सुप्रीम कोर्ट ने अपने उस फैसले के खिलाफ दायर रिव्यू पिटीशन को खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि आयुर्वेद डॉक्टर, एलोपैथी डॉक्टरों के समान वेतन के हकदार नहीं हैं. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अभय एस ओक और जस्टिस पंकज मित्कथल की बेंच ने रिव्यू याचिका खारिज करते हुए कहा कि हमने 26 अप्रैल 2023 के फैसले और आदेश का अध्ययन किया है, जिसकी समीक्षा करने की मांग की गई है.
रिव्यू करते वक्त बेंच ने ये माना कि फैसले में कोई गलती नहीं है. इसलिए इसकी समीक्षा के लिए कोई आधार भी नहीं है. सुप्रीम कोर्ट के 6 महीने पहले 26 अप्रैल को आए फैसले के खिलाफ याचिकाकर्ता मेडिकल ऑफिसर्स (आयुर्वेद) एसोसिएशन और कुछ व्यक्तियों ने रिव्यू पिटीशन दायर की थी.
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने पहले अपने फैसले में कहा था कि एमबीबीएस डॉक्टरों को जटिल सर्जिकल प्रक्रियाओं में सहायता करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है. यह एक ऐसा कार्य है, जिसके लिए आयुर्वेदिक डॉक्टर सक्षम नहीं हैं. आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में पारंपरिक रूप से जटिल शल्य क्रिया नहीं होती.
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि हमें इसमें कोई संदेह नहीं है कि चिकित्सा की प्रत्येक वैकल्पिक प्रणाली का इतिहास में अपना गौरवपूर्ण स्थान हो सकता है. लेकिन आज चिकित्सा की स्वदेशी प्रणालियों के डॉक्टर जटिल सर्जिकल ऑपरेशन नहीं करते हैं.
संजय शर्मा