तुर्की के एक सैन्य मालवाहक विमान की 8 मई को कराची में लैंडिंग से खलबली मच गई है. यह लैंडिंग ठीक कुछ घंटे बाद हुई जब पाकिस्तान ने भारत के कई शहरों की ओर तुर्की के सैकड़ों ड्रोन छोड़े थे. हालांकि तुर्की और पाकिस्तान दोनों ने इस विमान के दौरे को एक 'साधारण ईंधन भराव' बताया है, लेकिन हमले और विमान की मौजूदगी के समय ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
पाकिस्तान ने भारत पर दागे तुर्की के ड्रोन
एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय अधिकारियों ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने सिविल एयरक्राफ्ट को 'हवा में ढाल' (aerial camouflage) के रूप में इस्तेमाल करते हुए भारतीय सैन्य और नागरिक ठिकानों पर 300-400 ड्रोन दागे, जिनमें से कई तुर्की में बने Asisguard SONGAR मॉडल थे.
विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने बताया, '7 मई रात 8:30 बजे पाकिस्तान ने भारत पर नाकाम और उकसावे वाला ड्रोन व मिसाइल हमला किया, लेकिन उसने अपना नागरिक हवाई क्षेत्र बंद नहीं किया. वह जानबूझकर एक सिविल विमान का इस्तेमाल 'ढाल' के रूप में कर रहा था.'
PAK ने जासूसी के लिए भेजे थे ड्रोन
भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम ने इस हमले को सफलतापूर्वक नाकाम किया, करीब 50 ड्रोन को एयर डिफेंस गनों से मार गिराया गया और 20 को जैमिंग सिस्टम से निष्क्रिय किया गया. अधिकांश ड्रोन हथियारों से लैस नहीं थे, बल्कि उनमें निगरानी कैमरे लगे थे, जिससे यह साफ हुआ कि हमले का असली मकसद भारत की रक्षा तैयारियों की जासूसी करना था.
कर्नल सोफिया कुरैशी ने बताया कि यह ड्रोन हमला 36 शहरों पर किया गया, लद्दाख के सियाचिन से लेकर गुजरात के कच्छ तक, यानी करीब 1,400 किलोमीटर की दूरी में. इसके साथ LoC पर गोलीबारी और तोपों से हमला भी हुआ, जिसमें 16 भारतीय मारे गए, जिनमें एक सैनिक भी शामिल था.
छह विमान देखे जाने का दावा
इस पूरे घटनाक्रम के बीच, ऑनलाइन फ्लाइट ट्रैकर डेटा और विजुअल दिखाते हैं कि तुर्की के C-130E हरक्यूलिस सैन्य विमान पाकिस्तान की हवाई सीमा में मौजूद थे. रिपोर्ट्स के अनुसार ऐसे छह विमान हमले के आसपास के दिनों में पाकिस्तान में देखे गए. हालांकि केवल एक की पुष्टि फ्लाइट लॉग्स से हुई है.
अंकारा ने इस बात का खंडन किया, लेकिन स्थिति की संवेदनशीलता परेशानी का विषय बने हुए हैं क्योंकि तुर्की में बने ड्रोन, पाकिस्तान से दागे गए, और उसी समय तुर्की सैन्य विमान कराची की जमीन पर मौजूद थे.
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