केरल के तिरुवनंतपुरम में त्रावणकोर टाइटेनियम प्रोडक्ट्स फैक्ट्री में एक ग्लास भट्ठी की पाइप लाइन फट गई जिससे काफी मात्रा में तेल समुद्र में जा गिरा. पाइप लाइन फटने की यह घटना बुधवार को दोपहर करीब 1 बजे हुई.
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक अध्ययन में समुद्र में दो किलोमीटर तक तेल फैला हुआ पाया गया. इसके बाद, सरकार ने जनता और पर्यटकों के लिए तिरुवनंतपुरम जिले के प्रमुख पर्यटन स्थलों, वेलि और शंखमुमुघम बीच पर जाने को लेकर अस्थायी तौर पर प्रतिबंध लगा दिया है. तटरक्षक बल भी घटना की निगरानी कर रहा है.
मछुआरों ने कहा कि काली भट्ठी का तेल समुद्र के दो किलोमीटर क्षेत्र में फैल गया है. उन्होंने घटना पर पहुंचे स्थानीय विधायक वीएस शिवकुमार, टाइटेनियम फैक्ट्री के अधिकारियों और मौके पर पहुंचे अन्य प्रतिनिधियों से इस पर गहरी चिंता व्यक्त की.
मछुआरों की मांग-सरकार मुआवजा दे
मछुआरों का कहना है कि समुद्र के किनारों पर ढेर सारी मछलियां और समुद्री कछुए मृत पाए गए हैं और इस कारण वे मछली पकड़ने का काम भी नहीं कर सकते. उन्होंने सरकार से मुआवजे की मांग की है.
टाइटेनियम फैक्ट्री के अधिकारियों ने कहा कि पाइप लाइन में रिसाव तुरंत खोज लिया गया और तत्काल बंद कर दिया गया. फिलहाल कोई तेल रिसाव नहीं है. जल्द से जल्द समुद्र से भट्ठी का तेल निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं.
तिरुवनंतपुरम जिला कलेक्टर नवजोत खोसा की अगुवाई में अधिकारियों की एक टीम ने उन क्षेत्रों का दौरा किया जहां तेल लीक कर गया था. कलेक्टर ने कहा कि तेल रिसाव के स्रोत का पता चला है और जल्दी से बंद करा दिया गया है और बड़े पैमाने पर तेल को समुद्र में फैलने से रोक दिया गया है.
जिला कलेक्टर ने यह भी कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तेल रिसाव को दूर करने के संबंध में विशेषज्ञों के साथ चर्चा कर रहा है. तटरक्षक बल की ओर से की गई शुरुआती रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि कम ज्वार (लो टाइड) के कारण बड़ी मात्रा में तेल समुद्र में नहीं पहुंच पाया है. हालांकि, समुद्री तट पर तेल फैल गया है. इसके अलावा, यह तटीय मिट्टी में भी मिल गया है. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि तेल आसपास की लहरों के साथ मिट्टी में मिल गई.
विवेक राजगोपाल