'पॉलिटिक्स में होते तो PM बनते', CJI रमना के विदाई समारोह में बोले वकील

SCBA के अध्यक्ष विकास सिंह ने कहा कि जस्टिस NV रमना 22 साल की उम्र में पत्रकार हुए और 25 साल में वकील. वो राजनीति में भी जाना चाहते थे, उनके नहीं जाने से राजनीति का नुकसान ही हो गया. अगर ये राजनीति में होते तो वहां भी प्रधानमंत्री होते. जस्टिस रमना ने जनहित के प्रति अपने समर्पण का मुद्दा रखा है.

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निवर्तमान CJI एनवी रमना ने विदाई समारोह को संबोधित किया. (फोटो ANI) निवर्तमान CJI एनवी रमना ने विदाई समारोह को संबोधित किया. (फोटो ANI)

संजय शर्मा / अनीषा माथुर

  • नई दिल्ली,
  • 26 अगस्त 2022,
  • अपडेटेड 10:39 PM IST

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एनवी रमना के कार्यकाल का आज (शुक्रवार) आखिरी दिन था. इस दौरान शाम को सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने औपचारिक विदाई समारोह आयोजित किया और जस्टिस रमना के कार्यकाल को याद किया. SCBA के अध्यक्ष विकास सिंह ने फ्री की रेबड़ी वाले केस में जस्टिस रमना के फैसले की तारीफ की.

विकास सिंह ने कहा कि जस्टिस रमना 22 साल की उम्र में पत्रकार हुए और 25 साल में वकील. वो राजनीति में भी जाना चाहते थे, उनके नहीं जाने से राजनीति का नुकसान ही हो गया. अगर ये राजनीति में होते तो वहां भी प्रधानमंत्री होते. जस्टिस रमना ने कई राजनीतिक मामलों में न्याय प्रक्रिया के जरिए अपना स्पष्ट मंतव्य और जनहित के प्रति अपने समर्पण का मुद्दा रखा है. फ्रीबीज मामले में उन्होंने जनता के पैसे के प्रति चिंता जताई और समुचित इंतजाम का रास्ता प्रशस्त किया है.

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न्यायपालिका को मीडिया में पर्याप्त जगह नहीं

निवर्तमान CJI एनवी रमना ने कहा कि आम धारणा ये थी कि न्यायपालिका आम जनता से काफी दूर है. अभी भी लाखों दबे हुए लोग हैं जिन्हें न्यायिक मदद की जरूरत है और जरूरत के वक्त इससे संपर्क करने के लिए आशंकित हैं. उन्होंने आगे कहा कि अपने संवैधानिक जनादेश को पूरा करने के बावजूद न्यायपालिका को मीडिया में पर्याप्त जगह नहीं मिलती है, जिससे लोग संविधान के बारे में ज्ञान से वंचित हो जाते हैं. 

लोगों के संविधान के करीब लाना मेरा कर्तव्य था

सीजेआई रमना ने कहा कि इन धारणाओं को दूर करना और न्यायपालिका के आसपास जागरूकता पैदा करने और विश्वास पैदा करने के साथ संविधान को लोगों के करीब लाना मेरा संवैधानिक कर्तव्य था.  

पहली बार SC की कार्यवाही की लाइवस्ट्रीमिंग

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एडवोकेट विकास ने आगे कहा कि मैं जस्टिस रमना की इस चिंता से बहुत प्रभावित हुआ कि किस तरह उन्होंने राजनीतिक सीमाओं को अक्षुण्ण रखने की कोशिश की. वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने आज एक नया प्रयोग देखा और वो प्रयोग था- कोर्ट-1 की कार्यवाही को NIC ने सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर लाइव स्ट्रीम किया. शुक्रवार को CJI एनवी रमना, जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस सीटी रविकुमार की विशेष बेंच ने महत्वपूर्ण मामलों में पांच फैसले दिए, जिन पर पूरे देश की नजर थी.

2018 में SC ने दे दी थी लाइवस्ट्रीमिंग की मंजूरी

'सेरेमोनियल बेंच' की कार्यवाही को भी लाइवस्ट्रीम किया गया, जिसमें निवर्तमान CJI रमना, नामित CJI यूयू ललित के साथ बैठे थे. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही की लाइवस्ट्रीमिंग प्रक्रिया 2018 से पाइपलाइन में है. सुप्रीम कोर्ट ने उसी समय लाइवस्ट्रीमिंग की मंजूरी दे दी थी. हालांकि, शीर्ष अदालत ने अब तक अन्य नियमित सुनवाई के दिनों में अदालती कार्यवाही की लाइवस्ट्रीमिंग शुरू नहीं की थी.

जब CJI बोले- I am sorry...

मॉर्निंग की सेरेमोनियल बेंच के दौरान कोर्ट को अपने संबोधन में CJI रमना ने केसों की लिस्टिंग और पोस्टिंग पर अधिक ध्यान नहीं दे पाने पर बार से माफी भी मांगी. रमना ने कहा- 'मुझे ये स्वीकार करना होगा कि केसों की लिस्टिंग करने और पोस्टिंग करने के मसले पर मैं ज्यादा ध्यान नहीं दे सका. हम डेली बेसिस केसों में ही बिजी बने रहे.

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नामित CJI ने बताया अपना विजन

वहीं, इस समारोह में नामित सीजेआई यूयू ललित ने कहा कि आगे मेरे लिए बहुत चुनौती भरी पारी होगी. जजों की नियुक्ति का जो तरीका जस्टिस रमना ने तैयार किया है, वो राह दिखाएगा. जस्टिस रमना ने चीफ जस्टिस और सीएम की कॉन्फ्रेंस जिन मुद्दों और जिस दक्षता के साथ आयोजित की, वो बेजोड़ है. अदालतों के बुनियादी ढांचे की मजबूती का ध्यान रखा और उसमें विकास कार्य की शुरुआत की. उन्होंने कहा कि मैं अपने 74 दिनों के कार्यकाल में जस्टिस रमना से क्यू लेकर आगे बढ़ाऊंगा. इनकी तरह ही साफ और पारदर्शी नजरिया रहेगा.

जस्टिस यूयू ललित शनिवार को CJI पद की शपथ लेंगे. उन्होंने आज अपने कार्यकाल में फोकस एरिया को भी सामने रखा. उन्होंने कहा कि 74 दिनों के अपने छोटे से कार्यकाल में वह 'तीन चीजें' करने की कोशिश करेंगे.

ललित ने कहा कि वे जिन तीन शीर्ष मुद्दों पर फोकस करने वाले हैं, उनमें प्रमुख तौर पर- 
1. केसों की सुनवाई के लिए लिस्टिंग सिस्टम होगा.
2. अर्जेंट केसों की मेंशनिग की जाएगी.
3. संविधान पीठ का गठन होगा. एक संविधान पीठ सालभर केसों की सुनवाई करेगी. तीन जजों की बेंच बनाने पर ध्यान रहेगा.

आज जिन्हें नियुक्त किया, आगे वो SC में बन सकते हैं जज

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जस्टिस यूयू ललित ने कहा कि दो उपलब्धियां हैं. एक देश में हाई कोर्ट के लिए 250 नियुक्तियां हैं. 1/3 रिक्ति को पूरा किया गया. भविष्य में ऐसा भी समय हो सकता है कि सुप्रीम कोर्ट में बड़ी संख्या में ऐसे जज आएं, जो मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना द्वारा अभी नियुक्त किये गए हैं.

उन्होंने कहा कि तीनों लंबे समय से लंबित मुद्दे हैं, जिनकी वकीलों और वादियों द्वारा बार-बार आलोचना की जाती रही है. संविधान पीठ के समक्ष 490 से ज्यादा मामले लंबित हैं. जिसमें 5 न्यायाधीश, 7 न्यायाधीश और 9 न्यायाधीशों की पीठ के मामले शामिल हैं. नामित सीजेआई ने कहा है कि वह लंबित कानूनी मुद्दों को उठाने के लिए संविधान पीठों की स्थापना सुनिश्चित करेंगे.

जस्टिस ललित ने कहा कि 'मैंने हमेशा माना है कि सुप्रीम कोर्ट की भूमिका स्पष्टता और निरंतरता के साथ कानून बनाने की है, ताकि मुद्दों को तेजी से स्पष्ट किया जा सके. हम कड़ी मेहनत करेंगे और हमारे पास सालभर कम से कम एक संविधान पीठ हमेशा काम करेगी. इसके अलावा, जस्टिस ललित ने संकेत दिया है कि केसों को सूचीबद्ध करने के संबंध में प्रशासनिक जटिलताओं को दूर किया जाएगा.

जस्टिस ललित ने अपने भाषण में कहा- 'मैंने रजिस्ट्री अधिकारियों, SCBA और  SCORA अधिकारियों से बात की है. हम लिस्टिंग को यथासंभव सरल और पारदर्शी बनाने के लिए कड़ी मेहनत करेंगे. 

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जस्टिस ललित ने कहा कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट को मामलों को सूचीबद्ध ना करने और अत्यावश्यक मामलों को सूचीबद्ध करने में देरी के संबंध में कई शिकायतें मिली हैं. जस्टिस ललित ने लिस्टिंग प्रक्रिया को शीघ्र, आसान, सहज और नियमित करने का भरोसा दिलाया. उन्होंने कहा कि संविधान पीठ ज्यादा होंगी. पूरे साल एक संविधान पीठ के काम करने की जरूरत है. मेंशनिंग सभी कोर्ट में होगी.


 

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