अब बड़े शहरों से निकल गांवों तक पहुंच रहे पद्म पुरस्कार, आजादी के बाद पहली बार सूची में आए ये 10 जिले

केंद्र सरकार ने वर्ष 2026 के लिए 131 पद्म पुरस्कारों की घोषणा की है, जिसमें देश के 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 84 जिलों की प्रतिभाओं को सम्मान मिला है. खास बात यह है कि आजादी के बाद पहली बार 10 ऐसे जिलों से पद्म पुरस्कार विजेता चुने गए हैं, जहां से कोई कभी इन पुरस्कारों को नहीं पा सका था.

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देश के 10 ऐसे जिले हैं जहां से आजादी के बाद पहली बार किसी को पद्म पुरस्कारों के लिए चुना गया है. (Photo: PTI) देश के 10 ऐसे जिले हैं जहां से आजादी के बाद पहली बार किसी को पद्म पुरस्कारों के लिए चुना गया है. (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 26 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:05 AM IST

केंद्र सरकार ने वर्ष 2026 के लिए पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी है. 131 पद्म पुरस्कार विजेताओं की सूची में देश के कोने-कोने से प्रतिभाओं को सम्मान दिया गया है. अधिकारियों के अनुसार, आजादी के बाद पहली बार 10 ऐसे जिलों के लोगों को पद्म पुरस्कार मिला है, जहां से पहले ​कभी किसी को पद्म पुरस्कार नहीं मिले थे. सरकार को इस वर्ष 39,000 से अधिक नामांकन प्राप्त हुए थे, जिनमें से 131 पद्म पुरस्कार विजेताओं का चयन किया गया.

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अधिकारियों ने बताया कि 2026 के लिए चुने गए पुरस्कार विजेता देश के 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 84 जिलों से आते हैं. इनमें कर्नाटक का मंड्या, मध्य प्रदेश का बैतूल, महाराष्ट्र का परभणी, उत्तराखंड का बागेश्वर, तेलंगाना का रंगा रेड्डी, पश्चिम बंगाल का दक्षिण दिनाजपुर, ओडिशा का नुआपाड़ा, छत्तीसगढ़ का दंतेवाड़ा, आंध्र प्रदेश का एलुरु और राजस्थान का डीग जिले शामिल हैं, जहां से आजादी के बाद पहली बार किसी को पद्म सम्मान मिला है.

एक अधिकारी ने कहा कि पद्म पुरस्कार अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अलप्पुझा, भोजपुर, कछार, दार्जिलिंग, गोलपारा, इम्फाल, जूनागढ़, कृष्णा, मोकोकचुंग, नुआपाड़ा, पूर्व बर्धमान और श्रीगंगानगर जैसे क्षेत्रों तक पहुंच रहे हैं. पद्म विभूषण (मरणोपरांत) के लिए वी.एस. अच्युतानंदन और पद्म भूषण के लिए झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक शिबू सोरेन का चयन सरकार के लोकतांत्रिक दृष्टिकोण को दर्शाता है. अधिकारियों के अनुसार, मोदी सरकार के 12 वर्षों के कार्यकाल में 18 से अधिक राजनीतिक दलों और 22 राज्यों के नेताओं को पद्म सम्मान मिल चुका है.

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पूर्वोत्तर के ‘अष्टलक्ष्मी’ राज्यों को भी अभूतपूर्व मान्यता मिली है. बीते 12 वर्षों में पूर्वोत्तर राज्यों को कुल पद्म पुरस्कारों का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा मिला है. इस वर्ष के पुरस्कारों में समाज के हर क्षेत्र में योगदान देने वालों को सम्मानित किया गया है, जिनमें दलित, वंचित और उपेक्षित वर्गों के लोग भी शामिल हैं, जो ‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना को दर्शाता है. पद्म पुरस्कारों में 19 प्रेरणादायक महिलाओं को भी सम्मानित किया गया है.

इनमें तेजाब हमले की पीड़िता मंगला कपूर, जो बीएचयू में संगीत की शिक्षिका बनीं, और आर्मिडा फर्नांडीज, जिन्होंने एशिया का पहला मानव दुग्ध बैंक स्थापित किया, शामिल हैं. इसके अलावा, एयरोस्पेस वैज्ञानिक शुभा वेंकटेश अयंगर, रूसी इंडोलॉजिस्ट ल्यूडमिला विक्टोरोवना खोखलोवा, रक्षा उद्योग के अग्रणी सत्यनारायण नुवाल, दलित पृष्ठभूमि से उठकर उद्योग स्थापित करने वाले अशोक खाड़े और प्रसिद्ध प्लांट जेनेटिसिस्ट पी.एल. गौतम को भी पद्म श्री से सम्मानित किया गया है.

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