
निर्वासित लोगों में रक्षंदा जहूर भी शामिल हैं, जो पिछले 36 सालों से जम्मू में रह रही हैं. रक्षंदा ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, "मैं 36 सालों से यहां हूं, मैं वापस कैसे जा सकती हूं? लेकिन पुलिस मुझे यहां ले आई है." उन्होंने साल 1989 में एक भारतीय नागरिक से शादी की, लेकिन उन्हें कभी भारतीय नागरिकता नहीं मिली.
उन्होंने भीगी आंखों से हाथ जोड़कर कहा, “मैं पाकिस्तान में कहां रहूंगी? वहां मेरा कोई नहीं है. मेरे माता-पिता 1989 में गुजर गए. अब वहां मेरा कोई नहीं बचा है." उनके पति जहूर अहमद ने कहा, “पुलिस अचानक हमारे घर आई और मेरी पत्नी को भारत छोड़ने का नोटिस दे दिया. मेरी पत्नी पाकिस्तान में कहां जाएगी? यह हमारे लिए दुखद है.”
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जम्मू-कश्मीर के पहलगाम से लगभग 5 किलोमीटर दूर बैसरन घास के मैदान में 22 अप्रैल को पांच से छह आतंकवादियों ने पर्यटकों के एक समूह पर गोलीबारी की. लश्कर-ए-तैयबा की ब्रांच द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने हमले की जिम्मेदारी ली.
चश्मदीदों ने बताया कि आतंकवादी आसपास के देवदार के जंगलों से निकले और पिकनिक मना रहे, सवारी कर रहे या खाने के स्टॉल पर खाना खा रहे लोगों पर गोलियां चलाईं. पीड़ितों में से ज़्यादातर पर्यटक थे, जिनमें यूएई और नेपाल के दो विदेशी और दो स्थानीय लोग शामिल थे.
हमले के अगले दिन सुरक्षा पर कैबिनेट समिति (CCS) की बैठक में यह घोषणा की गई कि पाकिस्तानी नागरिकों को अब दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) वीज़ा छूट योजना (SVES) के तहत भारत आने की अनुमति नहीं दी जाएगी.
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