शॉकिंग! UK ने बच्चों से छीन लिया सोशल मीडिया, स्कूल में फोन बैन... क्या अब बच्चे बचेंगे या और बिगड़ेंगे?

अब ब्र‍िटेन में स्कूलों में फोन अब लगभग खत्म और सोशल मीडिया पर बच्चों की उम्र सीमा या बैन, ये दोनों मुद्दे अब गंभीरता से चर्चा में हैं. सरकार कह रही है कि टेक्नोलॉजी अच्छी है, लेकिन बच्चों की जिंदगी को बर्बाद नहीं होने देगी.

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यूके सरकार ने स्कूलों में फोन और एडिक्टिव फीचर्स पर सख्त कदम उठाया यूके सरकार ने स्कूलों में फोन और एडिक्टिव फीचर्स पर सख्त कदम उठाया

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 20 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 3:28 PM IST

ब्रिटेन की सरकार ने बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल और स्कूलों में मोबाइल फोन पर सख्त कदम उठाने की घोषणा की है. 19 जनवरी 2026 को जारी एक प्रेस रिलीज में सरकार ने दो बड़े फैसले बताए हैं जो बच्चों की सेहत और पढ़ाई को बेहतर बनाने के लिए हैं.

सबसे पहले, स्कूलों में मोबाइल फोन पर अब और सख्ती आएगी. सरकार ने साफ कहा है कि स्कूल फोन-फ्री होने चाहिए यानी क्लास, ब्रेक, लंच टाइम या किसी भी समय बच्चों को फोन इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. ज्यादातर स्कूलों में पहले से ही फोन की पॉलिसी है, लेकिन अब ऑफस्टेड (स्कूलों की जांच करने वाली सरकारी एजेंसी) हर इंस्पेक्शन में चेक करेगी कि पॉलिसी सही से लागू हो रही है या नहीं. जो स्कूल मुश्किल में हैं, उन्हें स्पेशल मदद मिलेगी. एजुकेशन सेक्रेटरी ब्रिजेट फिलिपसन ने कहा कि स्कूलों में मोबाइल का कोई काम नहीं. कोई बहाना नहीं.

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सोशल मीडिया पर मांगी राय

दूसरा और बड़ा कदम सोशल मीडिया को लेकर है. सरकार एक बड़ा कंसल्टेशन (जनता से राय मांगने का प्रोग्राम) शुरू कर रही है. इसमें देखा जाएगा कि बच्चों के लिए सोशल मीडिया की सही न्यूनतम उम्र क्या होनी चाहिए. यहां तक कि ये भी विचार किया जा रहा है कि क्या किसी खास उम्र (जैसे 16 साल) से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया पूरी तरह बैन कर देना चाहिए  जैसे ऑस्ट्रेलिया में किया गया है.

सवाल जो पूछे जाएंगे

उम्र जांच कैसे और सटीक हो सकती है, ताकि बच्चे झूठ बोलकर अकाउंट न बना सकें.
क्या मौजूदा डिजिटल उम्र सीमा (डिजिटल एज ऑफ कंसेंट) बहुत कम है?
सोशल मीडिया ऐप्स में वो फीचर्स बंद या सीमित करने चाहिए जो लत लगाते हैं जैसे इन्फिनिट स्क्रॉलिंग (स्क्रॉल करते रहने की आदत), स्ट्रीक्स (रोज चेक-इन का सिस्टम) आदि.
माता-पिता को और कैसे मदद मिल सकती है जैसे आसान पैरेंटल कंट्रोल या स्क्रीन टाइम की गाइडलाइन.

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टेक्नोलॉजी सेक्रेटरी लिज केंडल ने कहा कि ऑनलाइन सेफ्टी एक्ट से पहले ही काफी कुछ अच्छा हुआ है, लेकिन माता-पिता अभी भी चिंतित हैं. इसलिए और कदम उठाने की जरूरत है. सरकार पूरे देश में मीटिंग्स करेगी, जहां माता-पिता, बच्चे और समाज के लोग अपनी राय देंगे. गर्मियों तक इस पर जवाब आएगा.

ये सब इसलिए क्योंकि सरकार मानती है कि ज्यादा स्क्रीन टाइम बच्चों की पढ़ाई, ध्यान, दोस्ती और मानसिक सेहत पर बुरा असर डाल रहा है. साथ ही, 5 से 16 साल के बच्चों के माता-पिता के लिए स्क्रीन टाइम की नई गाइडलाइन भी जल्द आएगी.

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